ताबूत पर काली पगड़ी, बिलखते समर्थक और सिर पीटती भीड़... अमेरिका-इजरायल से बदला लेने की कसमों के बीच थमा ईरान!

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का पार्थिव शरीर शुक्रवार को तेहरान में आम लोगों के दर्शन के लिए रखा गया. फरवरी में युद्ध की पहली एयरस्ट्राइक में उनकी मौत हुई थी. उनके साथ परिवार के चार अन्य सदस्य भी मारे गए थे. एक हफ्ते तक चलने वाले शोक कार्यक्रम में खामेनेई का पार्थिव शरीर कोम, नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा, और गुरुवार को मशहद में दफनाया जाएगा.

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तेहरान में खामेनेई के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे (Photo: Reuters) तेहरान में खामेनेई के पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:04 PM IST

तेहरान में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का पार्थिव शरीर शुक्रवार को एक बड़े हॉल में आम लोगों के दर्शन के लिए रखा गया. अमेरिका और इजरायल के हमलों में मारे गए खामेनेई के लिए ईरान पूरे एक हफ्ते तक शोक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है. इस दौरान देश और विदेश से बड़ी संख्या में लोग और नेता उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं.

37 साल तक ईरान पर शासन करने वाले खामेनेई की मौत फरवरी में युद्ध की पहली एयरस्ट्राइक में हुई थी. इस्लामी परंपरा के अनुसार मौत के एक दिन के भीतर अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए, लेकिन युद्ध के दौरान बड़े पैमाने पर अंतिम संस्कार करना खतरनाक माना गया. इसलिए पिछले महीने अस्थायी युद्धविराम समझौता होने तक इसे टाल दिया गया था.

गुरुवार देर रात खामेनेई का ताबूत लोगों के सामने लाया गया, जहां रोते हुए समर्थकों की भीड़ ने सिर पीटते हुए शोक जताया और ताबूत पर फूल बरसाए. शुक्रवार को उनका ताबूत, साथ ही उनके साथ मारे गए परिवार के अन्य सदस्यों के ताबूत, उस बड़े प्रार्थना हॉल में रखे गए जो पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी की याद में बनाया गया था. खामेनेई के साथ उनकी बेटी, दामाद, एक छोटी पोती और उनके बेटे मोजतबा खामेनेई की पत्नी की भी मौत हुई थी, जिनके ताबूत भी वहां रखे गए.

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ईरान ने खामेनेई को दी भावभीनी श्रद्धांजलि (Photo: Reuters)



खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है, लेकिन जिस हमले में उनके पिता की मौत हुई थी, उसमें वे भी घायल हुए थे और तब से उनकी कोई नई तस्वीर सामने नहीं आई है.

यह अंतिम संस्कार ऐसे समय हो रहा है जब ईरान के धार्मिक शासक और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स खुद को एक बड़े युद्ध से बचकर निकला हुआ मान रहे हैं, लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक करीब पांच दशक पहले हुई 1979 की क्रांति के बाद ईरान इस समय जितना अंदरूनी रूप से बंटा हुआ है, उतना पहले कभी नहीं रहा.

यह भी पढ़ें: ईरान में खामेनेई के अंतिम संस्कार पर डोनाल्ड ट्रंप का तंज, बोले- हमने ईरान को एक हफ्ते की छूट दी

देश की सरकार को जनता का समर्थन बहुत कमजोर हो चुका है. वहीं भारी प्रतिबंधों ने अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है और देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को सुरक्षाबलों ने सख्ती से दबाया है, जनवरी में इसी सिलसिले में हजारों प्रदर्शनकारी मारे गए थे.

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तेहरान में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया (Photo: AFP)



इन तमाम मुश्किलों के बावजूद इस हफ्ते सरकार ने एकता और ताकत दिखाने की पूरी कोशिश की है. तेहरान की सड़कों पर सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है, जहां सेना, पुलिस और बासिज पैरामिलिट्री फोर्स के जवान गश्त लगा रहे हैं. ईरान ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी भी दी है कि अंतिम संस्कार के दौरान किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

शुक्रवार को समारोह में रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव, चीन की नेशनल पीपल्स कांग्रेस के उप प्रमुख ही वेई, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और इराक के राष्ट्रपति निजार अमेदी समेत कई विदेशी नेता मौजूद रहे.

इसके अलावा इजरायली हमलों में मारे गए हिज़्बुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह और वरिष्ठ कमांडर इमाद मुगनिया के परिवार के लोग भी इस मौके पर पहुंचे. ईरान के राष्ट्रपति, संसद अध्यक्ष, विदेश मंत्री और अन्य बड़े नेता भी शुक्रवार सुबह श्रद्धांजलि देने पहुंचे.

खामेनेई के पार्थिव शरीर के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ (Photo: Reuters)


आने वाले दिनों में खामेनेई का पार्थिव शरीर ईरान और इराक के प्रमुख शिया धार्मिक शहरों कोम, नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा. सोमवार को तेहरान में एक बड़ा जुलूस निकाला जाएगा, इसके बाद मंगलवार को कोम में समारोह होंगे.

बुधवार को इराक के नजफ और कर्बला शहरों में कार्यक्रम होंगे, जिनमें ईरान से जुड़े क्षेत्रीय शिया गुटों के प्रमुख लोग शामिल होंगे. आखिर में गुरुवार को एक और जुलूस के बाद मशहद शहर में खामेनेई को दफनाया जाएगा, जो इमाम रज़ा की दरगाह के लिए मशहूर है और ईरान में बेहद पवित्र माना जाता है.

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