'मैंने पत्नी को मारा, लेकिन वह मर्डर नहीं', भारतीय मूल के शख्स का ऑस्ट्रेलिया की कोर्ट में चौंकाने वाला बयान

42 वर्षीय भारतीय मूल के व्यक्ति विक्रांत ठाकुर ने अपनी 36 वर्षीय पत्नी सुप्रिया ठाकुर की जान लेने की बात स्वीकार कर ली है. एडीलेड मजिस्ट्रेट कोर्ट में वीडियो लिंक के जरिए पेश हुए विक्रांत ठाकुर ने कहा, "मैं मैनस्लॉटर के लिए अपनी गलती मानता हूं, लेकिन हत्या के लिए दोषी नहीं हूं."

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36 साल की सुप्रिया ठाकुर अपने घर पर बेहोश मिली थीं, बाद में उनकी मौत हो गई. (File Photo: Gofundme) 36 साल की सुप्रिया ठाकुर अपने घर पर बेहोश मिली थीं, बाद में उनकी मौत हो गई. (File Photo: Gofundme)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:59 PM IST

ऑस्ट्रेलिया के एडीलेड से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. 42 वर्षीय भारतीय मूल के व्यक्ति विक्रांत ठाकुर ने अपनी 36 वर्षीय पत्नी सुप्रिया ठाकुर की जान लेने की बात स्वीकार कर ली है. हालांकि, अदालत में पेशी के दौरान उसने एक अजीबोगरीब दलील देते हुए कहा कि उसने अपनी पत्नी को मारा जरूर है, लेकिन वह हत्या का दोषी नहीं है.

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दरअसल, एडीलेड मजिस्ट्रेट कोर्ट में वीडियो लिंक के जरिए पेश हुए विक्रांत ठाकुर ने कहा, "मैं मैनस्लॉटर के लिए अपनी गलती मानता हूं, लेकिन हत्या के लिए दोषी नहीं हूं." 

कानूनी शब्दावली में मर्डर तब माना जाता है जब इरादा पहले से तय हो, जबकि 'मैनस्लॉटर' का मतलब है ऐसी परिस्थिति जिसमें किसी की जान तो गई हो, लेकिन मारने का इरादा या पूर्व-नियोजित साजिश न हो.

एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, विक्रांत ठाकुर ने वीडियो लिंक के जरिए एडिलेड मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेशी के दौरान कहा, “मैं मैन्सलॉटर का दोष स्वीकार करता हूं, लेकिन मर्डर का दोषी नहीं हूं.” यह बयान उन्होंने अपने वकील जेम्स मार्कस के निर्देश पर दिया. यह उनकी दूसरी अदालत में पेशी थी, जब से उन पर अपनी 36 वर्षीय पत्नी सुप्रिया ठाकुर की हत्या का आरोप लगाया गया है.

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यह मामला अब भी जांच के अधीन है और पुलिस लगातार सबूत जुटाने में लगी हुई है. अदालत को बताया गया कि जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की अंतिम प्रकृति तय की जाएगी. कानूनी तौर पर मर्डर और मैन्सलॉटर दोनों गंभीर अपराध हैं, लेकिन दोनों में अहम अंतर आरोपी की मंशा (इरादा) को लेकर होता है. मर्डर में जानबूझकर हत्या की मंशा साबित होती है, जबकि मैन्सलॉटर में मौत तो होती है, लेकिन उसे पूर्व नियोजित या जानबूझकर अंजाम नहीं दिया गया माना जाता है.

यह मामला अब अप्रैल में दोबारा अदालत में आएगा, जिसके बाद विक्रांत ठाकुर को मुकदमे के लिए साउथ ऑस्ट्रेलिया की सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जाएगा.

यह घटना 21 दिसंबर को एडिलेड के नॉर्थफील्ड इलाके में स्थित एक घर में हुई थी. अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, रात करीब 8:30 बजे पुलिस को घर में झगड़े की सूचना मिली थी. मौके पर पहुंचने पर पुलिस ने सुप्रिया ठाकुर को बेहोशी की हालत में पाया. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर ही सीपीआर देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी.

पुलिस के मुताबिक, घटना के समय घर में एक अन्य व्यक्ति भी मौजूद था, जिसे कोई चोट नहीं आई. जांच के तहत पुलिस ने विक्रांत और सुप्रिया ठाकुर के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं. विक्रांत ठाकुर की पहली पेशी 22 दिसंबर को हुई थी, जिसके बाद डीएनए जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करते हुए मामले को 16 हफ्तों के लिए स्थगित कर दिया गया था.

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सुप्रिया ठाकुर के लिए बनाए गए एक गोफंडमी पेज के अनुसार, वह अपने दयालु स्वभाव और दूसरों की मदद करने की भावना के लिए जानी जाती थीं. वह एक रजिस्टर्ड नर्स बनने का सपना देख रही थीं. उनके दोस्तों और समुदाय के सदस्यों द्वारा बनाए गए इस पेज में लिखा गया है कि उनकी अचानक मौत ने उनके बेटे की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है और वह अब अपनी मां के बिना अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहा है.

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