पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. पाकिस्तान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली अपनी रिव्यू याचिका वापस ले ली है, जिसमें इमरान खान को जेल से अस्पताल शिफ्ट करने का आदेश दिया गया था. सरकार ने यह याचिका सुप्रीम कोर्ट की ओर से आपत्तियां उठाए जाने के बाद वापस ली.
सरकार ने इमरान खान को इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में मेडिकल जांच और इलाज के लिए भेजने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने सरकार की याचिका पर कुछ आपत्तियां दर्ज कीं. इसके बाद सरकार ने फिलहाल याचिका वापस ले ली है. सूत्रों के मुताबिक, आपत्तियों को दूर करने के बाद सरकार इसे दोबारा दाखिल कर सकती है.
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सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे कई अहम निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान के इलाज के लिए पांच विशेषज्ञ डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड बनाने का आदेश दिया था. साथ ही उनकी बहन उजमा खान और निजी डॉक्टर फैसल सुल्तान को इलाज की प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी गई थी.
कोर्ट ने इमरान को हर सप्ताह परिवार से मुलाकात की भी इजाजत दी है. इसके अलावा लंदन में रहने वाले उनके दोनों बेटों से सप्ताह में दो बार फोन पर बात करने की अनुमति दी गई है.
हालांकि, कोर्ट ने इमरान के परिवार, उनकी पार्टी और वकीलों को मामले की अगली सुनवाई तक उनकी सेहत से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने से रोक दिया है. इस मामले में अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी.
सरकार ने आदेश पर क्यों जताई थी आपत्ति?
पाकिस्तान सरकार की ओर से दायर रिव्यू याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने जेल अधिकारियों का पक्ष सुने बिना इमरान को अस्पताल भेजने का आदेश दिया. सरकार ने यह भी चिंता जताई थी कि अगर इमरान को ऐसी सुविधा दी जाती है, तो दूसरे कैदी भी इसी तरह की मांग कर सकते हैं.
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73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं. वह कई मामलों में सजा का सामना कर रहे हैं. पिछले कुछ समय से उनकी सेहत को लेकर परिवार और PTI लगातार चिंता जताते रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इमरान की पत्नी बुशरा बीबी ने अडियाला जेल में उनसे मुलाकात की थी. उनकी बहन नूरीन नियाजी ने भी करीब नौ महीने बाद उनसे मुलाकात की थी. अब सरकार की याचिका वापस लिए जाने के बाद इमरान को अस्पताल शिफ्ट किए जाने की उम्मीद बढ़ गई है.
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