सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति असद को कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा, वॉर क्राइम के दोषी पाए गए

सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद को मौत की सजा सुनाई गई है. असद की सरकार पर लगे आरोपों में आम नागरिकों की सुनियोजित हत्या, हिरासत में यातना और मौत, लोगों को जबरन गायब करना, मनमानी गिरफ्तारियां और नागरिक इलाकों पर हमले शामिल हैं.

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बशर अल असद अभी रूस में रहते हैं. (File Photo: ITG) बशर अल असद अभी रूस में रहते हैं. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:37 PM IST

सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद को मौत की सजा सुनाई गई है. मंगलवार को सीरिया की एक अदालत ने सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर असद और उनके छोटे भाई माहेर को जब मौत की सज़ा सुनाई तो वे कोर्ट में मौजूद नहीं थे. यह सज़ा उन्हें सीरिया के 14 साल लंबे संघर्ष के दौरान मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों और युद्ध अपराधों के लिए सुनाई गई है.इस संघर्ष में लगभग पांच लाख लोग मारे गए थे. सजा सुनाते वक्त अशद कोर्ट में मौजूद नहीं थे. सीरिया में सत्ता परिवर्तन के बाद बशर अल असद रूस में निर्वासित जीवन गुजार रहे हैं. 

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इसी मामले में असद के ममेरे भाई आतिफ़ नजीब को भी मौत की सज़ा सुनाई गई. नजीब पर दक्षिणी प्रांत दारा में कार्रवाई का नेतृत्व करने का आरोप था, जिसके कारण विद्रोह हुआ और बाद में गृह युद्ध छिड़ गया.

कड़ी सुरक्षा के बीच जब जज सज़ा सुना रहे थे, तब नजीब कैदी की वर्दी पहने हुए एक पिंजरे के अंदर खड़ा था. 

दिसंबर 2014 में विद्रोहियों के दमिश्क में घुसने के बाद असद और उनके भाई माहेर रूस भाग गए थे. 

बाद में नजीब को हिरासत में ले लिया गया और उन पर मुक़दमा चलाया गया; वह इस तरह के मुक़दमे का सामना करने वाले सबसे ऊंचे ओहदे वाले अधिकारियों में से एक थे. नजीब सीरियाई सेना के पूर्व ब्रिगेडियर जनरल हैं, जो 2011 में असद के शासनकाल के दौरान दक्षिणी सीरिया के दारा प्रांत में पॉलिटिकल सिक्योरिटी ब्रांच के प्रमुख थे. 

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असद ने साल 2000 में अपने पिता हाफ़ेज़ अल-असद की जगह ली और दिसंबर 2024 में सत्ता से हटाए जाने तक सीरिया पर शासन किया. उनके पिता ने लगभग तीन दशकों तक देश पर शासन किया था. 

सीरिया में गृह युद्ध 2011 में तब शुरू हुआ जब सुरक्षा बलों ने डेरा में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबाया. यह विद्रोह पूरे देश में फैल गया और इसमें सरकारी सेना, हथियारबंद विपक्षी गुट और विदेशी ताकतें शामिल हो गईं, जिससे लाखों लोग मारे गए और लाखों लोग बेघर हो गए.

युद्ध के दौरान, असद सरकार पर गैर-कानूनी हत्याओं, यातना, लोगों को जबरन गायब करने, मनमाने ढंग से हिरासत में लेने और आम नागरिकों वाले इलाकों पर हमले करने के गंभीर आरोप लगे. 

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