मुनीर को याद दिलाई 1971 की हार... मौलाना ने फिर कहा- पाकिस्तान के टुकड़े करना चाहते हैं

पाकिस्तान में बढ़ती हिंसा और अलगाव की आवाजों के बीच मौलाना फजलुर रहमान ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को 1971 की हार और भारत के सामने आत्मसमर्पण की याद दिलाई. उन्होंने बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पीओके के हालात पर सवाल उठाते हुए चेताया कि लंबे समय तक खून-खराबा जारी रहा तो देश की भौगोलिक स्थिति में बदलाव आ सकता है.

Advertisement
आसिम मुनीर, फजलुर रहमान. (Photo- ITG) आसिम मुनीर, फजलुर रहमान. (Photo- ITG)

सुबोध कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 24 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:18 AM IST

पाकिस्तान के बड़े धार्मिक और राजनीतिक नेता मौलाना फजलुर रहमान ने एक बार फिर सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर निशाना साधा है. उन्होंने पाकिस्तान के मौजूदा हालात की तुलना 1971 के दौर से करते हुए सेना के ताकत के दावों पर सवाल उठाए. उनके बयान में पाकिस्तान के टूटने और उसकी भौगोलिक सीमाओं में बदलाव की आशंका साफ दिखाई दी.

फजलुर रहमान ने कहा कि वह मानते हैं कि सेना और उसके नेतृत्व के पास ताकत है, लेकिन इतिहास को नहीं भुलाया जा सकता. उन्होंने दिसंबर 1971 का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के सामने हथियार डालने से एक दिन पहले जनरल याहया खान ने पाकिस्तान की जनता को संबोधित कर कहा था कि सेना गली-गली और खेतों से लेकर पहाड़ों तक लड़ाई लड़ेगी. लेकिन अगले ही दिन पाकिस्तानी सेना ने हथियार डाल दिए.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 3 दिन तक कई बार पाकिस्तान पहुंचे तुर्की के मिलिट्री प्लेन, क्या हो रही कोई 'सीक्रेट प्लानिंग'?

पाकिस्तान के मौलाना ने कहा, "ये बड़े-बड़े बोल तो हमने उस वक्त भी सुने हैं." फजलुर रहमान ने सवाल किया कि जब पाकिस्तान की जनता इतनी मुश्किलों से गुजर रही है तो उसे लगातार मुश्किलों में क्यों डाला जा रहा है.

बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा का जिक्र

मौलाना ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के हालात पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इन इलाकों में जंग जैसे हालात हैं और लगातार खून बह रहा है. उन्होंने पीओके के रावलाकोट में लंबे समय से चल रहे प्रदर्शन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वहां लोग करीब तीन महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनसे बातचीत नहीं की जा रही. फजलुर रहमान ने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में अलगाव की मांग करने वाले तत्वों को मजबूत होने का मौका मिल सकता है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: इमरान खान के लिए एक हुए दिग्गज... गावस्कर और कपिल देव समेत 22 पूर्व कप्तानों ने पाकिस्तान के PM को लिखी चिट्ठी, रखीं तीन बड़ी मांगें

'क्या मकसद है, मुल्क को तोड़ना है?'

फजलुर रहमान ने सवाल उठाया कि आखिर इन हालात का मकसद क्या है. उन्होंने कहा कि जब किसी इलाके में लंबे समय तक खून बहता है तो यह आगे होने वाले भौगोलिक बदलावों का संकेत भी बन सकता है. उन्होंने 1979 से अफगानिस्तान में जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 45-46 साल से इस पूरे क्षेत्र में खून बह रहा है. उनका कहना था कि पाकिस्तान को अपने इरादों के बारे में जनता को स्पष्ट करना चाहिए.

फजलुर रहमान का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के कई इलाकों में सुरक्षा और राजनीतिक चुनौतियां बनी हुई हैं. उनके 1971 के संदर्भ और भौगोलिक बदलाव वाले बयान ने पाकिस्तान की सेना और सरकार के सामने नई राजनीतिक बहस खड़ी कर दी है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »