दुबई में 'तोप' दागने की परंपरा अचानक हो गई बंद... जंग के बीच रमजान की सदियों पुरानी परंपरा टूटी

दुबई में रमजान शुरू होने से लेकर ईद के चांद निकलने तक हर रोज रोजा इफ्तार के समय तोप दागने की परंपरा है. सादियों से चली आ रही ये परंपरा इस बार अचानक बंद कर दी गई है, क्योंकि पुलिस को लगता है कि ईरान युद्ध के दौरान अफरा-तफरी न फैल जाए.

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दुबई में रोजा इफ्तार के दौरान तोप दागने की परंपरा बंद (Photo-social media) दुबई में रोजा इफ्तार के दौरान तोप दागने की परंपरा बंद (Photo-social media)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 13 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:11 PM IST

दुबई में रमजान के पवित्र महीने में 'रोजा इफ्तार' के समय तोप दागने की परंपरा इस बार रोक दी गई है. रमजान का चांद निकलने पर तोप दागा गया था, उसके बाद कुछ दिनों तक रोजा इफ्तार के समय यह प्रक्रिया चलती रही. 28 फरवरी के बाद से इफ्तार के समय तोप के गोले की गूंज नहीं सुनाई दे रही है. 

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दुबई सहित संयुक्त अरब अमीरात में रोजा इफ्तार के वक्त तोप दागने की प्रथा फिलहाल रोक दी गई है. इसे स्थागित करने के पीछे की वजह अमेरिका-इजरायल की ईरान के साथ चल रही जंग है. 

अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला किया तो उसके जवाब में ईरान लगातार खाड़ी देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. ईरान लगातार दुबई पर हमले कर रहा है, जिसके चलते यूएई में रोजा इफ्तार के वक्त तोप दागना बंद कर दिया है. 

दुबई में रोजा इफ्तार के समय नहीं दागे जा रहे तोप 
दुबई पुलिस के लेफ्टिनेंट कर्नल अब्दुलला अमीमी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि रमजान में रोजा इफ्तार के समय तोप दागने की कार्यक्रम रोक दिया है. ऐसा करने की हमें इजाजत मिली है, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध चल रहा. ऐसे में दुबई पुलिस ने ऐहतियात के तौर पर यह फैसला लिया है. 

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दुबई पुलिस को डर है कि रोजा इफ्तार के दौरान तोप दागे जाने की तेज गूंज से लोगों में अफरा-तफरी मच सकती है, क्योंकि लोग इसे मिसाइल हमले या किसी हमले की आवाज समझ सकते हैं. इसीलिए तोप दागे जाने की परंपरा को स्थागित कर दिया है. 

रोजा इफ्तार के समय तोप के बजाय ढोल बज रहे
दुबई में लोग तोप दागे जाने की आवाज सुनकर रोजा इफ्तार करते थे. यह सदियों पुरानी परंपरा है, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए दुबई पुलिस ने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह अस्थायी रोक लगाई है.  पुलिस ने वैकल्पिक इंतजाम किया है. तोप की जगह अब इफ्तार के समय के लिए पारंपरिक ड्रम (ढोल) बजाने का उपयोग किया जा रहा है, ताकि लोगों में दहशत न फैले. 

दुबई पुलिस रमजान के पवित्र महीने के चांद दिखने की घोषणा तोप दागने से शुरू होती थी. इस बाद पूरे 30 दिनों तक रमजान  में रोजा इफ्तार के समय की सूचना इसी तोप दागकर दी जाती थी, जिसकी आवाज सुनकर दुबई के निवासी रोजा इफ्तार करते थे. लेकिन, ईरान के साथ युद्ध छिड़ने के बाद इसे बंद कर दिया गया है और अब उसकी जगह पर ढाल बजाए जा रहे हैं. 

दुबई में मोबाइल तोप से गोले दागने की परंपरा
रमजान में दुबई के छह स्थानों पर तोप दागे जाने की परंपरा है. जुमेराह बीच रेजिडेंस (जेबीआर), बुर्ज खलीफा,  दमाक हिल्स, एक्सपो सिटी दुबई का अल वासल प्लाजा, दुबई फेस्टिवल सिटी और विदा क्रीक हार्बर होटल शामिल हैं. इसके अलावा दुबई पुलिस ने मोबाइल रमजान तोप के लिए 17 पड़ाव तैयार किए Ls, जो पवित्र महीने के दौरान पूरे अमीरात के विभिन्न इलाकों का दौरा कर दागे जाते हैं. 

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मोबाइल तोप दुबई गार्डन्स से शुरू होकर वन एंड ओनली वन ज़ाबील, उम सुकैम मजलिस, जेबीआर, बाब अल शम्स होटल, अल मैदान होटल, ग्लोबल विलेज, अटलांटिस होटल, नाद अल शेबा मजलिस, मिरदिफ, बुर्ज खलीफा, लेहबाब, अल खवानीज मजलिस, बुलेवार्ड मरीना, अल वारका, विदा क्रीक हार्बर और अल बरशा पार्क सहित विभिन्न स्थानों पर दी जाती थी, लेकिन अब अलग-अलग इलाके में ढाल बजाकर इफ्तार के वक्त की सूचना दी जाती है. 

दुबई में रमजान के दौरान सदियों पुरानी परंपरा
रमजान के दौरान तोप दागने की परंपरा संयुक्त अरब अमीरात की सबसे प्रिय परंपराओं में से एक है, जिसे दुबई पुलिस बहुत ही सावधानीपूर्वक संरक्षित और आधुनिक बना रखा है ताकि पवित्र महीने की भावना को करीब लाया जा सके. दुबई में रमजान के दौरान प्रतिदिन तोप दागने के समारोह परिवारों और पर्यटकों को आकर्षित करता था.

अरब और इस्लामी रीति-रिवाजों को पुनर्जीवित करने में मदद मिलती है और रमजान के दौरान सामुदायिक भागीदारी मजबूत होती हैय दुबई पुलिस छह दशकों से अधिक समय से इस प्रथा का पालन कर रही है, इफ्तार के समय को चिह्नित करती है और रोज़ा रखने वाले निवासियों की खुशी में शामिल होती है. 

रमजान शुरू होने से ईद चांद निकलने के दौरान प्रत्येक तोप कुल 35 गोले दागती थी. रमजान का चांद दिखने की पुष्टि के लिए दो गोले, इफ्तार का संकेत देने के लिए सूर्यास्त के समय एक गोला, ईद अल फितर के पहले दिन की घोषणा के लिए एक गोला और ईद की नमाज़ के बाद दो गोले दागे जाते हैं, लेकिन ईरान के साथ तनाव को देखते हुए रोक दिया गया है. 
 

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