एक कैदी को मौत की सजा देने के लिए उसके नसों में दो बार जहरीला इंजेक्शन दिया गया. सजायाफ्ता कैदी क्रिस्टा पाइक करीब डेढ़ घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच झूलती रही. दर्द से तड़पती रही. लेकिन उसकी मौत नहीं हुई. इस घटना ने अमेरिकी ज्यूडिशियल सिस्टम को झकझोर कर रख दिया. अमेरिका के टेनेसी में 1995 के हत्या मामले में मौत की सजा पा चुकी पाइक को पेंटोबार्बिटल की दो डोज दी गईं, मगर दोनों नाकाम रहीं. डेथ चैंबर में उसकी सांसें चलती रहीं और आखिरकार मौत की सजा देने की कोशिश रोकनी पड़ी. इस महिला को गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, अब वही सिस्टम उसकी जान बचाने की कोशिश कर रहा है जिसने उसके लिए मौत की सजा मुकर्रर की थी. अब क्रिस्टा पाइक के वकील कह रहे हैं उसकी मौत की सजा माफ कर दी जाए.
कौन है क्रिस्टा पाइक? किस जुर्म में उसे मौत की सजा दी गई? कैसे तकदीर उसे मौत के मुंह से खींचकर ले आई. पूरी कहानी हम आपको बताते हैं.
क्राइम से क्रिस्टा का वास्ता शुरू होता है 1995 से. तब क्रिस्टा पाइक 18 साल की थी. कोलीन स्लेमर नाम की 19 साल की लड़की उसका क्लासमेट थी. सरकारी वकीलों के अनुसार पाइक को शक था कि स्लेमर उसके बॉयफ्रेंड के करीब आ रही है. इसी ईर्ष्या में उसने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर स्लेमर को सुनसान जगह पर बुलाया. दोनों ने उसके साथ मारपीट की और पाइक ने बॉक्स कटर से उसे काटा, जबकि उस पर डामर के बड़े टुकड़े से भी हमला किया गया. बाद में स्लेमर के शरीर पर पेंटाग्राम जैसा प्रतीक भी बनाया गया, जिससे उस समय इस मामले को ‘सैटनिक पैनिक’ से जोड़कर काफी चर्चा हुई.
पाइक गजब नफरत में डूबी थी. उसने इस कत्ल में अपने रोल से कभी इनकार नहीं किया. उसके बॉयफ्रेंड को जो अपराध के समय 17 साल का था. उसे पैरोल की गुंजाइश के साथ उम्रकैद की सजा मिली.
क्रिस्टा पाइक को एक अमेरिकी अदालत ने 1996 में इस मर्डर का दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई. ट्रायल में जूरी ने उसे फर्स्ट-डिग्री मर्डर और हत्या की साजिश का दोषी पाया. साथ ही साजिश के आरोप में ट्रायल जज ने उसे 25 साल की अलग सजा दी.
इसके बाद पाइक ने सजा के खिलाफ अपील की. टेनेसी कोर्ट ऑफ क्रिमिनल अपील्स ने इस सजा को कायम रखा. 1998 में टेनेसी सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे कायम रखा. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 1999 में उसकी अपील सुनने से इनकार कर दिया. इसके बाद वर्षों तक उसकी सजा पर कानूनी लड़ाई चलती रही.
क्रिस्टा पाइक की अपील की प्रक्रिया पूरी होने के बाद टेनेसी सरकार ने उसकी मृत्युदंड की तारीख तय करने के लिए टेनेसी सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया. कोर्ट ने 30 सितंबर 2025 को आदेश जारी कर उसकी मौत की सजा को 30 सितंबर 2026 को लागू करने की तारीख तय कर दी.
फिर आया 30 सितंबर...
2026 में क्रिस्टा पाइक 48 वर्ष की हो चुकी थी. 30 सितंबर 2026 को टेनेसी की जेल में क्रिस्टा पाइक को घातक इंजेक्शन देने की प्रक्रिया शुरू हुई. लेकिन शुरुआत से ही मेडिकल टीम को उसकी नस में सुई लगाने में परेशानी हुई. क्रिस्टा के वकील रैंडी स्पाइवी के मुताबिक अधिकारियों ने करीब एक घंटे तक उसकी नस तलाशने की कोशिश की और उसके बाएं हाथ में कम से कम सात बार सुई लगाई.
अब इसे क्या कहा जाए. शरीर विज्ञान की जटिलताएं या फिर विधि का विधान.
डॉक्टरों को नस ढूंढने में मुश्किल हो रही थी. क्रिस्टा पाइक ने खुद अधिकारियों को बताया कि उसके कंधे के ऊपर की तरफ नस मिल सकती है. उसके वकील के मुताबिक, वह बार-बार कह रही थी- “यहां कोशिश कीजिए.” इस दौरान उसने जेल अधिकारियों से यह भी पूछा कि क्या उसके हाथ को इस तरह महसूस होना सामान्य है.
इसके बाद उसे घातक दवा पेंटोबार्बिटल की पहली डोज दी गई. कायदे से इसके बाद क्रिस्टा धीरे-धीरे शांत हो जाना चाहिए था. लेकिन यहां चमत्कार जैसा ही हुआ. इंजेक्शन का कोई असर नहीं हुआ. इसके बाद बैकअप डोज भी दी गई. इसके बावजूद पाइक की मौत नहीं हुई. एक घंटे से ज्यादा समय बीतने के बाद भी वह सांस ले रही थी और खर्राटे लेने की आवाज सुनाई दे रही थी.
आखिरकार डेथ चैंबर का माइक्रोफोन बंद कर दिया गया और मौत की सजा देने की कोशिश रोक दी गई.
इसके बाद पाइक को अस्पताल ले जाया गया. उसके वकीलों ने गुरुवार को बताया कि वह गंभीर हालत में है और उसे जीवन रक्षक ट्रीटमेंट दिया जा रहा है. वकील रैंडी स्पाइवी ने कहा कि उन्हें फिलहाल उसकी हालत और भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि वह अभी जिंदा है.
वकील स्टीव फेरेल के मुताबिक पाइक को पूरी जिंदगी नस में सुई लगाने और खून निकालने में परेशानी होती रही थी. वकीलों का कहना है कि संभव है कि जहरीली दवा नस में सही तरीके से नहीं पहुंची और दवा ब्लड सर्कुलेशन में जाने के बजाय उसके हाथ के आसपास के टिश्यू में चली गई. हालांकि प्रशासन ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि घातक इंजेक्शन आखिर क्यों काम नहीं कर पाया.
पाइक के वकील ने इस पूरी प्रक्रिया को बेहद क्रूर और यातनापूर्ण बताया. उनका कहना था कि उन्होंने डेथ चैंबर में 90 मिनट से ज्यादा समय तक पाइक को बात करते, गाते और फिर जोर-जोर से खर्राटे लेते सुना. वकीलों ने यह आशंका भी जताई है कि इस दौरान शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण पाइक के दिमाग को नुकसान पहुंचा हो सकता है.
क्या होता है जहरीला इंजेक्शन पेंटोबार्बिटल
पेंटोबार्बिटल एक बार्बिट्यूरेट दवा है, जो नर्वस सिस्टम की गतिविधि को धीमा करती है. चिकित्सा क्षेत्र में इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से शांत करने, नींद लाने या दौरे नियंत्रित करने जैसे उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है. इसकी अधिक मात्रा सांस लेने और दिल की गतिविधि को इतना धीमा कर सकती है कि जान जाने का खतरा पैदा हो जाता है.
इसी वजह से कुछ अमेरिकी राज्यों में पेंटोबार्बिटल का इस्तेमाल मृत्युदंड के लिए घातक इंजेक्शन में किया गया है. प्रक्रिया में दवा की ऐसी मात्रा दी जाती है जिसका उद्देश्य व्यक्ति को बेहोशी की गहरी अवस्था में ले जाना और फिर शरीर की महत्वपूर्ण गतिविधियों को बंद करना होता है.
अब आगे क्या होगा?
पाइक के वकील अब चाहते हैं कि उनकी मौत की सज़ा को कम कर दिया जाए. 50 साल की पाइक को 18 साल की उम्र में किए गए एक मर्डर के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी. वह टेनेसी में 200 से ज़्यादा सालों में फांसी पाने वाली पहली महिला होतीं.
एक अपील कोर्ट ने बुधवार सुबह तय समय से एक घंटे पहले उसकी मौत की सजा पर रोक लगा दी थी, लेकिन कुछ घंटों बाद US सुप्रीम कोर्ट ने उस रोक को हटा दिया.
aajtak.in