आसमान से 'चेसबोर्ड' की तरह दिखने वाला शहर, जिसका आर्किटेक्चर है सबसे जुदा!

दुनिया में शायद ही कोई ऐसा शहर होगा जो जमीन पर जितना खूबसूरत है, आसमान से देखने पर उससे कहीं ज्यादा हैरान करने वाला लगता है. ये शहर आसमान से एक चेस बोर्ड की तरह दिखता है. इस शहर का अनोखा आर्किटेक्चर दुनिया भर के आर्किटेक्ट इंजीनियर्स के लिए एक तीर्थ स्थल जैसा है. जानिए इसका राज क्या है और ये शहर कैसे आधुनिक दौर में खुद को बदल रहा है.

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डिजाइनर इल्डेफॉन्स सेर्डा ने ये अद्भुत डिजाइन 1850 के दशक में बनाया था. (Photo- ITGD) डिजाइनर इल्डेफॉन्स सेर्डा ने ये अद्भुत डिजाइन 1850 के दशक में बनाया था. (Photo- ITGD)

संदीप कुमार सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 09 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:10 AM IST

कल्पना कीजिए कि आप एक हवाई जहाज में बैठे हैं, खिड़की से नीचे झांकते हैं और अचानक आपको नीचे एक ऐसा शहर दिखाई देता है जो किसी कंप्यूटर चिप या शतरंज की परफेक्ट बिसात जैसा लगता है. हर ब्लॉक एक समान चौकोर डिब्बा, हर गली एक सीधी रेखा, और हर मोड़ पर एक परफेक्ट कट! यह कोई साइंस-फिक्शन फिल्म का सेट नहीं है, यह स्पेन का खूबसूरत शहर बार्सिलोना है.

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अगर आप इन चौकोर ब्लॉकों को गौर से देखेंगे, तो पाएंगे कि इनके कोने तीखे 90 डिग्री वाले नहीं हैं, बल्कि उन्हें 45 डिग्री पर काट दिया गया है. इसे अष्टकोणीय यानी 'ऑक्टोगोनल ब्लॉक' कहते हैं. डिजाइनर इल्डेफॉन्स सेर्डा ने यह अद्भुत डिजाइन 1850 के दशक में बनाया था, जब कारों का ठीक से आविष्कार भी नहीं हुआ था. लेकिन वे भांप गए थे कि भविष्य में जब स्टीम या ऑटोमोटिव गाड़ियां आएंगी, तो तीखे मोड़ों पर एक्सीडेंट और हैवी ट्रैफिक जाम होगा.

इन 45-डिग्री कटे हुए कोनों की वजह से चौराहों पर खुली जगह बनी, जिससे हवा का वेंटिलेशन बेहतर हुआ और आज के दौर में गाड़ियों को मुड़ने के लिए परफेक्ट विजिबिलिटी मिलती है. आज यही कटे हुए कोने बार्सिलोना की सबसे बड़ी यूएसपी हैं.

(Photo- ITGD)

19वीं सदी के मध्य का बार्सिलोना आज जैसा चमचमाता बिल्कुल नहीं था. शहर अपनी पुरानी मध्यकालीन दीवारों के भीतर बुरी तरह सिमटा हुआ था. जनसंख्या घनत्व इतना ज्यादा था कि तंग गलियों में सूरज की रोशनी तक नहीं पहुंचती थी. गंदगी, प्रदूषण और हैजा जैसी महामारियों ने शहर को नरक बना दिया था. हालत यह थी कि उस वक्त यहां के आम लोगों की औसत उम्र घटकर सिर्फ 30 से 35 साल रह गई थी. तब बार्सिलोना प्रशासन ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया और शहर की दम घोटने वाली पुरानी दीवारों को ढहा दिया. नए शहर को डिजाइन करने का जिम्मा मिला एक दूरदर्शी इंजीनियर इल्डेफॉन्स सेर्डा को.

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सेर्डा सिर्फ एक इंजीनियर नहीं थे, वे एक समाजवादी विचारक भी थे. उन्होंने अर्बनाइजेशन यानी शहरीकरण शब्द को नए सिरे से परिभाषित किया. उनका मानना था कि अमीर हो या गरीब, हर इंसान को ताजी हवा, धूप और हरियाली का समान अधिकार मिलना चाहिए. इसलिए पारंपरिक टाउन प्लानिंग को ठुकराते हुए उन्होंने पूरे शहर को समान आकार और शेप के ब्लॉक्स में बांट दिया. 

सेर्डा के मूल प्लान के मुताबिक, हर चौकोर ब्लॉक के केवल दो या तीन तरफ ही इमारतें बननी थीं और बीच का पूरा हिस्सा एक बड़े सार्वजनिक पार्क या बगीचे के लिए खाली छोड़ा जाना था. वे चाहते थे कि हर नागरिक जब अपने घर की खिड़की खोले, तो उसे कंक्रीट के बजाय पेड़-पौधे दिखें. हालांकि, बाद के दशकों में व्यावसायिक फायदों के चक्कर में इन भीतरी बगीचों में भी निर्माण कर दिया गया.

कहा जाता है कि बार्सिलोना को सजाने में दिमाग सेर्डा का था, तो आत्मा एंटनी गौडी की. सेर्डा ने बार्सिलोना को एक अनुशासित और गणितीय दिमाग दिया, तो महान आर्किटेक्ट एंतोनी गौडी ने इसमें एक जादुई कलात्मक आत्मा फूंक दी. गौडी 'कैटलन मॉडर्निज्म' के प्रणेता थे. उनका मानना था कि सीधी रेखाएं इंसानों की बनाई हुई हैं, जबकि भगवान की बनाई प्रकृति में सब कुछ घुमावदार यानी कर्व में था और इसका कारण जैविक है. 

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(Photo- ITGD)

गौडी ने अपनी इमारतों में सीधी रेखाओं का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया. उनकी बनाई कासा बात्लो की छत किसी ड्रैगन की रीढ़ जैसी लगती है, तो कासा मिला की बालकनियां समुद्र की लहरों जैसी दिखती हैं. वहीँ शहर के केंद्र में स्थित सग्रादा फैमिलिया चर्च एक अजूबा माना जाता है. इसके भीतर के खंभे पत्थरों के पेड़ जैसे लगते हैं, जो प्रकृति और आध्यात्म का अनूठा मिश्रण हैं.

आज शहर की आबादी लगभग 16.5 लाख है और पूरे मेट्रोपॉलिटन एरिया में 55 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं. सालाना 1 करोड़ से अधिक पर्यटकों को संभालने वाला यह शहर आज अपनी सबसे बड़ी समस्या- प्रदूषण और गाड़ियों की भीड़ से निपटने के लिए सेर्डा के ही प्लान को एक नए रूप में लागू कर रहा है, जिसे 'सुपरब्लॉक्स' कहा जाता है. कई ब्लॉक्स को मिलाकर सुपरब्लॉक्स बनाए जा रहे हैं, कई ब्लॉक्स को 'नो-कार जोन' घोषित किया जा रहा है.  गाड़ियों को केवल इस सुपरब्लॉक के बाहरी पेरीमीटर पर चलने की इजाजत होती है जबकि अंदर के इलाकों में सिर्फ पैदल यात्रियों का राज होगा. साथ ही, साइकिल चालकों, बच्चों के खेलने के पार्क और कम्युनिटी सेंटर्स बढ़ाए जा रहे हैं. इससे शहर में NO-2 प्रदूषण का स्तर 25% तक कम हुआ है.

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इसके अलावा, शहर के पुराने और ऐतिहासिक 'गॉथिक क्वार्टर' की 14वीं सदी की तंग भूलभुलैया गलियों को अक्षुण्ण रखते हुए, शहर के नए वित्तीय डिस्ट्रिक्ट में 'टॉरे ग्लोरीज' जैसी आधुनिक, बुलेट के आकार की कांच की गगनचुंबी इमारतें खड़ी की गई हैं. यह ऐतिहासिक विरासत और हाई-टेक सस्टेनेबिलिटी का एक परफेक्ट कॉकटेल है.

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बार्सिलोना का आर्किटेक्चर हमें सिखाता है कि एक शहर को सिर्फ कंक्रीट के डिब्बे की तरह नहीं, बल्कि इंसानी खुशहाली, ताजी हवा और मानसिक शांति को केंद्र में रखकर डिजाइन किया जाना चाहिए. यही वजह है कि जब आप बार्सिलोना की सड़कों पर चलते हैं, या इसे आसमान से निहारते हैं, तो आपको यह अहसास होता है कि आर्किटेक्चर सिर्फ दीवारों को खड़ा करना नहीं है- यह पत्थरों में कविता लिखने की जीवित कला है.

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