कैप्टन स्मित के सिर पर चोट के निशान बताते हैं कॉकपिट के संघर्ष की कहानी

दुबई से इजरायल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में क्या हुआ था, इसका अंदाजा आप सिर्फ एक तस्वीर को देखकर लगा सकते हैं. ये तस्वीर है कैप्टन स्मित मछार के जख्मों की. बुधवार को जब UAE ने उन्हें सम्मानित किया तो उनके सिर में लगे टांके और घाव के निशान सिहरा देते हैं और फिर हर शख्स इस बहादुरी की दाद दिए बिना नहीं रह पाता है.

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कैप्टन स्मित मछार को UAE ने सम्मानित किया. (Photo: ITG) कैप्टन स्मित मछार को UAE ने सम्मानित किया. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:47 PM IST

अगर कोई आपसे पूछे कि असल जिंदगी में सुपरहीरो कैसे दिखते हैं तो उसे एक बार ये तस्वीर ज़रूर दिखाइएगा. बुधवार 28 अक्तूबर को जब UAE में कैप्टन स्मित मछार सम्मानित किया गया तो पूरी दुनिया की नज़र उनके सिर के पिछले हिस्से पर पड़े उन घावों और टांकों के निशानों पर थी, जो उस बहादुरी की कहानी बयां कर रहे थे. इन जख्मों के बारे में दुनिया अब तक सिर्फ सुन रही थी. ये घाव और टांकों के निशान बताते हैं कि कैप्टन स्मित मछार किस फौलाद के बने हैं, जिन्होंने इतना घातक चोट सहकर भी हिम्मत नहीं हारी. 

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जिस वक्त 34 हजार फीट की ऊंचाई पर आरोपी को-पायलट ने कैप्टन स्मित मछार पर FIRE AXE से हमला किया, उस वक्त उनके सिर की हड्डी टूटकर अंदर धंस चुकी थी. सिर से खून बह रहा था और आंखों के सामने अंधेरा छाया हुआ था. हालत ऐसी थी कि उनके लिए खड़ा रह पाना भी मुश्किल था. डॉक्टरों के मुताबिक ऐसी गंभीर चोट में शरीर लगभग काम करना बंद कर देता है और कई मामलों में लोग पैरालाइज भी हो जाते हैं. लेकिन कैप्टन स्मित मछार ने उस हालत में भी हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने हमलावर को धक्का दिया एग्जिट बटन दबाया और कॉकपिट खुल गया. 

कैप्टन स्मित मछार के सिर के पीछे दिखाई दे रहे टांकों के ये निशान सिर्फ एक हिंसक हमले के घाव नहीं हैं. ये उस लक्ष्मण रेखा की तरह हैं, जिसे पार करने की कोशिश उस हमलावर ने की, जो अपनी नफरत और हिंसा से 174 निर्दोष लोगों की जान खतरे में डाल चुका था. लेकिन सिर की हड्डी टूट जाने, आंखों के सामने अंधेरा छा जाने और खुद की जिंदगी खतरे में होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी. 

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उन्होंने ना सिर्फ खुद को संभाला बल्कि फ्लाइट में मौजूद लोगों की जान बचाने के संघर्ष में अपनी जिम्मेदारी निभाई. उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि असली हीरो किसी फिल्म के पर्दे पर नहीं बल्कि जिंदगी के सबसे मुश्किल इम्तिहान में दिखाई देते हैं. 

28 अक्तूबर को जब यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उन्हें गले लगाया और सम्मानित किया तो दुनिया ने एक ऐसी तस्वीर देखी, जिसमें एक तरफ सम्मान था और दूसरी तरफ उस संघर्ष के निशान. 

कैप्टन स्मित मछार के सिर पर मौजूद ये घाव आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाते रहेंगे कि जब संकट गहरा हो, जब उम्मीद टूटती हुई दिखाई दे और जब जिंदगी और मौत के बीच सिर्फ कुछ पल का फासला रह जाए, तब साहस, सूझबूझ और अपने कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा ही सबसे बड़ी ताकत बनते हैं. 

यूएई ने भारतीय कैप्टन स्मित मछार को जिस नागरिक सम्मान से नवाज़ा, उसका नाम है First Class Order of Zayed The Second. इससे पहले यूएई ने ये सम्मान भारतीय मूल के सिर्फ दो ही लोगों को दिया था. इनमें पहले थे नवदीप सिंह सूरी, जो साल 2016 से 2019 तक यूएई में भारत के राजदूत रहे. और दूसरे हैं संजय सुधीर, जो साल 2021 से 2025 तक यूएई में भारत के राजदूत रहे. 

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जहां दोनों पूर्व राजदूतों को यूएई ने ये सम्मान राजनयिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए दिया, वहीं कैप्टन स्मित मछार को ये सम्मान उनकी असाधारण वीरता और बहादुरी के लिए दिया गया. 
 

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