FIFA के बीच बांग्लादेश में हर तरफ 'कलमा' लिखे झंडे… भारत के लिए नई टेंशन?

बांग्लादेश में फीफा वर्ल्ड कप के दौरान ब्राजील और अर्जेंटीना के झंडों के बीच अचानक काले और सफेद रंग के कलमा लिखे झंडे दिखाई देने लगे हैं. ये झंडे तालिबान, अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और हिज्ब उत-तहरीर जैसे आतंकी संगठनों से जुड़े बताए जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर इन झंडों के साथ मोटरसाइकिल रैलियों के वीडियो वायरल हो रहे हैं.

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सोशल मीडिया पर 'कलमा' लिखे झंडे वायरल हैं. (Photo- X) सोशल मीडिया पर 'कलमा' लिखे झंडे वायरल हैं. (Photo- X)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:22 PM IST

बांग्लादेश में फीफा वर्ल्ड कप के बीच छतों और खंभों पर ब्राजील और अर्जेंटीना के झंडे लहरा रहे हैं. लेकिन इस फुटबॉल खुमारी के बीच, सड़कों और रिहायशी इलाकों में अचानक काले और सफेद रंग के 'कलमा' लिखे झंडे दिखाई देने लगे हैं. इन झंडों पर अरबी भाषा में 'ला इलाहा इल्लल्लाह' लिखा है.

सोशल मीडिया पर इन झंडों के साथ मोटरसाइकिल रैलियों के वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिसने पुलिस की नींद उड़ा दी है. इन झंडों के दिखने से बांग्लादेश और पड़ोसी देश भारत में चिंता बढ़ गई है. इसे बांग्लादेश में विदेशी चरमपंथी गुटों के बढ़ते पैर पसारने का संकेत बताया जा रहा है.

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ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, ये झंडे सबसे पहले 17 जून 2026 को ढाका के एक फ्लाईओवर पर देखे गए थे. इसके बाद मीरपुर, चटगांव, कॉक्स बाजार और फरीदपुर में भी ऐसे झंडे दिखे. 

Bangladesh 🇧🇩 is going backwards fast with these white TTA flags everywhere. Pushing extremism will only bring more poverty, violence and failure to your country. Stop copying Taliban style and focus on education and progress instead of destroying your future with blind… pic.twitter.com/hpUfA2u3zX

— True Patriot (@TruePatriot7868) June 29, 2026

दो तरह के 'कलमा' वाले झंडे वायरल

देखे गए झंडों में दो रंग हैं. एक सफेद बैकग्राउंड पर काले रंग से लिखा झंडा है, जो तालिबान का है. दूसरा काले बैकग्राउंड पर सफेद रंग से लिखा झंडा है, जिसका इस्तेमाल अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट और हिज्ब उत-तहरीर जैसे आतंकी संगठन करते हैं. हिज्ब उत-तहरीर पर 2009 में शेख हसीना सरकार ने प्रतिबंध लगाया था, लेकिन 2024 की अशांति के बाद इसने अपना दायरा तेजी से बढ़ाया है. पिछले साल इसने ढाका की मुख्य मस्जिद के सामने 'खिलाफत मार्च' निकाला था, जिसमें 2000 से ज्यादा लोग जुटे थे.

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'तौहीदी जनता' का बैनर 

इन रैलियों में शामिल कुछ लोग खुद को 'तौहीदी जनता' का हिस्सा बता रहे हैं. ये एक इस्लामी संगठन है. दिलचस्प बात ये है कि एक जुलूस में फिलिस्तीन का झंडा भी देखा गया. पिछले साल 'तौहीदी जनता' से जुड़े ग्रुप्स पर बांग्लादेश में सूफी संतों की दरगाहों और बाउल गायकों के जमावड़े पर हमले करने के आरोप लगे थे.

भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने भी हाल ही में चेतावनी दी थी कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में हमास की गतिविधियां बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की फिलिस्तीन के लिए हमदर्दी जगजाहिर है, लेकिन विदेशी जिहादी विमर्श को जगह देना चिंता की बात है.

यह भी पढ़ें: कुछ दिन पहले तक एंटी इंडिया नारे लगा रहे थे, अब वीजा के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगा रहे हैं बांग्लादेशी

फुटबॉल के खिलाफ 'धार्मिक' प्रचार

पिछले कुछ दिनों से ये झंडे फेसबुक और ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर भी बिक रहे हैं. दिनाजपुर में एक रैली के आयोजक मुफ्ती अबू बकर सिद्दीकी ने मीडिया से कहा, 'हम लोगों के दिलों में कलमा बसाना चाहते हैं. हम ये भी चाहते हैं कि लोग फुटबॉल वर्ल्ड कप के उन्माद से दूर रहें.'

वहीं, हिफाजत-ए-इस्लाम के नेता मुफ्ती हारुन इजहार का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो युवाओं से हर जगह कलमा के झंडे लगाने की अपील कर रहे हैं. वीडियो में उन्होंने कहा, 'अगर इन झंडों को उग्रवाद का प्रतीक माना जाता है, तो अर्जेंटीना और ब्राजील के झंडे भी उतारे जाने चाहिए.'

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पूर्व अंतरिम सरकार के सलाहकार एम. सखावत हुसैन ने कहा है कि सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत इस बात की जांच करनी चाहिए कि इस अभियान के पीछे कौन है और उनका मकसद क्या है.

क्या भारत को परेशान होना चाहिए?

बांग्लादेश की सीमा भारत से लगती है, इसलिए वहां की ये हलचल भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय है. हाल ही में बांग्लादेशी सांसद हसनात अब्दुल्ला को अल-कायदा के झंडे के साथ देखा गया. हसनात अब्दुल्ला अपने भारत-विरोधी बयानों के लिए जाने जाते हैं और 2024 के विद्रोह के मुख्य नेताओं में से एक रहे हैं. उन्होंने हाल ही में भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (सेवन सिस्टर्स) को भारत से अलग करने की धमकी भी दी थी.

भारत और बांग्लादेश के बीच 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा है, जहां से घुसपैठ की आशंका हमेशा बनी रहती है. पिछली मोहम्मद यूनुस सरकार के दौरान कट्टरपंथी संगठनों को खुली छूट मिल गई थी और कई कट्टरपंथी इस्लामवादियों को जेल से रिहा कर दिया गया थाय इसके बाद हिज्ब उत-तहरीर जैसे संगठनों ने युवाओं के बीच अपनी पैठ बढ़ानी शुरू कर दी. 

बांग्लादेश में बढ़ता ये कट्टरपंथ भारत की सीमा सुरक्षा, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में सांप्रदायिक सौहार्द के लिए सीधा खतरा बन सकता है.

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फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां इस स्थिति पर पैनी नजर रख रही हैं. बांग्लादेश के एक आतंकवाद-विरोधी अधिकारी ने 'bdnews24' को बताया, ऐसा लगता है कि एक समूह विदेशी चरमपंथी संगठनों के व्यवहार या संस्कृति को मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रहा है. ऐसा प्रतीत होता है कि वो कलमा के नाम पर आम धार्मिक लोगों का नैतिक समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.'

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