राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल गुरुवार को आधिकारिक दौरे पर वियतनाम पहुंचे. हनोई में वह वियतनाम के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे. इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बातचीत होगी. यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत और वियतनाम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर रहे हैं.
सूत्रों ने आजतक को बताया कि अजित डोभाल की इस यात्रा के एजेंडे में रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना प्रमुख रूप से शामिल है. इसमें दक्षिण चीन सागर में समुद्री सुरक्षा पर भी चर्चा हो सकती है. इसके अलावा आतंकवाद से मुकाबले, खुफिया जानकारी साझा करने, उभरती तकनीकों में सहयोग और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने जैसे मुद्दों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है.
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चीन के साथ तनाव के बीच भारत-वियतनाम की साझेदारी अहम
भारत और वियतनाम, दोनों के चीन के साथ सीमा को लेकर तनावपूर्ण संबंध रहे हैं. ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता रणनीतिक सहयोग अहम माना जा रहा है. भारत और वियतनाम के बीच साल 2016 से व्यापक रणनीतिक साझेदारी है.
भारत वियतनाम की रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है. इसमें ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति और वियतनामी सैन्यकर्मियों को प्रशिक्षण देना शामिल है. डोभाल के दौरे में रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में इस सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर रहने की उम्मीद है.
एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत भारत की कोशिश
अजित डोभाल का यह दौरा दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ भारत के लगातार बढ़ते संपर्क का हिस्सा है. इसे भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और स्वतंत्र, खुले तथा नियमों पर आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सोच से भी जोड़कर देखा जा रहा है. बातचीत में क्षेत्रीय घटना और आसियान की केंद्रीय भूमिका पर भी चर्चा होने की उम्मीद है.
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अजित डोभाल इससे पहले 2023 में वियतनाम गए थे. उस दौरे के दौरान दोनों देशों ने रक्षा साझेदारी को 2030 तक आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त विजन स्टेटमेंट पर हस्ताक्षर किए थे. इस बार की यात्रा में दोनों देश उस साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.
मंजीत नेगी