'कोर्ट परिसर में नमाज की इजाजत तो दुर्गा पूजा की क्यों नहीं?' कलकत्ता HC में याचिका दाखिल

कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें हाईकोर्ट की छत पर जुमे की नमाज की अनुमति पर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि जब नमाज की इजाजत दी जा सकती है, तो दुर्गा पूजा की अनुमति क्यों नहीं मिल सकती. अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए रजिस्ट्रार से 12 अक्टूबर तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है.

Advertisement
कलकत्ता हाईकोर्ट परिसर में नमाज और दुर्गा पूजा को लेकर विवाद.(File Photo- ITGD) कलकत्ता हाईकोर्ट परिसर में नमाज और दुर्गा पूजा को लेकर विवाद.(File Photo- ITGD)

इंद्रजीत कुंडू

  • कोलकाता,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:18 PM IST

कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है. इसमें सवाल उठाया गया है कि जब एक विशेष वर्ग के लोगों को हाईकोर्ट की छत पर जुमे की नमाज अदा करने की इजाजत दी जा सकती है, तो फिर वहां दुर्गा पूजा की क्यों नहीं?

इस मामले की सुनवाई बुधवार को मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और जस्टिस ओम नारायण राय की डिवीजन बेंच के सामने हुई. अदालत ने इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार से जवाब तलब किया है. कोर्ट ने रजिस्ट्रार से हाईकोर्ट की छत पर इस तरह की धार्मिक प्रार्थनाएं आयोजित करने की इजाजत पर जवाब मांगा है.

Advertisement

इसके साथ ही अदालत ने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वो खुद मौके पर जाकर ऑन-साइट निरीक्षण करें और 12 अक्टूबर तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करें.

'हाईकोर्ट की छत पर नमाज पढ़ने की छूट...'

ये जनहित याचिका संजय घोष ने दायर की है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि देश का संविधान पूरी तरह से धार्मिक तटस्थता का समर्थन करता है और हर धर्म के नागरिकों को अपनी आस्था का पालन करने का बराबर हक देता है. उनका दावा है कि कलकत्ता हाईकोर्ट परिसर में ये तटस्थता बरकरार नहीं रखी जा रही है, क्योंकि हर शुक्रवार को एक खास समुदाय के लोगों को हाईकोर्ट की छत पर नमाज पढ़ने की छूट दी जा रही है.

याचिकाकर्ता ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, 'कानून और संविधान साफ तौर से समानता की बात करता है. यही कारण है कि अगर एक धर्म के लोगों को हाईकोर्ट की छत पर इबादत करने की अनुमति है, तो दूसरे धर्म के लोग भी ये दावा कर सकते हैं कि उन्हें वहां दुर्गा पूजा या भारत माता की पूजा करने की अनुमति मिलनी चाहिए.'

Advertisement

यह भी पढ़ें: नंदीग्राम उपचुनाव: BJP की हसीरानी रथ की उम्मीदवारी नहीं होगी रद्द, कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला

उन्होंने आगे कहा कि अब ये पूरा मामला अदालत के विचाराधीन है और वो ये देखने के लिए इंतजार कर रहे हैं कि इस पर हाईकोर्ट आगे क्या दिशा-निर्देश या आदेश जारी करता है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »