यूपी के मऊ जिले से ऐसी खबर आई जिसने पुलिस को भी चौंका दिया. दरअसल, यहां एक हत्यारोपी ने उम्रकैद की सजा से बचने के लिए खुद को मृत घोषित करने की साजिश रच डाली. इसके लिए उसने श्मशान घाट में चिता पर लेटे हुए एआई के द्वारा अपनी फर्जी फोटो बनवाई. फिर अपनी जगह चिता पर बकरे को लिटाकर उसका दाह संस्कार करवा दिया. बात यहीं खत्म नहीं हुई, आरोपी ने अपना मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी करवा लिया. हालांकि, 18 महीने तक पुलिस को चकमा देने के बाद अब उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. आइए जानते हैं पूरी कहानी...
आपको बता दें कि मऊ पुलिस ने एक सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए एक ऐसे हत्या के आरोपी को गिरफ्तार किया है जिसने सजा से बचने के लिए अपनी मौत की झूठी कहानी रच डाली. पहले तो उसने श्मशान घाट में अपनी चिता तैयार कराई और फिर उस चिता पर लेटे हुए एआई के द्वारा अपनी फोटो तैयार कराई. उसके बाद उसी चिता पर अपनी जगह एक बकरे को लिटाकर उसका दाह संस्कार करवा डाला.
इतना ही नहीं श्मशान घाट से उसने अपना फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी करवा लिया. लगभग 18 महीने तक यह अपराधी पुलिस और कानून की आंखों में धूल झोंक कर फरार . लेकिन अंत में पुलिस के हाथ उसके गिरेबा तक पहुंच ही गए.
जानिए राजू उर्फ राजकुमार के बारे में
पकड़ा गया आरोपी राजू उर्फ राजकुमार और उसके दोस्त सुदर्शन के ऊपर 2016 में मऊ के ही योगेश सिंह नाम के युवक की हत्या का मुकदमा मऊ न्यायालय में चल रहा था. इस मुकदमे में गवाहों और साक्ष्यों के न्यायालय में पेश हो जाने के बाद राजू को यह लग गया था कि इस हत्याकांड में उसे आजीवन कारावास हो सकता है. अपने ऊपर चल रहे मुकदमे और न्यायालय के द्वारा सुनाए जाने वाले सजा से बचने के लिए राजू ने खुद ही अपनी मौत की झूठी साजिश रच डाली.
राजू ट्रेडिंग का काम करता है और उसने कई लोगों के पैसे इसमें इन्वेस्ट करवाए हैं. जब इन्वेस्टरों को इस बात की जानकारी हुई कि राजू को लंबी सजा हो सकती है तो उसमें से दो होम्योपैथिक के डॉक्टरों ने सजा से बचने के लिए राजू को अपनी झूठी मौत का षड्यंत्र रचने की सलाह दे डाली. उन्हीं की सलाह पर राजू ने खुद को मृत घोषित करने के लिए यह पूरी योजना बनाई थी.
पुलिस ने क्या बताया?
अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने बताया कि मऊ पुलिस ने राजू उर्फ राजकुमार नामक आरोपी को गिरफ्तार किया है. राजू पर वर्ष 2016 में योगेश सिंह की हत्या का मामला चल रहा था और आजीवन कारावास की सजा से बचने के लिए उसने अपनी मौत की झूठी साजिश रची.
ट्रेडिंग में पैसे लगाने वाले दो होम्योपैथिक डॉक्टरों की सलाह पर उसने यह षड्यंत्र रचा. योजना के तहत, उसे फर्जी तरीके से अस्पताल लाया गया, एआई और एडिटिंग से श्मशान घाट पर लेटे हुए फोटो तैयार किए गए और उसकी जगह एक बकरे का दाह संस्कार करवाकर गाजीपुर से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया गया. करीब 18 महीने तक पुलिस को चकमा देने के बाद आखिरकार सर्विलांस और कोतवाली टीम ने उसे दबोच लिया. पुलिस ने उसके खिलाफ धोखाधड़ी का नया मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है.
दुर्गा किंकर सिंह