दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान भोजन बांटने वाले जुनैद के गाजियाबाद स्थित नाहल गांव वाले घर पर पुलिस ने फंडिंग के सोर्सेज की जांच के सिलसिले में पूछताछ की. परिजनों के अनुसार, पहली रात पुलिस पिता को थाने ले गई और बाद में पहचान दस्तावेज तथा बैंक पासबुक साथ ले गई. वहीं जुनैद ने पुलिस उत्पीड़न, अवैध हिरासत और परिजनों को धमकाने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.
परिजनों का दावा और पुलिस की कार्रवाई
जुनैद के चचेरे दादा आफताब अली ने बताया कि पुलिस दो बार घर आई थी. पहली रात पिता मुस्तफा को थाने ले जाया गया, जिन्हें ग्रामीणों की बातचीत के बाद छोड़ दिया गया. अगली सुबह पुलिस बैंक पासबुक और दस्तावेज अपने साथ ले गई. इसके अलावा मेरठ में जुनैद की बहन के ससुराल पक्ष से भी पूछताछ की गई.
भोजन की फंडिंग पर परिवार की सफाई
पुलिस यह जानकारी जुटा रही है कि प्रदर्शनकारियों को भोजन कराने का पैसा कहां से आया. इस पर आफताब अली ने कहा कि जुनैद ने अपनी जेब से चार-पांच हजार रुपये खर्च किए थे, जबकि बाकी मदद दोस्तों और अन्य लोगों ने की. कई लोगों ने नकदी के बजाय सीधे खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई थी.
पुलिस का पक्ष और गिरफ्तारी का खंडन
गाजियाबाद पुलिस अधिकारियों ने गिरफ्तारी के दावों का खंडन किया है. डीसीपी ग्रामीण जोन सुरेंद्रनाथ तिवारी ने बताया कि जुनैद के पिता को केवल सामान्य पूछताछ के लिए मसूरी थाने बुलाया गया था और पूछताछ के बाद उन्हें घर भेज दिया गया था. जुनैद के पिता ने भी वीडियो जारी कर इस बात की पुष्टि की है.
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे जुनैद के गंभीर आरोप
जुनैद की सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका के मुताबिक, 24 जुलाई की आधी रात को दिल्ली पुलिस ने उन्हें 5-6 घंटे गाड़ी में बंधक बनाकर रखा और सुनसान जगह छोड़ दिया. याचिका में बिना कानूनी प्रक्रिया के परिजनों को हिरासत में लेने का आरोप लगाते हुए प्रताड़ना पर रोक और स्वतंत्र जांच की मांग की गई है.
मयंक गौड़ / संजय शर्मा