मथुरा के वृंदावन में रात के सन्नाटे में चाकुओं से हमला हुआ. निशाने पर थे एक साधु भेषधारी, जो पिछले करीब 6-7 साल से वृंदावन में रह रहे थे. हमलावरों ने उन्हें चाकुओं से गोद दिया. हमला इतना गंभीर था कि उनकी जान चली गई. उनके साथ रह रहा एक मजदूर भी चाकू लगने से घायल हो गया. वारदात के बाद मौके पर पुलिस पहुंची. इलाका छाना गया, शव कब्जे में लिया गया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. सवाल है कि आखिर साधु भेषधारी की हत्या क्यों की गई?
मृतक की पहचान बैतूर उर्फ राघव दास, उम्र करीब 45 साल के रूप में हुई है. वह बहादुरपुर के रहने वाले थे. करीब छह से सात साल पहले वृंदावन आए और यहीं रहकर साधु के भेष में जीवन बिता रहे थे. मंगलवार रात वह अटल्ला चुंगी के पास चामुंडा कट के नजदीक थे. इसी दौरान उन पर चाकुओं से हमला कर दिया गया. हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना की जानकारी पुलिस को मिली तो टीम मौके पर पहुंची. लेकिन तब तक राघव दास की मौत हो चुकी थी.
वारदात में राघव दास के साथ रहने वाला एक अन्य मजदूर भी चपेट में आ गया. उसे भी चाकू मारे गए और वह घायल हो गया. पुलिस ने उसे इलाज के लिए भेजा है. अब पुलिस उससे भी पूछताछ कर रही है, क्योंकि वह हमले के वक्त वहां मौजूद था. पुलिस के सामने अभी हत्या की वजह साफ नहीं है. कोई पुरानी रंजिश थी? पैसों का विवाद था? या किसी और वजह से हमला किया गया? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच में तलाशे जा रहे हैं.
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मृतक के भाई भानु प्रताप ने पुलिस को बताया कि उनके भाई का किसी व्यक्ति से विवाद हुआ था. भानु प्रताप को शक है कि इसी विवाद की वजह से हत्या की गई हो सकती है. हत्या की असली वजह पुलिस की जांच और सबूत सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी.
वृंदावन पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. घटनास्थल पर पहुंचकर पुलिस ने जांच की और आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई. अब पुलिस हमलावर की पहचान करने में जुटी है. फिलहाल एक साधु भेषधारी की हत्या ने वृंदावन में सनसनी फैला दी है. छह-सात साल से जिस शहर में राघव दास रह रहे थे, उसी शहर में उनकी जिंदगी का अंत चाकुओं के वार से हुआ.
मदन गोपाल शर्मा