'महाबली' ट्रक का ऐसा क्रेज: 5 रुपया भाड़ा लगाकर टोटो से देखने पहुंची महिला; जानें क्यों वाराणसी में थमे पहिये?

वाराणसी में 308 पहियों वाले ‘महाबली’ ट्रक को देखने का लोगों में ऐसा क्रेज देखने को मिल रहा है कि दूर-दूर से लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं. एक महिला भी महज 5 रुपये का टोटो भाड़ा देकर इस विशाल ट्रक को देखने पहुंची. बेल्जियम से विशाल रिएक्टर लेकर लखीमपुर खीरी जा रहे ट्रक के पहिए वाराणसी में कच्चे रास्ते में धंस गए हैं.

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308 पहिए वाले ट्रक का लोगों में इतना क्रेज है कि उसे देखने दूर दूर से आ रहे हैं (Photo@Social Media) 308 पहिए वाले ट्रक का लोगों में इतना क्रेज है कि उसे देखने दूर दूर से आ रहे हैं (Photo@Social Media)

aajtak.in

  • वाराणसी ,
  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST

वाराणसी में इन दिनों एक ऐसा ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जिसे देखकर हर कोई कुछ देर के लिए रुक जा रहा है. 308 पहियों वाला बाहुबली ट्रेलर बेल्जियम से आए एक विशाल रिएक्टर को लेकर लखीमपुर खीरी जा रहा है. करीब पांच महीने के लंबे सफर के बाद यह काफिला झारखंड, बिहार होते हुए  वाराणसी पहुंचा, लेकिन यहां पहुंचने के बाद इसकी रफ्तार थम गई. रास्ते में भारी वाहन के लिए जगह बनाने से लेकर ऊंचाई की बाधाओं को दूर करने तक लॉजिस्टिक टीम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

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308 पहियों वाला यह विशाल ट्रेलर मंगलवार शाम लंका टोल प्लाजा के पास पहुंचा था. इसके लिए डाफी टोल प्लाजा से आगे जाने के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार किया गया था. सुबह जैसे ही महाकाय ट्रेलर इस वैकल्पिक मार्ग से आगे बढ़ा, उसका पहिया कच्ची सड़क में धंस गया. इसके बाद ट्रेलर को सुरक्षित निकालने के लिए लॉजिस्टिक टीम ने मोर्चा संभाला. मौके पर दो ट्रेलर, हाइड्रा, क्रेन और अन्य भारी मशीनें लगाई गई हैं. ट्रेलर को पीछे की ओर खिसकाने और जमीन को मजबूत करने के लिए लोहे की मोटी चादरें बिछाई जा रही हैं. इसके बाद ट्रेलर को दोबारा आगे निकालने की तैयारी की जा रही है. मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, इतना बड़ा ट्रेलर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा. इसके चलते आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं. कई लोग ट्रेलर के साथ सेल्फी ले रहे हैं और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं.

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चंदौली में भी रिंग रोड के पास रुका था 308 पहियों वाला ट्रक

उत्तर प्रदेश में दाखिल होने के बाद इस विशाल ट्रेलर को सबसे पहले चंदौली में भी मुश्किल का सामना करना पड़ा. उड़ीसा से झारखंड और बिहार होते हुए यह काफिला पिछले शुक्रवार को चंदौली पहुंचा था. पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास नेशनल हाईवे-19 पर रिंग रोड के नजदीक पहुंचने के बाद आगे का रास्ता इसके लिए चुनौती बन गया. भारी और ऊंचे ट्रेलर को आगे निकालने के लिए लॉजिस्टिक टीम ने मौके पर रास्ता तैयार करने का काम शुरू किया. इसके लिए कई जगहों पर सड़क और मार्ग की स्थिति के हिसाब से बदलाव किए जा रहे हैं. लॉजिस्टिक कंपनी के प्रबंधक अनेक भारती ने बताया कि रिएक्टर बेल्जियम से समुद्री मार्ग के जरिए ओडिशा के पारादीप पोर्ट पहुंचा था. इसके बाद इसे सड़क मार्ग से लखीमपुर खीरी स्थित बलरामपुर चीनी मिल की कुंभी यूनिट तक ले जाया जा रहा है. उनके मुताबिक, पूरे रास्ते में ऊंचाई और चौड़ाई से जुड़े कई तरह के अवरोध सामने आ रहे हैं. संबंधित विभागों और अधिकारियों से अनुमति लेकर इन बाधाओं को हटाया जा रहा है. उनका अनुमान है कि रिएक्टर को लखीमपुर खीरी पहुंचने में अभी करीब दो से तीन सप्ताह का समय लग सकता है.

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छह फुटब्रिज हटाना सबसे बड़ी चुनौती

वाराणसी में इस महाकाय ट्रेलर के सामने सड़क पर मौजूद ऊंचाई संबंधी संरचनाएं बड़ी चुनौती बन गई हैं. जानकारी के मुताबिक, रास्ते में आने वाले करीब छह फुटब्रिज को हटाने या आवश्यकतानुसार उनकी व्यवस्था बदलने की जरूरत पड़ सकती है. 308 पहियों वाला यह ट्रेलर सामान्य मालवाहक वाहन जैसा नहीं है. इसकी ऊंचाई, चौड़ाई और लंबाई को देखते हुए रास्ते का पहले से सर्वे किया जाता है. बिजली के तार, पुल, फुटब्रिज, मोड़ और सड़क की क्षमता जैसी चीजों को ध्यान में रखते हुए ही इसे आगे बढ़ाया जा रहा है. लॉजिस्टिक टीम अपने साथ अतिरिक्त ट्रेलर, हाइड्रा, ट्रक और दूसरे उपकरण लेकर चल रही है. किसी स्थान पर वाहन फंसने या रास्ते में बाधा आने पर इन्हीं मशीनों की मदद से उसे निकालने और मार्ग को तैयार करने का काम किया जा रहा है.

बेल्जियम से आया है विशाल रिएक्टर

यह रिएक्टर अप्रैल में बेल्जियम से रवाना हुआ था. समुद्री मार्ग से इसे ओडिशा के पारादीप पोर्ट तक लाया गया. इसके बाद सड़क मार्ग से ओडिशा, झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचाया गया. इतने बड़े और भारी औद्योगिक उपकरण को सड़क के रास्ते एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाना अपने आप में जटिल लॉजिस्टिक ऑपरेशन है. इसके लिए विशेष मल्टी-एक्सल ट्रेलर का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस पूरे परिवहन पर 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आने की बात बताई गई है. यह रिएक्टर लखीमपुर खीरी की कुंभी चीनी मिल में प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजना का हिस्सा है. इस परियोजना में चीनी के दानों से पॉलीलैक्टिक एसिड यानी PLA तैयार किया जाना है. PLA को प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है और इसे बायोडिग्रेडेबल सामग्री के रूप में जाना जाता है.

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चीनी से बनेगा प्लास्टिक का विकल्प

इस पूरे सफर की सबसे खास वजह केवल 308 पहियों वाला ट्रेलर नहीं है. जिस रिएक्टर को लेकर यह भारी-भरकम काफिला चल रहा है, वह लखीमपुर खीरी की कुंभी चीनी मिल में लगने वाले PLA प्लांट के लिए है. परियोजना के तहत चीनी से पॉलीलैक्टिक एसिड यानी PLA बनाने की योजना है. PLA का इस्तेमाल पैकेजिंग, डिस्पोजेबल उत्पादों और दूसरी चीजों में प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर किया जा सकता है. इसे बायोडिग्रेडेबल सामग्री की श्रेणी में रखा जाता है. कुंभी चीनी मिल परिसर में इस परियोजना के लिए करीब 3000 करोड़ रुपये के निवेश से प्लांट तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है. परियोजना में विदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है और इसके तकनीकी सेटअप में विदेशी विशेषज्ञों की भूमिका बताई गई है.

एक महीने में इंस्टॉलेशन का लक्ष्य

रिएक्टर के लखीमपुर खीरी पहुंचने के बाद अगला बड़ा चरण इसकी स्थापना का होगा. अधिकारियों के अनुसार, रिएक्टर की इंस्टॉलेशन प्रक्रिया में करीब एक महीने का समय लग सकता है. पूरे प्रोजेक्ट की प्रगति पर निगरानी रखी जा रही है. उत्तर प्रदेश में इतने बड़े औद्योगिक उपकरण का सड़क मार्ग से परिवहन होने के कारण अलग-अलग विभागों के सामने भी समन्वय की चुनौती है.

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वायरल हुआ 308 पहियों वाला 'बाहुबली'

रिएक्टर से ज्यादा चर्चा इस समय उसे ले जा रहे 308 पहियों वाले ट्रेलर की हो रही है. उसे देखने पहुंची एक महिला से जब पूछा गया यहां कैसे आई हो तो बताया टोटो (ईरिक्शा) से पांच रुपया भाड़ा लगाकर आई है इस मशीन को देखने. चंदौली से वाराणसी तक जिस भी जगह यह काफिला रुका, आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई. स्थानीय लोग इस विशाल ट्रेलर को देखने के लिए पहुंच रहे हैं. कई लोगों ने इसके वीडियो बनाए और सोशल मीडिया पर शेयर किए. यही वजह है कि 308 पहियों वाला यह 'बाहुबली' ट्रक अब इंटरनेट पर भी चर्चा का विषय बन गया है. मौके पर पहुंचे मरीन इंजीनियर संजय यादव ने बताया कि उन्होंने 308 पहियों वाले इस ट्रक के बारे में सुना था, इसलिए इसे देखने पहुंचे. उनका कहना था कि समुद्री क्षेत्र में इससे बड़े उपकरण देखने को मिलते हैं, लेकिन किसी बड़े औद्योगिक उपकरण को इस तरह सड़क के रास्ते जाते देखना अलग अनुभव है. फिलहाल वाराणसी में कच्चे रास्ते में ट्रेलर के फंसने के बाद उसे निकालने का काम जारी है. रास्ता तैयार होने और जरूरी बाधाएं दूर होने के बाद ही यह काफिला लखीमपुर खीरी की ओर आगे बढ़ सकेगा. माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों तक इस महाकाय ट्रेलर की आवाजाही वाराणसी और आसपास के लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनी रहेगी.

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