बिजली गुल, घरों पर ताले और इलाज के लिए नाव का इंतजार… उन्नाव में गंगा के कहर ने कैद की जिंदगी

उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और गंगा के बढ़ते जलस्तर से उन्नाव का शुक्लागंज इलाका भीषण बाढ़ की चपेट में है. गोताखोर और चंपापुरवा मोहल्लों में सड़कें डूबने से लोग घरों में कैद हो गए हैं. बिजली गुल है और रोजमर्रा की जरूरतों व इलाज के लिए नाव ही सहारा है.

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उन्नाव में बाढ़ का कहर. (Photo: ITG) उन्नाव में बाढ़ का कहर. (Photo: ITG)

सिमर चावला

  • उन्नाव,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:02 AM IST

उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और पहाड़ों से छोड़े जा रहे पानी के चलते गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. कई जिलों में गंगा खतरे के निशान के करीब पहुंच चुकी है और निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं.

उन्नाव के शुक्लागंज इलाके में गंगा का पानी अब रिहायशी इलाकों में घुस चुका है. गोताखोर और चंपापुरवा मोहल्ले में हालात ऐसे हैं कि सड़कें पानी में डूब गई हैं और लोगों की जिंदगी अब नावों के सहारे चल रही है.

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सड़कें बनीं नदी, घर बने टापू

आज तक की टीम जब उन्नाव के शुक्लागंज के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंची तो वहां का मंजर परेशान करने वाला था. जिन रास्तों पर कभी बाइक और गाड़ियां चलती थीं, वहां अब नावें चल रही हैं. महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग अपने घरों से बाहर आने-जाने के लिए नाव का इंतजार करते नजर आए.


टीम ने नाव के जरिए इलाके का जायजा लिया तो सामने आया कि कई घर पानी से घिरे हुए हैं. कुछ परिवार मजबूरी में अपने घरों पर ताला लगाकर दूसरी जगह चले गए हैं, जबकि कई लोग अभी भी इसी उम्मीद में घरों में रुके हुए हैं कि जल्द हालात सामान्य होंगे.


चोट लगी, लेकिन इलाज के लिए भी नाव का इंतजार

नाव से आगे बढ़ते हुए एक घर के बाहर एक व्यक्ति बैठा दिखाई दिया. उसके पैर में चोट लगी थी और पट्टी बंधी हुई थी. उसने बताया कि चोट के बाद डॉक्टर के पास जाना जरूरी है, लेकिन बाढ़ के कारण रास्ते बंद हो गए हैं. अब इलाज के लिए भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है.

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उसने बताया कि सड़क तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं बचा है. नाव मिलेगी तभी बाहर जा पाएंगे. चोट की वजह से पानी में पैर रखना भी मुश्किल है.

बिना बिजली के गर्मी में गुजर रही जिंदगी

इसी दौरान उसकी मां ने बताया कि बाढ़ के बाद बिजली आपूर्ति बंद है. कई दिन से बिजली नहीं आ रही है, रात में अंधेरे के बीच मोमबत्ती जलाकर गुजारा करना पड़ रहा है. गर्मी और उमस में बिना पंखे के रहना बेहद मुश्किल हो गया है.

उन्होंने बताया कि दवाइयों और जरूरी सामान के लिए भी नाव पर निर्भर रहना पड़ता है. जब नाव उपलब्ध होती है, तभी घर से बाहर निकलना संभव हो पाता है.

बुजुर्गों और मरीजों की बढ़ी परेशानी

इलाके में आगे बढ़ने पर एक बुजुर्ग महिला अपने घर के बाहर बैठी मिलीं. उन्होंने बताया कि बिजली नहीं होने से इस गर्मी में हाथ से पंखा करके समय काटना पड़ रहा है. उम्र और बीमारी के कारण सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है. उन्होंने कहा कि दवाइयां लेने के लिए भी नाव से जाना पड़ता है, अगर समय पर नाव नहीं मिली तो जरूरी काम रुक जाते हैं.


दिनभर 300 से ज्यादा चक्कर लगा रहे नाविक

बाढ़ के बीच नाविक लोगों के लिए जीवनरेखा बने हुए हैं. एक नाविक ने बताया कि वह दिनभर में 300 से ज्यादा चक्कर लगा रहा है. लोगों को घरों से बाहर निकालने, जरूरी सामान पहुंचाने और इलाज के लिए आने-जाने में मदद करनी पड़ रही है. उसका कहना था कि हालात गंभीर हैं और सरकार को स्थायी समाधान की दिशा में काम करना चाहिए.

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गंदे पानी और जहरीले जीवों का खतरा

स्थानीय लोगों ने बताया कि बाढ़ का पानी अब गंदा हो चुका है. इसमें कीड़े-मकोड़े और सांप निकलने का खतरा बना हुआ है. लोगों को बीमारी फैलने की चिंता सता रही है.

लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले भी प्रशासन से मांग की थी कि इलाके में बांध या स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जाए, जिससे हर साल आने वाली बाढ़ से राहत मिल सके. प्रशासन ने नावों की व्यवस्था तो की है, लेकिन बाकी सुविधाओं की कमी अब भी बनी हुई है.

पानी के बीच बिजली के तार बने खतरा

आज तक की टीम ने जब नाव के जरिए पूरे इलाके का जायजा लिया तो एक और बड़ा खतरा सामने आया. कई जगह बिजली के खंभे और तार पानी के बीच दिखाई दिए. कुछ स्थानों पर पानी का स्तर बिजली के तारों के बेहद करीब पहुंच चुका है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.


नावों पर टिकी जिंदगी

उन्नाव के शुक्लागंज के गोताखोर और चंपापुरवा इलाके में फिलहाल जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है. घर पानी से घिरे हैं, रास्ते डूब चुके हैं और बिजली बंद है. लोगों के लिए नाव ही अब आने-जाने, इलाज और जरूरतों को पूरा करने का एकमात्र सहारा बन गई है.

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