यूपी ATS का बड़ा एक्शन, पाकिस्तानी आतंकी नेटवर्क से जुड़े 4 संदिग्ध गिरफ्तार, लखनऊ में टारगेट किलिंग की थी साजिश

यूपी ATS ने पाकिस्तान से संचालित शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े चार संदिग्धों को लखनऊ से गिरफ्तार किया है. इनमें एक नाबालिग भी शामिल है. उन्हें लखनऊ में किसी सेना या पुलिसकर्मी की हत्या कर उसका वीडियो बनाने का टास्क दिया गया था. आरोपियों के पास से पिस्टल और 20 कारतूस मिले हैं. उनके मोबाइल में संवेदनशील ठिकानों की रेकी के वीडियो और लोकेशन भी मिली हैं.

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एटीएस को आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं. (Photo- Representational) एटीएस को आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं. (Photo- Representational)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 30 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:52 PM IST

उत्तर प्रदेश एटीएस ने पाकिस्तान से संचालित आतंकी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. इनमें एक नाबालिग भी शामिल है. एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए चारों युवक पंजाब के रहने वाले हैं और प्रतिबंधित संगठन शहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN) से जुड़े हुए हैं. एटीएस ने इन्हें लखनऊ से गिरफ्तार किया है. इनके पास से एक पिस्टल और 20 कारतूस बरामद किए गए हैं.

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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गगनदीप सिंह (26), निवासी मेहता पिंड, अमृतसर, रजत कुमार (19), निवासी हिमतपुर, अमृतसर और क्रिश (21), निवासी डेरा बाबा, गुरदासपुर के रूप में हुई है. इनके साथ एक बाल अपचारी को भी पकड़ा गया है.

एटीएस की पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी पाकिस्तान में बैठे राणा भाई नाम के हैंडलर के संपर्क में थे. हैंडलर ने उन्हें लखनऊ जाकर किसी सेना या पुलिसकर्मी की हत्या करने का टास्क दिया था. आरोपियों को इस वारदात का वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजना था.

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को हथियार पाकिस्तान से भेजे गए थे. टारगेट किलिंग को अंजाम देने के बाद उन्हें नेपाल भागने का निर्देश दिया गया था. वारदात पूरी करने पर तीन लाख रुपये देने का वादा किया गया था.

खर्चा भेजकर कराया लखनऊ का सफर

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एटीएस के मुताबिक, आरोपी 27 अक्टूबर को अमृतसर से दिल्ली होते हुए 29 अक्टूबर की रात करीब 12 बजे लखनऊ पहुंचे थे. पाकिस्तान में बैठे हैंडलर ने उनके लखनऊ आने के किराये के लिए 2,585 रुपये भेजे थे. लखनऊ पहुंचने के बाद आरोपियों ने रेलवे स्टेशन का वीडियो बनाकर पाकिस्तानी हैंडलर को भेजा था. हैंडलर ने इसके बाद दो दिनों में दो बार 2,500-2,500 रुपये खर्च के लिए भेजे थे.

जांच में सामने आया है कि लखनऊ में एक स्थानीय व्यक्ति ने आरोपियों को हथियार और कारतूस उपलब्ध कराए थे. इसी व्यक्ति ने उन्हें ठहरने के लिए पनाह भी दी थी. एटीएस अब इस स्थानीय मददगार और नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की तलाश कर रही है.

एटीएस को आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं. उनके फोन में वर्चुअल नंबर से एक्टिव व्हाट्सएप अकाउंट, विदेशी नंबरों पर चैट और संदिग्ध बातचीत मिली है. इसके अलावा संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी से जुड़े वीडियो और लोकेशन भी बरामद हुए हैं, जिन्हें पाकिस्तानी हैंडलर को भेजा गया था.

एटीएस अब आरोपियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन और फंडिंग के नेटवर्क की जांच कर रही है.

UAPA समेत कई धाराओं में केस दर्ज

इस मामले में एटीएस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 और 61(2), आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धारा 18 और 38 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.

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एटीएस आरोपियों को कोर्ट में पेश कर पुलिस कस्टडी रिमांड हासिल करेगी. रिमांड के दौरान उनके अन्य साथियों, स्थानीय मददगारों और पूरे नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जाएगी. एटीएस के मुताबिक, आरोपी भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने और देश में आतंक फैलाने की साजिश में शामिल थे.

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