देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर बहस के बीच दारुल उलूम के प्रवक्ता मौलाना सुफियान निजामी का बयान सामने आया है. उन्होंने UCC का विरोध करते हुए कहा कि इसे देश में लागू करना असंभव है. उनका कहना है कि भारत में अलग-अलग समुदायों के अपने पर्सनल कानून हैं, इसलिए UCC की जरूरत नहीं है.
मौलाना सुफियान निजामी के मुताबिक, सरकार को UCC लागू करने पर ध्यान देने के बजाय मुसलमानों के विकास के लिए काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश में लोगों के अपने-अपने पर्सनल कानून हैं और इन्हीं के तहत कई मामले चलते हैं. UCC ऐसा कानून है, जिसमें शादी, तलाक, विरासत जैसे निजी मामलों के लिए सभी नागरिकों पर एक जैसे नियम लागू हों. इसी मुद्दे पर मौलाना सुफियान ने अपनी आपत्ति जताई है.
'देश में UCC की जरूरत नहीं'
मौलाना सुफियान ने कहा कि देश में UCC लागू करना संभव नहीं है. उनका तर्क है कि यहां अलग-अलग समुदायों के अपने पर्सनल कानून हैं. ऐसे में सभी पर एक ही कानून लागू करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने सरकार से मुसलमानों के विकास पर ध्यान देने की बात कही. उनके मुताबिक, शिक्षा, रोजगार समेत दूसरे क्षेत्रों में समुदाय की तरक्की के लिए काम किया जाना चाहिए.
पर्सनल कानूनों को लेकर क्या कहा?
मौलाना सुफियान का कहना है कि भारत में अलग-अलग समुदाय अपने पर्सनल कानूनों के मुताबिक कई निजी मामलों को देखते हैं. इसी वजह से UCC को लेकर उनकी आपत्ति है. उनका बयान ऐसे समय आया है जब देश में UCC को लेकर लगातार चर्चा होती रही है. UCC के समर्थक सभी नागरिकों के लिए समान नियम की बात करते हैं, जबकि विरोध करने वाले इसे अपने पर्सनल कानूनों में दखल के तौर पर देखते हैं.
CAA पर भी दिया बयान
मौलाना सुफियान निजामी ने CAA को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि इसका हर स्तर पर संविधान के तहत पालन होना चाहिए. साथ ही CAA की तकनीकी बातों को भी देखना होगा. अगर इसमें कोई ऐसा बिंदु है जिस पर आपत्ति होती है, तो कमेटी उसे सामने जरूर रखेगी. यानी CAA को लेकर उनका जोर संविधान के तहत इसके पालन पर है.
फिलहाल UCC को लेकर मौलाना सुफियान का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने साफ तौर पर इसके लागू होने का विरोध किया है. उनका कहना है कि सरकार को UCC की जगह मुसलमानों के विकास से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए.
आशीष श्रीवास्तव