उत्तर प्रदेश की गवर्नर आनंदीबेन पटेल के लंबा कार्यकाल पर अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने प्रदेश में संवैधानिक पदों और प्रमुख संस्थानों में नियुक्तियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने राज्यपाल के कार्यकाल और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) की कुलपति की पुनर्नियुक्ति को लेकर सरकार से जवाब मांगा है.
स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया अकाउंट X पर पोस्ट करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में राज्यपाल का कार्यकाल सामान्य तौर पर पांच वर्ष का होता है, लेकिन पांच वर्ष पूरे होने के बाद भी सात वर्ष तक पद पर बने रहना गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े करता है. उन्होंने कहा कि यदि कार्यकाल बढ़ाने या पुनर्नियुक्ति से जुड़ा कोई स्पष्ट आदेश नहीं है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने पोस्ट में कहा कि संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों और कार्यकाल को लेकर पारदर्शिता जरूरी है. उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी पद पर निर्धारित अवधि से अधिक समय तक कोई व्यक्ति बना रहता है तो उसके पीछे संवैधानिक प्रक्रिया और नियमों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए.
KGMU की वीसी पर स्वामी प्रसाद ने उठाए सवाल
स्वामी प्रसाद कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए नियमों का पालन होना जरूरी है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि KGMU की कुलपति पर भ्रष्टाचार और आरक्षण नियमों की अनदेखी के आरोप लगने के बावजूद दोबारा से उनकी नियुक्ति भी सवालों के घेरे में है. जब नियुक्तियों में नियम और संविधान का पालन नहीं होगा, तो SC/ST/OBC समाज को बराबरी का प्रतिनिधित्व और न्याय कैसे मिलेगा?
राज्यपाल आनंदीबेन के कार्यकाल पर सवाल
उन्होंने कहा कि राज्यपाल का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और पांच साल बाद भी पद पर बने रहने को लेकर स्पष्ट संवैधानिक स्थिति सामने आनी चाहिए. मौर्य ने कार्यकाल बढ़ाने या पुनर्नियुक्ति से जुड़े आदेश की जानकारी सार्वजनिक करने और निष्पक्ष जांच की मांग की.
राष्ट्रपति ने आनंदीबेन पटेल को 29 जुलाई 2019 को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल नियुक्त किया था. इस पद पर रहते हुए उन्हें सात साल से ज्यादा हो गया है. उत्तर प्रदेश से पहले 2018 में उन्हें मध्य प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया था. उनका कार्यकाल 28 जुलाई 2019 तक था. उन्होंने कुछ समय तक छत्तीसगढ़ की कार्यवाहक राज्यपाल के रूप में भी काम किया था, लेकिन बाद में यूपी का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया था.
संविधान के मुताबिक राज्यपाल यानी गवर्नर का कार्यकाल 5 साल का होता है. हालांकि, संविधान के जानकार बताते हैं कि पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद नए राज्यपाल की नियुक्ति ना होने पर, यह कार्यकाल चलता रहता है. अब स्वामी प्रसाद मौर्य ने राज्यपाल के पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी बने रहने को लेकर सवाल उठाए हैं.
यूपी में सबसे ज्यादा लंबे समय से गवर्नर
उत्तर प्रदेश में 1950 से नियुक्त सभी गवर्नरों में आनंदीबेन पटेल का कार्यकाल सबसे लंबा है. उनसे पहले के कुछ ही राज्यपाल ऐसे हैं जो पांच साल का कार्यकाल पूरा कर सके. विश्वनाथ दास 1962-67, बी गोपाला रेड्डी 1967-72 है.
बीडी जत्ती 1980-1985 और मोहम्मद उस्मान आरिफ़ 1985-1990, कुछ ऐसे राज्यपाल हैं जिनका कार्यकाल लगभग पांच साल का रहा. इनके बाद टीवी राजेश्वर, बीएल जोशी और 2014 में केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद राम नाइक ने तकरीबन पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है.
आनंदीबेन पटेल का सियासी संबंध?
टेल का कार्यकाल इतना लंबा क्यों दिया गया है. क्या इसका कोई राजनीतिक संबंध है.आनंदीबेन पटेल सियासत में आने से पहले शिक्षक थीं. उनका जन्म गुजरात के मेहसाणा में 1941 में हुआ था.1987 में आनंदीबेन पटेल ने राजनीति में कदम रखा.गुजरात के उस वक्त के बीजेपी के कद्दावर नेता केशुभाई पटेल ने आनंदीबेन को राजनीति में लाने की कवायद शुरू कर दी.
आनंदीबेन पटेल गुजरात में पहली बार 1998 में विधायक बनी थीं. इससे पहले 1994 में राज्यसभा की सदस्य निर्वाचित हुईं. वे गुजरात बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं. इसके बाद आनंदीबेन पटेल के राजनीति में बड़े नेता के रूप में स्थापित होने का असली श्रेय नरेंद्र मोदी को जाता है.
2014 में नरेंद्र मोदी के भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद आनंदीबेन पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया था. वह अगस्त 2016 तक इस पद पर रहीं, लेकिन 2017 में उन्होंने गुजरात विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा. इसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त कर दिया था और उसके बाद यूपी की गवर्नर बनीं.
2024 में पांच साल का कार्यकाल पूरा
आनंदीबेन पटेल 2019 में यूपी की राज्यपाल बनी, जिसके लिहाज से जुलाई 2024 में पांच साल का कार्यकाल पूरा हो गया था, लेकिन उन्हें यूपी में गवर्नर बनाए रखा गया. साल 2025 में उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के कार्यकाल को लेकर सवाल उठाया था.
कांग्रेस के मीडिया सेल के चेयरमैन सीपी राय ने कहा था कि राज्यपाल का कार्यकाल पांच साल का होता है. इससे अधिक अगर राज्यपाल का कार्यकाल दोबारा बढ़ाया गया हो तो इसकी स्पष्टता होनी चाहिए.राज्यपाल के तौर पर लंबे कार्यकाल के सवाल पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने उठाया
समर्थ श्रीवास्तव