प्रिया, रुचि, कृष्णा... सपा की 3 महिला सांसदों की अपने ही विधायकों से चल रही अदावत!

मुरादाबाद की सपा सांसद रुचि वीरा और विधायक कमाल अख्तर की सियासी अदावत किसी से छिपी नहीं है. सपा में एकलौती वर्चस्व की जंग नहीं है बल्कि सपी की महिला सांसद प्रिया सरोज से लेकर कृष्णा देवी पटेल की अपने ही क्षेत्र में अपनी ही पार्टी के विधायक के साथ रार चल रही है.

Advertisement
सपा की तीन महिला सांसदों की अपने विधायक से रार (Photo-ITG) सपा की तीन महिला सांसदों की अपने विधायक से रार (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:50 PM IST

उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी एक दशक से सत्ता का वनवास झेल रही है. अखिलेश यादव सूबे की सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है, लेकिन पार्टी में अंदरूनी कलह और गुटबाजी कहीं उनकी उम्मीदों पर पानी न फेर दे. विधानसभा चुनावों से पहले जिस तरह सपा में सियासी रार छिड़ी हुई है, उसके चलते ही अखिलेश यादव ने कमाल अख्तर को विधानसभा के मुख्य सचेतक पद से हटाना पड़ा है.

Advertisement

मुरादाबाद की लोकसभा सांसद रुचि वीरा और कमाल अख्तर के बीच छिड़ी सियासी अदावत के चलते ही अखिलेश यादव को एक्शन लेना पड़ा है. सपा के सांसद और विधायक के बीच पहला मामला नहीं बल्कि यूपी में तीन सपा के महिला सांसदों की अपने ही इलाके में अपनी ही पार्टी के विधायक के साथ छत्तीस के आंकड़े हैं. 

यूपी में चुनावी सरगर्मी के बीच अखिलेश यादव एक तरफ जहां सपा 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के दम पर सत्ता में वापसी की रणनीति बना रही है, लेकिन  जमीनी स्तर पर सपा सांसद और विधायकों की आपसी महत्वाकांक्षाएं और गुटबाजी पार्टी के बने-बनाए खेल को बिगाड़ सकती हैं. 

प्रिया सरोज और रागिनी सोनकर में शह-मात
जौनपुर की मछलीशहर सीट पर सपा की दो युवा और तेजतर्रार महिला नेताओं के बीच सियासी रार छिड़ी हुई है. मछली शहर की सपा सांसद प्रिया सरोज और स्थानीय विधायक डॉ. रागिनी सोनकर के बीच सियासी अदावत किसी से छिपी नहीं है. ये दोनों महिला नेता सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की करीबी मानी जाती हैं, लेकिन एक ही क्षेत्र से होने के चलते दोनों के बीच वर्चस्व की जंग को हवा दे दी है. 

Advertisement

प्रिया सरोज सपा के दिग्गज नेता तुफानी सरोज की बेटी हैं और 2024 में मछली शहर सीट से सांसद चुनी गई है. रागिनी सोनकर 2022 में मछलीशहर सीट से विधायक चुनी गई और 2024 में वो चुनाव लड़ना चाहती थी, लेकिन पार्टी ने प्रिया सरोज को टिकट दे दिया था. इसके बाद से ही दोनों के रिश्ते जगजाहिर हैं और एक दूसरे पर निशाना साधने का मौका नहीं गंवाती हैं. इतना ही नहीं एक दूसरे के साथ न मंच शेयर करती हैं और न ही अपने-अपने कार्यक्रम में एक दूसरे को बुलाती हैं. 

रागिनि सोनकर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर मौका मिला या पार्टी ने चाहा, तो वह भविष्य में मछलीशहर सीट से ही लोकसभा चुनाव लड़ना पसंद करेंगी. इस पर प्रिया सरोज ने पलटवार करते हुए कहा है कि मछलीशहर उनकी जन्मभूमि और कर्मभूमि है और वह इसे किसी के लिए नहीं छोड़ेंगी. 

यह लड़ाई सिर्फ लोकसभा चुनाव तक सीमित नहीं है,बल्कि इसके पीछे 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात है.माना जा रहा है कि प्रिया सरोज के पिता तूफानी सरोज चाहते हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव में मछलीशहर सदर सीट से उनके बेटे धनंजय सरोज चुनाव लड़ें. रागिनी सोनकर इस बात को बाखूबी समझ रही हैं, जिसके चलते ही लोकसभा की दावेदारी ठोककर अपना राजनीतिक आधार मजबूत कर रही हैं. 

Advertisement

रुचि वीरा और कमाल अख्तर की अदावत
मुरादाबाद की मौजूदा सपा सांसद रुचि वीरा और जिले की कांठ विधानसभा सीट से विधायक कमल अख्तर के बीच 2024 से ही सियासी अदावत छिड़ी हुई है. रुचि वीरा को सपा नेता आजम खान का करीबी माना जाता है. आजम खान और कमाल अख्तर की सियासी अदावत किसी से छिपी नहीं है. इसके चलते रुचि वीरा और कमाल अख्तर की भी नहीं पटती है. कमाल अख्तर न ही अपने कार्यक्रम में रुचि वीरा को बुलाते हैं और न ही रुचि वीरा अपने कार्यक्रम में कमाल अख्तर को बुलाती हैं. 

25 जून को मुरादाबाद में कमाल अख्तर ने पीडीए चौपाल का कार्यक्रम रखा था, जिसमें रुचि वीरा को नहीं बुलाया गया. यही नहीं कार्यक्रम में लगे बैनर में रुचि वीरा तस्वीर भी नहीं थी, जिसको लेकर रुचि वीरा ने सियासी मुद्दा बना दिया. यह बात अखिलेश यादव तक पहुंची तो उन्होंने दोनों ही नेताओं को लखनऊ बुलाया. अखिलेश की मौजूदगी में दोनों ही नेताओं के बीच कहासुनी शुरू हो गई और एक दूसरे पर गुटबाजी का आरोप लगाया. 

आजम खान की करीबी होने के चलते अखिलेश यादव ने रुचि वीरा के साथ देते हुए कमाल अख्तर को विधानसभा में सपा के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा देने के लिए कह दिया. कमल अख्तर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन रुचि वीरा के साथ उनकी सियासी अदावत अभी भी जारी है. इसके पीछे मुरादाबाद की सियासत पर अपना-अपना अधिपत्य जमाने की है, जिसके चलते पार्टी दो गुटों में बंट गई है. 

Advertisement

बुंदेलखंड में सपा सांसद और विधायक में कलह
बुंदेलखंड में बीते लोकसभा चुनाव के दौरान अच्छा प्रदर्शन कर तीन सीटें जीतने वाली सपा 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही अंदरूनी कलह में उलझती दिख रही है. गुटबाजी की चलते ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 12 मई को बांदा की जिला कार्यकारिणी को भंग दिया. अब बांदा-चित्रकूट की सपा सांसद कृष्णा पटेल और बबेरू से सपा के विधायक विशंभर सिंह यादव के बीच पिछले हफ्ते जमकर कहासुनी एक कार्यक्रम में हुई. 

सांसद कृष्णा देवी पटेल और विधाक विशंबर सिंह यादव के बीच  'तू-तू मैं-मैं' का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ. वायरल वीडियो में सांसद कृष्णा पटेल विधायक पर असहयोग और बेइज्जती करने का आरोप लगाती दिख रही है. इसके जवाब में विधायक विशंभर सिंह यादव उन्हें तमीज में रहने की नसीहत देते नजर आ. सांसद कृष्णा पटेल ने मंच से ही यह भी कहा कि इस मामले की शिकायत वह पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से कर चुकी हैं. 

कृष्णा पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिलाध्यक्ष डॉ. मधुसूदन कुशवाहा, राष्ट्रीय महासचिव पूर्व सांसद विशंभर प्रसाद निषाद समेत पार्टी के तमाम छोटे-बड़े नेता शामिल हुए. सांसद के पति ने पार्टी के ही लोगों पर उन्हें बदनाम करने व अवैध खनन में संलिप्त होने के मिथ्या आरोप लगाने की बात कही थी. तब से सांसद-विधायक के बीच जंग जारी है. चित्रकूट में जिलाध्यक्ष शिवशंकर सिंह पटेल और सदर विधायक अनिल प्रधान के बीच अंदरखाने मनमुटाव है. पूर्व जिलाध्यक्ष अनुज पटेल का गुट भी अलग है. इसके चलते सियासी वर्चस्व की जंग चल रही है. 
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »