छात्र आंदोलन के बीच अयोध्या के कील-कांटे दुरुस्त करने में जुटा RSS, संघ ने माना राम मंदिर ट्रस्ट की एक गलती और संवादहीनता ने खराब किए हालात!

छात्र आंदोलनों के कारण राम मंदिर चंदा चोरी विवाद से ध्यान हटने के बाद, संघ (RSS) अयोध्या में अपनी कमियों को सुधारने में जुट गया है. संघ ने माना कि ट्रस्ट की संवादहीनता और पारदर्शिता की कमी से विवाद बढ़ा. अब नाराजगी दूर करने के लिए संघ अयोध्या के संतों और मीडिया से लगातार संवाद कर स्थितियां संभाल रहा है.

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में संघ परिवार एक्टिव (Photo- ITG) राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में संघ परिवार एक्टिव (Photo- ITG)

कुमार अभिषेक

  • अयोध्या ,
  • 28 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:32 AM IST

राम मंदिर में चढ़ावा चंदा चोरी ने संघ परिवार को भी मंथन पर मजबूर कर दिया है कि गलती कहां हुई. अब RSS के भीतर इस बात पर मंथन हर स्तर पर चल रहा है कि आखिर जिस आंदोलन ने पूरे भारत में भाजपा को सत्ता दे दी, जिस आंदोलन ने देश को राम मंदिर दे दिया, उस राम मंदिर में संघ परिवार से कहां चूक हो गई जिससे व्यक्ति से लेकर संगठन तक इतनी बदनामी हो गई.

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राम मंदिर में हुई किरकिरी के बाद अब संघ हर स्तर पर संवाद में जुटा है. लखनऊ में संघ के पदाधिकारियों ने अनौपचारिक बातचीत में एक बात मान ली है कि ट्रस्ट की तरफ से संवाद हीनता और पारदर्शिता की कमी इस हालत की सबसे बड़ी वजह है.

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संघ ने यह भी माना कि जब ट्रस्ट ने खुद से चंदा चोरी पकड़ ली तो स्वयं पुलिस बनने की बजाय उसे FIR करनी चाहिए थी, जिससे समाज में खराब संदेश नहीं जाता और बात चोरी तक रह जाती और ट्रस्ट की भी इतनी भद नहीं पिटती.

आरएसएस अब मंदिर, ट्रस्ट और और हिंदु समाज के भीतर चढ़ावा चोरी को लेकर फैली आशंकाओं-चिंताओं को ठीक करने में जुटा है और इसके लिए हर स्तर पर संवाद चल रहा है. संघ ने सबसे पहले साधु संतों के बीच फैले संवाद हीनता, आशंकाओं और गुस्से को खत्म करने की पहल की. खासकर अयोध्या के साधु-संत जो ट्रस्ट से बेहद नाराज थे, चंपत राय के कामकाज के तौर तरीकों से बेहद खफा थे. उन पर काम किया और लगभग महीने भर की मशक्कत के बाद ट्रस्ट की दूसरी बैठक में अयोध्या के सभी बड़े संत और मठों को अपने पाले में करने में सफल हुआ. जब ट्रस्ट के भीतर नई धार्मिक समिति बनी तो राम मंदिर में अयोध्या के साधु संतों का बोल बाला हो गया. अब अयोध्या के नाराज साधु संत खुश हैं और संघ और सरकार के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं.

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अब दूसरी कड़ी में संघ की तरफ से पत्रकारों के बीच फैले संवाद हीनता को भी कम करने की कोशिश दिखाई दी.आरएसएस के अखिल भारतीय संचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने सोमवार को लखनऊ में पत्रकारों से अनौपचारिक मुलाकात की जबकि कई और संघ के चेहरे पत्रकारों से अलग-अलग स्तर पर संवाद करते दिखाई दिए. संघ ने यह माना कि राम मंदिर में हुई चोरी बेहद गंभीर है और समाज इसे लेकर बहुत गुस्से में है लेकिन अनौपचारिक तौर पर संघ ये मानता है कि इस चोरी के सिर्फ वही 6 किरदार हैं जो सीसीटीवी में 45 दिनों में 70 बार चोरियां करते दिखाई दिये. वही असल चोर हैं और ट्रस्ट के चेहरे इस चोरी में लिप्त नहीं है. यही नहीं संघ ये भी मानता है कि दान पत्र से चोरी की गई रकम 3 करोड़ के आसपास हो सकती है जिसमें से 80 लाख बरामद की गई है.

संघ की तरफ से जो एक बात जो इस पूरे चढ़ावा चंदा चोरी में मानी गई कि राम मंदिर ट्रस्ट और समाज के बीच एक ऐसी संवाद हीनता थी जिसकी वजह से सच्चाई से ज्यादा अफवाह फैली. चंपत राय की कार्यशैली की सबसे ज्यादा चर्चा दिखाई दी. पत्रकारों के साथ उनके दुर्व्यवहार पर भी बातें हुई. 

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संघ के भीतर जो समझ है उसके मुताबिक यह गड़बड़ी बैंक के तरफ से है, ट्रस्ट की ओर से नहीं क्योंकि चंदा की रकम गिनने वाले बैंक की तरफ से रखे गए एजेंसी के ही लोग थे. संघ के भीतर भी चंपत राय और दूसरे अधिकारियों के कामकाज और तौर तरीकों को लेकर सवाल थे लेकिन संघ के अधिकारियों ने ऐसे सवालों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय चुप रहना ही बेहतर समझा.

छात्र आंदोलन के बीच संघ परिवार को एक ऐसा सुनहरा अवसर मिल गया जब अचानक अयोध्या के चढ़ावा चंदा चोरी की चर्चा पूरी तरीके से रुक गई. देश का विमर्श मंदिर से हटकर परीक्षा लीक और छात्र आंदोलन पर चला गया. ऐसे में संघ परिवार इस वक्त का फायदा अयोध्या के कील-कांटे दुरुस्त करने के लिए उठा लेना चाहता है, ताकि अगर दोबारा अयोध्या का मुद्दा विमर्श में आए तब तक गुस्से को शांत किया जा सके.

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