'बालिग बेटियों को अपने साथ रहने को मजबूर नहीं कर सकते माता-पिता, मर्जी से रहने को स्वतंत्र', इलाहाबाद HC की टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि बालिग बेटी को उसकी मर्जी के खिलाफ माता-पिता के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है. बेटी, जो बालिग और सक्षम व्यक्ति है, अपनी पसंद की जगह पर और अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने के लिए आजाद है.

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कोर्ट ने कलावती देवी की याचिका खारिज कर दी. (File Photo: ITG) कोर्ट ने कलावती देवी की याचिका खारिज कर दी. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • प्रयागराज,
  • 06 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:35 AM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'हेबियस कॉर्पस' याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि माता-पिता अपनी बालिग बेटी को उनकी मर्जी के खिलाफ अपने साथ रहने के लिए मजबूर करने के लिए ऐसी याचिकाओं का सहारा नहीं ले सकते.

28 सितंबर के एक आदेश में जस्टिस संदीप जैन ने कहा, 'किसी बालिग व्यक्ति को उसकी इच्छा के खिलाफ किसी खास व्यक्ति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, केवल इसलिए कि वे उसके माता-पिता हैं.'

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कोर्ट ने कलावती देवी नाम की महिला की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी 25 साल बेटी कुमारी पूजा को कोर्ट के सामने पेश करने की मांग की थी. कोर्ट ने कहा कि बेटी, जो बालिग और सक्षम व्यक्ति है, अपनी पसंद की जगह पर और अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने के लिए आजाद है.

जानकारी के मुताबिक, कलावती देवी ने अपनी बेटी को हाईकोर्ट के सामने पेश करने के निर्देश की मांग करते हुए 'हेबियस कॉर्पस' याचिका दायर की थी. 17 अगस्त 2026 को आदेश के बाद बेटी को कोर्ट में पेश किया गया था.

कोर्ट के साथ बातचीत के दौरान, पूजा ने कहा कि वह अपनी मर्जी से दिल्ली में स्वतंत्र रूप से रह रही है और किसी भी गैर-कानूनी या अवैध हिरासत में नहीं है.

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उसने आगे कहा कि वह अपनी मां के साथ नहीं रहना चाहती. उसने आरोप लगाया कि उसकी मां का व्यवहार उसके प्रति अच्छा नहीं रहा है और उसे अपने पैरेंटल होम में अक्सर मारपीट और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा है.

दूसरी ओर, मां ने इन आरोपों से इनकार किया और इच्छा जताई कि उसकी बेटी उसके साथ पैरेंटल होम में रहे.

बेटी का बयान सुनने और उससे बातचीत के बाद कोर्ट ने माना कि वह बालिग है और उसने अपनी मां के साथ रहने से साफ इनकार किया है, जिसके बाद याचिका खारिज कर दी गई.

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