नूंह में BJP नेता से मांगी 5 करोड़ की फिरौती, लॉरेंस-गोदारा गैंग के नाम पर धमकी देने वाला आरोपी गिरफ्तार

नूंह में भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जाहिद हुसैन से लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा गैंग के नाम पर पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई थी. शिकायत 28 सितंबर को थाना सिटी नूंह में दर्ज हुई. साइबर सेल की मदद से पता चला कि कॉल जिन नंबरों से हुए, वे इटावा के रहने वाले 19 साल के आकाश यादव उर्फ अंशु के नाम पर थे.

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फिरौती मांगने के मामले में पुलिस ने 19 वर्षीय आकाश यादव उर्फ अंशु को पुलिस ने गिरफ्तार किया है (Photo: ITG) फिरौती मांगने के मामले में पुलिस ने 19 वर्षीय आकाश यादव उर्फ अंशु को पुलिस ने गिरफ्तार किया है (Photo: ITG)

अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 04 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:22 AM IST

नूंह पुलिस ने भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जाहिद हुसैन से लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा गैंग के नाम पर पांच करोड़ रुपये की फिरौती मांगने के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी उत्तर प्रदेश के इटावा जिले का 19 साल का आकाश यादव उर्फ अंशु है. उसे दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया था और अब जेल भेजा गया है. पूछताछ में एक और व्यक्ति का नाम सामने आया है. रिमांड के दौरान एक और मोबाइल फोन बरामद हुआ है.

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जाहिद हुसैन ने 28 सितंबर को थाना सिटी नूंह में शिकायत दी थी. 27 सितंबर की रात उनके मोबाइल पर एक नंबर से कॉल आई. कॉल करने वाले ने खुद को लॉरेंस बिश्नोई और रोहित गोदारा गैंग का सदस्य बताया और पांच करोड़ रुपये मांगे. उसने पैसे न देने पर उन्हें और परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी.

शिकायत पर थाना शहर नूंह में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज हुआ. पुलिस ने साइबर सेल की मदद से तकनीकी जानकारी जुटाई. जांच में सामने आया कि धमकी भरे कॉल जिन मोबाइल नंबरों से किए गए, वे आकाश यादव उर्फ अंशु के नाम पर पंजीकृत थे. इसी आधार पर पुलिस ने उसकी पहचान की और गिरफ्तार कर लिया.

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गिरफ्तारी के समय आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन मिला, जिसे जांच के लिए जब्त किया गया. साइबर विश्लेषण में इस फोन से जुड़े व्हाट्सएप नंबरों और दूसरी डिजिटल गतिविधियों की जांच हुई. पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने कुछ अहम खुलासे किए हैं, जिनके आधार पर जांच आगे बढ़ रही है. एक और व्यक्ति का नाम सामने आया है, जिसकी भूमिका देखी जा रही है.

आरोपी को रिमांड पर लिया गया था ताकि मामले में इस्तेमाल मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल सबूत बरामद हो सकें और सह-आरोपियों की जानकारी मिल सके. रिमांड में मिले फोन को अहम सबूत माना जा रहा है.

पुलिस यह पता लगा रही है कि आरोपी ने अकेले यह काम किया या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क या दूसरे लोग हैं. मामले की जांच जारी है और सबूतों के आधार पर कानूनी कार्रवाई होगी.

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