सावन की कांवड़ यात्रा में हर साल कुछ ऐसी झांकियां और कांवड़ें देखने को मिलती हैं, जो श्रद्धा के साथ-साथ लोगों का ध्यान भी खींच लेती हैं. इस बार मुजफ्फरनगर में एक ऐसी कांवड़ चर्चा का केंद्र बनी, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बड़ी तस्वीरें लगी है. हरिद्वार से गंगाजल लेकर बुलंदशहर जा रही छह शिवभक्तों की यह टोली रात जैसे ही मुजफ्फरनगर पहुंची, राहगीरों और अन्य कांवड़ियों की नजरें उसी पर टिक गईं.
कई लोग कांवड़ के साथ तस्वीरें खिंचवाने लगे तो कई इसकी वजह जानने के लिए टोली के सदस्यों से बातचीत करने लगे. इस टोली की एक और बात लोगों की उत्सुकता का कारण बनी. इसमें समीर नाम का एक मुस्लिम शिवभक्त भी शामिल था, जिसने बताया कि वह पहली बार कांवड़ यात्रा कर रहा है. बुलंदशहर के रहने वाले नीरज और उनके साथियों ने बताया कि उन्होंने 1 अगस्त को हरिद्वार के हर की पौड़ी से गंगाजल भरा था. इसके बाद वे पैदल बुलंदशहर के लिए रवाना हुए. यात्रा के दौरान उनकी कांवड़ जहां-जहां पहुंची, लोगों की नजर सबसे पहले उस पर लगी तस्वीरों पर गई.
नीरज का कहना है कि उन्होंने अपनी श्रद्धा और व्यक्तिगत आस्था के चलते कांवड़ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीरें लगाई हैं. नीरज ने बातचीत में कहा कि उनकी टोली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भगवान का दर्जा देती है. उन्होंने बताया कि इसी भावना के साथ वे यह विशेष कांवड़ लेकर निकले हैं. उन्होंने कहा कि उनकी प्रार्थना है कि भविष्य में भी योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश का नेतृत्व करें और नरेंद्र मोदी देश का नेतृत्व करते रहें. यह उनके व्यक्तिगत विश्वास और मन्नत का हिस्सा है.
गौ माता को राष्ट्रमाता बनाने की मांग
इस कांवड़ पर सिर्फ तस्वीरें ही नहीं थीं, बल्कि गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग वाले पोस्टर भी लगाए गए थे. नीरज ने बताया कि वर्ष 2025 में भी उन्होंने इसी तरह की कांवड़ यात्रा निकाली थी और तब भी उनकी यही मांग थी. इस बार भी उन्होंने अपनी यात्रा को उसी मांग से जोड़ते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि गौ माता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिया जाए.
जब टोली में शामिल हुआ एक मुस्लिम शिवभक्त
इस यात्रा की सबसे अलग तस्वीर समीर के रूप में सामने आई. नई दिल्ली निवासी समीर इस टोली के साथ कांवड़ लेकर चल रहे हैं. उन्होंने बताया कि उनके ताऊ हिंदू हैं और बचपन से उनका पालन-पोषण उन्होंने भी किया है. इसी वजह से दोनों परिवारों के बीच हमेशा अपनापन रहा. समीर ने कहा कि जब उन्हें कांवड़ यात्रा में शामिल होने का अवसर मिला तो उन्होंने बिना किसी झिझक के इसे स्वीकार कर लिया. उनके मुताबिक यह उनकी पहली कांवड़ यात्रा है और उन्होंने भी अपनी श्रद्धा के साथ गंगाजल उठाया है. उन्होंने कहा कि वह मुस्लिम हैं, लेकिन दूसरे धर्म की परंपराओं का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी मानते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी मन्नत में गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिए जाने की कामना की है.
मुजफ्फरनगर में जुटी लोगों की भीड़
रात जैसे ही यह टोली मुजफ्फरनगर पहुंची, कांवड़ देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटने लगी. कई लोगों ने मोबाइल से वीडियो बनाए, तो कुछ ने तस्वीरें खींचीं. राहगीर कांवड़ पर लगे पोस्टर और तस्वीरों को ध्यान से देखते रहे. कुछ देर तक यह टोली लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही और फिर अपनी मंजिल बुलंदशहर की ओर आगे बढ़ गई. नीरज ने बताया कि यह पहली बार नहीं है, जब उन्होंने इस तरह की थीम वाली कांवड़ निकाली हो. इससे पहले भी वे इसी तरह की कांवड़ लेकर यात्रा कर चुके हैं. उनका कहना है कि इस बार भी उन्होंने अपनी पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाया है.
कांवड़ यात्रा में हर साल दिखती हैं अलग-अलग थीमसावन के महीने में हरिद्वार, ऋषिकेश और गंगोत्री से गंगाजल लेकर लौटने वाले शिवभक्त अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार अलग-अलग तरह की कांवड़ सजाते हैं. कहीं धार्मिक झांकियां दिखाई देती हैं तो कहीं सामाजिक संदेश. इस बार मुजफ्फरनगर से गुजर रही यह कांवड़ अपनी सजावट और उस पर लगे संदेशों की वजह से चर्चा में रही. रास्ते से गुजर रहे कई लोगों ने इस कांवड़ के वीडियो और तस्वीरें अपने मोबाइल में कैद किए. देखते ही देखते ये वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा होने लगे. यही वजह रही कि मुजफ्फरनगर में कुछ देर के लिए यह टोली लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई.
संदीप सैनी