उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अमीनाबाद में एफएसडीए (उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन) की टीम ने नकली दवाओं के खेल पर बड़ा एक्शन लिया है. अफसरों ने बिना दवा बेचे कागजों पर करोड़ों रुपये की बिलिंग करने वाले नेटवर्क का खुलासा किया है. मामले में चार कारोबारियों पर FIR दर्ज कराई गई है.
यह पहली बार नहीं है जब अमीनाबाद में ऐसा नेटवर्क पकड़ा गया हो. इससे पहले 30 जुलाई को भी एफएसडीए ने फर्जी बिलिंग और फेक बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए नकली दवाएं बेचने वाले गिरोह पर शिकंजा कसा था. उस समय अमीनाबाद थाने में 6 FIR दर्ज कराई गई थीं. उस जांच में मिश्रा एसोसिएट्स, अशोक फार्मास्युटिकल्स और भारत फार्मा जैसी एजेंसियों के बीच बिना दवा सप्लाई किए सिर्फ कागजों पर क्रॉस-बिलिंग का खेल पकड़ा गया था.
ताजा मामले की बात करें तो अमीनाबाद थाने में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक चार अलग-अलग फर्में मिलकर यह फर्जीवाड़ा चला रही थीं. ये लोग आपस में फर्जी बिल बनाकर केवल कागजी लेनदेन दिखाते थे. जांच में पता चला कि सहारनपुर की एक फर्म पिछले दो साल से पूरी तरह बंद थी. इसके बावजूद उसके नाम पर दवाओं की खरीद-बिक्री के नकली रिकॉर्ड बनाए जा रहे थे.
39 लाख से ज्यादा गोलियों का हिसाब गायब
जांच में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि शुगर की दवा Zoryl M1 की करीब 39.20 लाख गोलियों का कोई अता-पता नहीं है. कागजों में तो इनकी खरीद दर्ज थी, लेकिन दुकान में एक भी गोली नहीं मिली. अफसरों का मानना है कि इतनी बड़ी तादाद में संदिग्ध दवाओं को चोरी-छिपे बाजार में बेच दिया गया, जो मरीजों की जान के लिए सीधा खतरा है.
सबूत मिटाने के लिए डिलीट किया डेटा
विभाग ने जब एमके फार्मा के रिकॉर्ड की जांच की, तो 8.87 करोड़ रुपये की दवा खरीद का दावा मिला. शक होने पर जब कंपनियों से पूछताछ की गई, तो उन्होंने इतनी बड़ी बिक्री से साफ इनकार कर दिया. फंसने के डर से आरोपियों ने अपने लैपटॉप का पुराना डेटा तक मिटा दिया.
नकली दवाओं का यह जाल सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं है. एफएसडीए की जांच में इस नेटवर्क के तार राजस्थान और उत्तराखंड के देहरादून तक जुड़े पाए गए हैं. अफसरों ने साफ किया है कि इस खेल में शामिल किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के लाइसेंस रद्द कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
समर्थ श्रीवास्तव