25 नवंबर को होनी थी बेटी की शादी, प्रेमी संग भागी तो सदमे में मां की मौत, पिता ने जिंदा बेटी का कर दिया पिंडदान

कौशाम्बी में बेटी के प्रेमी के साथ घर छोड़ने और पत्नी की मौत से आहत एक पिता ने अपनी जीवित इकलौती बेटी का पिंडदान कर तेरहवीं कर दी. पिता का आरोप है कि बेटी के घर छोड़ने के सदमे से पत्नी की मौत हुई. अब उन्होंने बेटी को अपनी चल-अचल संपत्ति से बेदखल करने का फैसला लिया है.

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पत्नी की मौत के बाद जिंदा बेटी की कर दी तेरहवीं. (Photo: Screengrab) पत्नी की मौत के बाद जिंदा बेटी की कर दी तेरहवीं. (Photo: Screengrab)

अखिलेश कुमार

  • कौशाम्बी ,
  • 29 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:08 PM IST

उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में एक पिता ने अपनी जीवित इकलौती बेटी को मृत मानकर उसका पिंडदान कर दिया. बेटी के प्रेमी के साथ घर छोड़कर जाने और पत्नी की मौत से आहत पिता ने पत्नी के तेरहवीं संस्कार के साथ ही बेटी का भी तेरहवीं संस्कार कर दिया. पिता का कहना है कि बेटी के इस कदम से उनकी पत्नी को गहरा सदमा लगा था, जिसके बाद उनकी मौत हो गई. पत्नी को खोने और बेटी के घर छोड़ने के दोहरे दर्द से टूटे पिता ने अब बेटी को अपनी चल-अचल संपत्ति से बेदखल करने का भी फैसला लिया है.

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यह मामला कौशाम्बी जिले के संदीपन घाट थाना क्षेत्र में मूरतगंज-पल्हाना रोड का है. यहां रहने वाले राजू गुप्ता की इकलौती बेटी करीब 19 साल की है और इंटरमीडिएट की छात्रा है. परिवार में बेटी की शादी की तैयारियां चल रही थीं. उसकी शादी की तारीख भी तय हो चुकी थी, लेकिन इससे पहले ही परिवार में ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने पिता को अंदर तक तोड़ दिया.
कॉलेज जाने के लिए निकली, फिर घर नहीं लौटी बेटी

परिजनों के मुताबिक, 15 अक्टूबर को राजू गुप्ता की बेटी कॉलेज जाने के लिए घर से निकली थी. काफी समय बीत जाने के बाद भी वह वापस नहीं लौटी तो परिवार के लोगों ने उसकी तलाश शुरू कर दी. इसी दौरान पता चला कि युवती धन्नी गांव के रहने वाले अपने प्रेमी अमरदीप रैदास के साथ चली गई है. बेटी के इस कदम से परिवार परेशान हो गया.

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राजू गुप्ता का आरोप है कि बेटी के घर छोड़कर जाने से उनकी पत्नी पार्वती को गहरा सदमा लगा. पार्वती की उम्र करीब 40 साल थी. पिता के मुताबिक, इस घटना के बाद उनकी पत्नी की मौत हो गई. एक तरफ इकलौती बेटी के घर छोड़कर चले जाने का दुख था, तो दूसरी तरफ पत्नी की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया. राजू गुप्ता के लिए यह दोहरा आघात था. जिस बेटी की शादी की तैयारियां चल रही थीं, वह घर छोड़कर चली गई और कुछ ही समय में परिवार को पत्नी को भी खोना पड़ा.

पुलिस ने छह घंटे में युवती और उसके प्रेमी को ढूंढा

मामले की जानकारी संदीपन घाट थाना पुलिस को मिली तो पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू कर दी. पुलिस ने करीब छह घंटे के भीतर युवती और उसके प्रेमी को हिरासत में लेकर पूछताछ की. पुलिस के मुताबिक, युवती को उसकी मां की मौत की जानकारी दी गई. हालांकि, उसने अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया. युवती बालिग है, इसलिए पुलिस ने अदालत में उसका बयान दर्ज कराने के बाद उसे उसकी इच्छा के अनुसार प्रेमी के साथ जाने दिया. पुलिस की कार्रवाई के बाद युवती अपने फैसले पर कायम रही. वहीं, बेटी के इस निर्णय से आहत पिता ने उससे संबंध तोड़ने जैसा कदम उठाया.

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पत्नी की मौत और बेटी के घर छोड़ने की घटना से दुखी राजू गुप्ता ने ऐसा कदम उठाया, जिसकी चर्चा इलाके में हो रही है. उन्होंने अपनी दिवंगत पत्नी के तेरहवीं संस्कार के साथ ही जीवित बेटी का भी पिंडदान कर दिया और उसका तेरहवीं संस्कार किया. पिता के इस फैसले को परिवार के भीतर पैदा हुए गहरे दुख और नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है. राजू गुप्ता का आरोप है कि बेटी के घर छोड़ने से उनकी पत्नी को गहरा सदमा पहुंचा, जिसके बाद उनकी मौत हो गई. पत्नी की मौत के बाद पिता बेटी के फैसले से और ज्यादा आहत हो गए. उन्होंने अब बेटी को अपनी चल-अचल संपत्ति से बेदखल करने का फैसला भी लिया है. इस तरह बेटी के प्रेम प्रसंग और घर छोड़ने से शुरू हुआ विवाद अब परिवार के रिश्तों और संपत्ति से जुड़े फैसले तक पहुंच गया है.

पहले भी दो बार टूटी थी सगाई, 25 नवंबर को होनी थी शादी

बताया जा रहा है कि युवती की पहले दो जगह सगाई हुई थी, लेकिन दोनों बार रिश्ता टूट गया. करीब एक महीने पहले उसकी सगाई फतेहपुर जिले में हुई थी. परिवार में शादी की तैयारियां चल रही थीं और शादी की तारीख 25 नवंबर तय की गई थी. परिवार को उम्मीद थी कि बेटी की शादी के साथ घर में खुशियां लौटेंगी. लेकिन शादी की तारीख आने से पहले ही युवती अपने प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई. इसके बाद पत्नी की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया. राजू गुप्ता के लिए बेटी की शादी को लेकर देखे गए सपने और पत्नी को खोने का दुख एक साथ सामने आया. इसी दर्द और नाराजगी के बीच उन्होंने जीवित बेटी का पिंडदान कर तेरहवीं संस्कार करने का फैसला लिया.

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