लखनऊ के रहीमाबाद थाना क्षेत्र से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां एक तरफ घर में पिता की मौत पर मातम पसरा हुआ था, तो दूसरी तरफ कलयुगी बेटा जमीन के लालच में अंधा होकर अपने मृत पिता के सादे कागजों पर अंगूठे के निशान लगवा रहा था. इस घिनौने काम में वह अपने चचेरे भाई की मदद ले रहा था. मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने इस पूरी हरकत का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. घटना के सामने आने के बाद पूरे इलाके में बेटे की इस करतूत की थू-थू हो रही है.
बेटे ने बुजुर्ग मां-बाप को घर से था निकाला
बता दें कि रहीमाबाद के खड़ौहा गांव निवासी महेंद्र और उसकी पत्नी लक्ष्मी अपने बुजुर्ग पिता छत्रपाल (75) और मां शिवदेवी से रोज अभद्र व्यवहार करते थे. प्रताड़ना इतनी बढ़ गई कि साल 2023 में दोनों ने बुजुर्ग दंपति को उनके ही पैतृक घर से बाहर निकाल दिया. इसके बाद बेबस छत्रपाल अपनी पत्नी के साथ रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हो गए.
साल 2024 में छत्रपाल अपनी बड़ी बेटी सुमन (निवासी बुद्धेश्वर, लखनऊ) और दो अन्य शादीशुदा बेटियों के पास रहने लगे. बेटियों ने अपने बुजुर्ग मां-बाप की दिन-रात सेवा की. बेटियों के प्यार और सेवा से खुश होकर छत्रपाल ने अपनी कुल साढ़े छह बीघा जमीन में से एक-एक बीघा जमीन तीनों बेटियों के नाम कर दी. वहीं, बेटे महेंद्र और बहू की प्रताड़ना से दुखी होकर उन्होंने समाचार पत्र में सार्वजनिक सूचना देकर दोनों को अपनी चल-अचल संपत्ति से बेदखल कर दिया था. इसी बात को लेकर बेटा खुन्नस खाए बैठा था.
इलाज के नाम पर ले गया, तीसरे दिन हो गई मौत
मृतक की बेटी सुमन ने बताया कि बीते 7 जुलाई को जब पिता छत्रपाल की तबीयत बिगड़ी, तो उन्होंने भाई महेंद्र को इसकी खबर दी. सूचना मिलते ही महेंद्र अपने परिजनों के साथ लखनऊ पहुंचा और बहन से झगड़ा करके इलाज कराने के बहाने पिता को अपने साथ गांव ले आया. इसके ठीक तीन दिन बाद, यानी 9 जुलाई को पिता छत्रपाल की मौत हो गई.
बहनों से भिड़ा कलयुगी भाई
अंतिम संस्कार के वक्त जब बहनें गांव पहुंचीं, तो कलयुगी भाई ने उनके साथ भी जमकर गाली-गलौज और बदसलूकी की. सुमन के पति रमेश ने बताया कि मृत पिता से सादे कागजों पर अंगूठा लगवाते देख वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया. इंसानियत को तार-तार करने वाली यह हरकत बेहद भयानक थी. मृत पिता की देह के साथ हुई इस घिनौनी हरकत पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. गांव वालों का कहना है कि जिसने जीते जी अपने जन्मदाता का सम्मान नहीं किया, उसने मौत के बाद भी उनकी देह को नहीं बख्शा.
ग्रामीणों ने बेटियों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कुपुत्रों से बेहतर भगवान हर घर में बेटियां ही दे, जो कम से कम बुढ़ापे में मां-बाप का सहारा बनती हैं और उनका ख्याल रखती हैं. इस पूरे मामले पर रहीमाबाद थाना प्रभारी ने बताया कि तहरीर मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
अंकित मिश्रा