उत्तर प्रदेश में पेपर लीक, लंबित भर्तियों, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों और निजी स्कूलों की मनमानी फीस जैसे मुद्दों को लेकर प्रतियोगी छात्रों और छात्र नेताओं ने नया संगठन बनाया है. 'जस्टिस मोर्चा' नाम के इस संगठन ने शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों को लेकर प्रदेशव्यापी अभियान चलाने का ऐलान किया है. इसके तहत छात्र नेता और युवा प्रदेश के स्कूल-कॉलेजों में जाकर छात्रों से संवाद करेंगे.
'जस्टिस मोर्चा' ने 12 अगस्त से प्रदेशव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू करने की घोषणा की है. संगठन का दावा है कि 50 दिनों के दौरान प्रदेश के 1000 कॉलेजों तक पहुंचकर युवाओं से संवाद किया जाएगा. इसके अलावा 20 अगस्त से गोरखपुर के चौरी चौरा से साइकिल यात्रा शुरू होगी. करीब 40 दिनों में यह यात्रा 800 किलोमीटर की दूरी तय करेगी. इसके बाद 2 अक्टूबर को लखनऊ में आंदोलन किया जाएगा.
जस्टिस मोर्चा ने शिक्षा और रोजगार से जुड़ी 10 प्रमुख मांगें भी सामने रखी हैं. संगठन की मांग है कि सरकार वार्षिक भर्ती परीक्षा कैलेंडर जारी करे और सभी प्रतियोगी परीक्षाएं तय समय-सीमा के भीतर कराई जाएं. सरकारी विभागों में स्वीकृत लेकिन खाली पड़े सभी पदों को तत्काल भरने और लंबित भर्तियों की नियुक्ति प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने की भी मांग की गई है.
मोर्चा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को वापस लेने की मांग की है. साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता, नॉर्मलाइजेशन खत्म करने और हर अभ्यर्थी को विस्तृत स्कोर कार्ड उपलब्ध कराने की मांग उठाई है. संविदा और ठेका प्रथा पर रोक लगाने तथा समान काम के लिए समान वेतन देने की मांग भी एजेंडे में शामिल है.
निजी स्कूलों की फीस को लेकर जस्टिस मोर्चा ने अधिकतम फीस सीमा यानी 'फीस कैप' तय करने की मांग की है. इसके अलावा पेपर लीक के खिलाफ आंदोलनों में शामिल छात्रों और शिक्षकों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की गई है.
संगठन ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को समाप्त कर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अधिक पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था बनाने की मांग भी रखी है. जस्टिस मोर्चा की दसवीं प्रमुख मांग सभी शोधार्थियों के लिए समान फेलोशिप सुनिश्चित करने की है.
जस्टिस मोर्चा की 10 प्रमुख मांगें
1. वार्षिक भर्ती परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए और सभी प्रतियोगी परीक्षाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर आयोजित किया जाए.
2. स्वीकृत लेकिन रिक्त पड़े सभी सरकारी पदों को तत्काल भरा जाए.
3. लंबित सभी भर्तियों को तत्काल पूरा कर नियुक्ति प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से समाप्त किया जाए.
4. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को वापस लिया जाए.
5. परीक्षा प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया समाप्त की जाए और प्रत्येक अभ्यर्थी को विस्तृत स्कोर कार्ड उपलब्ध कराया जाए.
6. संविदा एवं ठेका प्रथा पर रोक लगाई जाए और समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित किया जाए.
7. निजी विद्यालयों की मनमानी फीस पर रोक लगाने के लिए फीस की अधिकतम सीमा (Fee Cap) निर्धारित की जाए.
8. पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं.
9. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को समाप्त किया जाए और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था बनाई जाए.
10. सभी शोधार्थियों के लिए समान फेलोशिप सुनिश्चित की जाए, ताकि शोध के क्षेत्र में भेदभाव समाप्त हो और हर शोधार्थी को समान अवसर मिले.
संतोष शर्मा