Uttar Pradesh Politics: सिराथू से अपना दल (कमेरावादी) की विधायक डॉ. पल्लवी पटेल ने प्रयागराज के हटवा गांव पहुंचकर अतीक अहमद की बहन के घर उनके परिजनों से मुलाकात की. झांसी में सड़क हादसे में अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान अहमद की मौत होने के बाद पल्लवी पटेल परिवार को सांत्वना देने और अपनी संवेदना व्यक्त करने पहुंची थीं. उन्होंने अतीक के बेटे एहजम अहमद और अन्य परिजनों से मिलकर दुख बांटा और उन्हें हिम्मत दी. करीब डेढ़ घंटे तक परिवार के बीच रुककर और बातचीत करके वह रात लगभग 10:30 बजे वहां से रवाना हुईं.
'दुख की घड़ी में आपके साथ खड़े हैं'- पल्लवी पटेल
हटवा गांव में मुलाकात के दौरान पल्लवी पटेल ने अतीक अहमद के बेटे एहजम अहमद और अन्य सदस्यों से काफी देर बातचीत की. पल्लवी पटेल ने परिजनों को सांत्वना देते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में वे उनके साथ हैं और जब भी परिवार पर कोई दुख पड़ेगा, वे उनके साथ खड़ी रहेंगी. उन्होंने परिजनों को हिम्मत न हारने की सलाह दी. इस दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष (शहर पश्चिमी) प्रीतम पटेल समेत अन्य समर्थक भी मौजूद रहे.
सोनेलाल पटेल और अतीक अहमद के पुराने रिश्तों का जिक्र
मुलाकात के दौरान अतीक अहमद और अपना दल के संस्थापक स्वर्गीय डॉ. सोनेलाल पटेल के पुराने प्रगाढ़ संबंधों की भी चर्चा हुई. एहजम ने पल्लवी पटेल को याद दिलाया कि उनके पिता सोनेलाल पटेल और अतीक अहमद के बीच गहरी दोस्ती थी, जिसके कारण दोनों परिवार एक-दूसरे को वर्षों से जानते हैं. अतीक अहमद का अपना दल से पुराना जुड़ाव रहा है और वे एक समय पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके थे.
अस्पताल पहुंचाने से शुरू हुई थी गहरी दोस्ती
बताया जाता है कि प्रयागराज में एक आंदोलन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज में स्वर्गीय डॉ. सोनेलाल पटेल गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उस समय अतीक अहमद ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाने और इलाज कराने में बड़ी मदद की थी. इस घटना के बाद से ही दोनों नेताओं के बीच नजदीकी और पारिवारिक दोस्ती काफी गहरी हो गई थी.
राजनीतिक गलियारों में मुलाकात के मायने और चर्चा
वर्षों बाद अतीक के परिवार पर आई इस दुख की घड़ी में पल्लवी पटेल का उनके घर पहुंचना पुराने रिश्तों को फिर से चर्चा में ले आया है. हालांकि, पल्लवी पटेल की ओर से इस मुलाकात को पूरी तरह से पारिवारिक, व्यक्तिगत और मानवीय संवेदना के तौर पर देखा गया है. परिवार के करीबी लोगों के अनुसार, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहने की बात दोहराई है.
आनंद राज