Uttar Pradesh News: कन्नौज निवासी दसवीं के छात्र विशाल के पेट में गुल्ली-डंडा खेलते समय दीवार से नीचे गिरने के कारण एक लाठी पेट में घुसकर कंधे की तरफ फंस गई. परिजन उसे इलाज के लिए पहले स्थानीय अस्पताल और फिर तिर्वा मेडिकल कॉलेज ले गए, लेकिन डॉक्टरों द्वारा हाथ खड़े करने के बाद वे उसे कानपुर ले आए.
कानपुर के निजी अस्पताल में प्रसिद्ध सर्जन डॉक्टर बृजेश यादव और उनकी 8 डॉक्टरों की टीम ने रात 11 बजे से सुबह 4 बजे तक 4 घंटे का सफल ऑपरेशन किया. डॉक्टरों ने लाठी को एक-एक इंच काटकर पेट से निकाला और छात्र की जान बचा ली.
गुल्ली-डंडा खेलते समय हुआ हादसा
कन्नौज का रहने वाला हाई स्कूल का छात्र विशाल 31 तारीख को दोस्तों के साथ एक प्लॉट में गुल्ली-डंडा खेल रहा था. दीवार पर चढ़कर गुल्ली पकड़ने की कोशिश में वह नीचे मैदान में गड़ी लाठी पर गिर पड़ा. करीब 5 फीट की लाठी में से 3 फीट पेट में घुसकर कंधे की तरफ फंस गई.
एंबुलेंस से बाहर निकली थी लाठी
तिर्वा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के इनकार के बाद परिजन उसे आधी बेहोशी की हालत में कानपुर के सीनियर सर्जन डॉक्टर बृजेश यादव के पास लाए. हालत इतनी गंभीर थी कि एंबुलेंस का दरवाजा खुला रखना पड़ा था, क्योंकि पेट में घुसी लाठी का बाकी हिस्सा एंबुलेंस के बाहर निकला हुआ था.
ग्राइंडर से काटकर निकाला गया हिस्सा
डॉक्टर बृजेश यादव की टीम में 2 एनेस्थीसिया और हार्ट के डॉक्टर शामिल थे. ऑपरेशन थिएटर में ले जाने से पहले पेट के बाहर निकली लाठी को ग्राइंडर से काटा गया. इसके बाद 4 घंटे की मेहनत से पेट के अंदर घुसी लाठी को एक-एक इंच काटकर सुरक्षित बाहर निकाला गया.
मां बोली- डॉक्टर हमारे लिए भगवान बने
अस्पताल में 7 दिन भर्ती रखने और डिस्चार्ज के बाद बुधवार को चेकअप में विशाल को पूरी तरह फिट पाया गया. विशाल की मां विनीता ने डॉक्टर बृजेश यादव का आभार जताते हुए कहा कि उनके लिए डॉक्टर ही भगवान बन गए हैं, जिन्होंने उनके बेटे की जान बचा ली.
रंजय सिंह