कांवड़ यात्रा में आस्था के अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं. कहीं श्रद्धालु भगवान शिव की भक्ति में पैदल चलते नजर आते हैं तो कहीं लोग अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए कठिन संकल्प लेकर यात्रा करते हैं. गाजियाबाद से गुजर रही कांवड़ यात्रा में इस बार ऐसी ही एक भावुक तस्वीर सामने आई है, जिसमें भगवान शिव की भक्ति के साथ बुजुर्गों के प्रति सम्मान और परिवार के प्रति प्रेम भी दिखाई दे रहा है. हिमांशु चौहान और उनके भाई प्रिंस राघव अपनी नानी रूपा देवी को कंधे पर बैठाकर कांवड़ यात्रा कर रहे हैं. दोनों भाई हरिद्वार से 50 लीटर गंगाजल लेकर निकले हैं. इसी यात्रा में उन्होंने अपनी नानी को भी साथ रखा है. नानी उनके लिए कांवड़ यात्रा का हिस्सा हैं और दोनों भाई बारी-बारी से उन्हें कंधे पर बैठाकर आगे बढ़ रहे हैं.
कांवड़ के साथ कंधे पर बैठी नानी की तस्वीर कांवड़ मार्ग से गुजरने वाले लोगों का ध्यान खींच रही है. राहगीर भी इस दृश्य को देखते हुए रुक जाते हैं. एक तरफ दोनों भाइयों के कंधे पर पवित्र गंगाजल से भरी कांवड़ है, वहीं दूसरी तरफ वे अपनी बुजुर्ग नानी को भी साथ लेकर चल रहे हैं. दोनों भाइयों के लिए यह यात्रा सिर्फ हरिद्वार से गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने तक सीमित नहीं है. उनके मुताबिक, यह यात्रा उनकी नानी की खुशी और अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी समर्पित है. हिमांशु चौहान ने बताया कि वे 11 अगस्त को नोएडा में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे.
नानी की खुशी और अच्छे स्वास्थ्य का संकल्प
हिमांशु की कामना है कि भगवान भोलेनाथ उनके परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखें. इसके साथ ही वह चाहते हैं कि उनकी नानी रूपा देवी हमेशा स्वस्थ और प्रसन्न रहें. इसी भावना के साथ दोनों भाई नानी को अपने साथ लेकर कांवड़ यात्रा पर निकले हैं. नानी को कंधे पर बैठाकर यात्रा करने के पीछे दोनों भाइयों का परिवार से जुड़ाव भी साफ दिखाई देता है. उम्र के इस पड़ाव पर रूपा देवी के लिए लंबी पैदल यात्रा करना आसान नहीं है. ऐसे में दोनों भाइयों ने उन्हें पीछे छोड़ने के बजाय अपने साथ रखने का फैसला किया.
यात्रा के दौरान दोनों भाई बारी-बारी से नानी को कंधे पर बैठाते हैं. कभी हिमांशु यह जिम्मेदारी संभालते हैं तो कभी प्रिंस राघव नानी को कंधे पर लेकर चलते हैं. इस तरह दोनों भाई कांवड़ और नानी को साथ लेकर अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं. इस यात्रा में नानी उनके लिए केवल परिवार की बुजुर्ग सदस्य नहीं हैं, बल्कि उनके संकल्प और प्रार्थना का भी अहम हिस्सा हैं. दोनों भाइयों की कोशिश है कि भगवान शिव का जलाभिषेक भी हो और उनकी नानी भी इस धार्मिक यात्रा का हिस्सा बनें.
सोमवार रात हिमांशु और प्रिंस राघव अपनी नानी के साथ गाजियाबाद के खोड़ा इलाके स्थित चौहान परिवार कांवड़ सेवा शिविर में रुके. इस शिविर में कांवड़ियों के ठहरने, स्नान, भोजन और प्रसाद की व्यवस्था की गई है. शिविर में पहुंचने पर एसीपी इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य ने भी कांवड़ियों को प्रसाद वितरित किया. उन्होंने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत भी किया. इस दौरान उन्होंने चौहान परिवार की 36 वर्षों से चली आ रही कांवड़ सेवा की सराहना की.
कांवड़ मार्ग पर श्रद्धालुओं के स्वागत और सेवा की व्यवस्था से दोनों भाइयों का उत्साह भी बढ़ा. हिमांशु और प्रिंस राघव का कहना है कि रास्ते में जिस तरह कांवड़ियों की सेवा और स्वागत किया जा रहा है, उससे उनकी यात्रा का उत्साह और बढ़ रहा है. इस पूरी यात्रा की सबसे भावुक तस्वीर हालांकि नानी और दोनों भाइयों की है. कंधे पर कांवड़ में 50 लीटर पवित्र गंगाजल लेकर दोनों भाई भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए आगे बढ़ रहे हैं. इसी के साथ वे अपनी नानी को भी कंधे पर बैठाकर यात्रा करा रहे हैं.
परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की कामना
हिमांशु और प्रिंस के लिए यह यात्रा परिवार की खुशहाली और नानी की खुशी की कामना से जुड़ी है. हरिद्वार से शुरू हुआ उनका यह सफर 11 अगस्त को नोएडा में भगवान शिव के जलाभिषेक के साथ पूरा होगा. कांवड़ यात्रा की भीड़ के बीच दोनों भाइयों और उनकी नानी की यह तस्वीर आस्था के साथ परिवार के रिश्ते की भी कहानी कह रही है. एक ओर भगवान शिव के प्रति भक्ति है तो दूसरी ओर नानी के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी. यह यात्रा दिखाती है कि अपनों को साथ लेकर चलना भी आस्था का ही एक रूप है.
मयंक गौड़