घाघरा नदी खतरे के निशान से 50 सेमी ऊपर, गोंडा के 5 गांवों में बाढ़, 9 हजार लोग प्रभावित

गोंडा में घाघरा नदी खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. तरबगंज तहसील के ऐली, गढ़ी और बहादुरपुर समेत पांच गांव बाढ़ की चपेट में हैं. करीब 9 हजार की आबादी के सामने संकट खड़ा हो गया है. घरों में पानी भर गया है और खेतों में खड़ी फसलें डूब गई हैं. रोजमर्रा के कामों के लिए ग्रामीणों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है.

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घाघरा खतरे के निशान से ऊपर. (Photo: Screengrab) घाघरा खतरे के निशान से ऊपर. (Photo: Screengrab)

अंचल श्रीवास्तव

  • गोंडा ,
  • 18 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:46 PM IST

उत्तर प्रदेश के गोंडा में घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है. नदी अब एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. जलस्तर बढ़ने से तरबगंज तहसील के पांच गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. इनमें ऐली, गढ़ी और बहादुरपुर समेत पांच गांव शामिल हैं. इन गांवों में करीब 9 हजार की आबादी बाढ़ से प्रभावित हो रही है. नदी की तलहटी में बसे होने के कारण यहां हर बार जलस्तर बढ़ने के साथ मुश्किलें बढ़ जाती हैं. इस बार भी गांवों में पानी भरने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो गई है.

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बाढ़ के पानी ने गांवों में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. कई घरों में पानी भर गया है. ग्रामीणों ने अपना जरूरी सामान तख्तों और चारपाइयों पर रख दिया है, ताकि पानी से सामान को बचाया जा सके. हालात ऐसे हैं कि कुछ लोग तख्तों पर ही खाना बनाने को मजबूर हैं. घरों में पानी भरा होने के कारण सामान्य तरीके से रहना और काम करना मुश्किल हो गया है.

रोजमर्रा के कामों के लिए नाव बनी सहारा

बाढ़ का असर सिर्फ घरों तक नहीं है. गांवों के खेत भी पानी में डूब गए हैं. खेतों में खड़ी फसलें बाढ़ के पानी की चपेट में आ गई हैं. इससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है. जलमग्न इलाकों में लोगों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है. गांव से बाहर आने-जाने के लिए अब नाव ही मुख्य सहारा रह गई है.

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बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को अपने रोजमर्रा के काम के लिए नावों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. पानी से घिरे गांवों में पैदल या दूसरे सामान्य साधनों से आवागमन मुश्किल हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण उनका सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. पानी के बीच जरूरी कामों के लिए उन्हें नाव का सहारा लेना पड़ रहा है.

बाढ़ के बीच ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या पशुओं के चारे की पैदा हो गई है. गांव और खेत पानी में डूबे होने के कारण पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है. ग्रामीणों की चिंता है कि पानी के बीच पशुओं के लिए चारा जुटाना चुनौती बन गया है. बाढ़ से इंसानों के साथ पशुओं के सामने भी परेशानी खड़ी हो गई है.

बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों की शिकायत है कि गांव में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी झांकने तक नहीं आया. उनका कहना है कि बाढ़ की वजह से गांव में हालात खराब हैं और लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मदद की उम्मीद जताई है. खासकर पशुओं के चारे और आवागमन को लेकर उनकी परेशानी बनी हुई है.

वहीं प्रशासन का कहना है कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. एसडीएम तरबगंज प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है और सभी बाढ़ चौकियां अलर्ट हैं. एसडीएम के मुताबिक, सभी बाढ़ पीड़ितों को खाना और राहत सामग्री दी जा रही है. प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने की व्यवस्था की गई है.

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एसडीएम प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के आवागमन के लिए गांवों में 72 नावें लगाई गई हैं. इन नावों के जरिए बाढ़ प्रभावित लोगों को आने-जाने में मदद दी जा रही है. प्रशासन का कहना है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और आवागमन की व्यवस्था लगातार जारी है. अधिकारियों के मुताबिक, प्रशासन बाढ़ पीड़ितों के संपर्क में है.

ऐली, गढ़ी और बहादुरपुर समेत पांच गांव जलमग्न

घाघरा नदी के खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर बहने के कारण तरबगंज तहसील के पांच गांव प्रभावित हुए हैं. करीब 9 हजार लोग बाढ़ की स्थिति का सामना कर रहे हैं. घर पानी में डूबे हैं, खेतों में फसलें डूबी हैं और पशुओं के चारे का संकट बना हुआ है. ग्रामीण नाव के सहारे रोजमर्रा के काम कर रहे हैं. वहीं प्रशासन ने राहत सामग्री, भोजन और नावों की व्यवस्था किए जाने की बात कही है.

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