कानपुर में 35 साल पुराने फर्जी एनकाउंटर केस में 12 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज, CBCID जांच में खुला राज

कानपुर के महाराजपुर थाने में 1991 में हुए फर्जी एनकाउंटर मामले में सीबीसीआईडी की 35 साल लंबी जांच के बाद 12 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज की गई है. प्लाट न देने के विवाद में तत्कालीन थानाध्यक्ष ने फर्जी लूट दिखाकर 10 निर्दोष लोगों को जेल भेजा था.

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रंजय सिंह

  • कानपुर ,
  • 19 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:05 PM IST

कानपुर के महाराजपुर थाना क्षेत्र में 22 अगस्त 1991 को हुए एक फर्जी पुलिस एनकाउंटर मामले में सीबीसीआईडी जांच के बाद 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी ने एक प्लाट न देने के रंजिश में 10 बेगुनाह लोगों को फर्जी लूट और मुठभेड़ दिखाकर जेल भेजा था. लंबी पैरवी के बाद सीबीसीआईडी की जांच में एनकाउंटर फर्जी साबित हुआ. कुल 18 दोषी पुलिसकर्मियों में से 6 की मौत हो चुकी है, जबकि जीवित 12 पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज किया गया है. कोर्ट द्वारा आरोपियों को 1996 में ही दोषमुक्त कर दिया गया था.

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प्लाट न देने की रंजिश में रचा गया फर्जी एनकाउंटर

22 अगस्त 1991 को तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी ने नरवाल मोड़ के पास डीसीएम से लूट और मुठभेड़ दिखाकर गांधीग्राम निवासी राकेश पाठक समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया था. उनके पास से राइफल, बंदूक और विस्फोटक की फर्जी बरामदगी दिखाई गई थी. डेढ़ महीने बाद जमानत मिलने पर राकेश पाठक के भाई देव प्रसाद पाठक ने शासन से शिकायत की. उन्होंने आरोप लगाया कि थानाध्यक्ष को प्लाट न देने पर बदला लेने के लिए यह फर्जी कहानी रची गई थी.

डीसीएम चालक के बयान ने खोली पुलिस की पोल

केस में सबसे बड़ा मोड़ डीसीएम चालक और कंडक्टर के बयान से आया. पुलिस ने जिनसे लूट दिखाई थी, उन्होंने बाद में बयान दिया कि पुलिसकर्मी रामादेवी चौराहे से जबरदस्ती गाड़ी में बैठे और फर्जी लूट का ड्रामा रचा. 1996 में ही सभी 10 बेगुनाह आरोपियों को कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया था. मुख्य आरोपी राकेश पाठक की मौत हो चुकी है, लेकिन उनके बड़े भाई देव प्रसाद पाठक 35 सालों तक इंसाफ के लिए कानूनी लड़ाई लड़ते रहे.

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18 दोषियों में से 6 की मौत, 12 पर FIR

सीबीसीआईडी इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने महाराजपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है. इस मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी समेत 6 पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है. जीवित 12 आरोपी पुलिसकर्मियों में सब इंस्पेक्टर बीडी सारस्वत, योगेंद्र नाथ सिंह, सिपाही नारायण तिवारी, तेज नारायण सिंह, बैद्यनाथ, बृजेश कुमार, और चंद्रावली शामिल हैं. एसीपी महाराजपुर आशुतोष सिंह ने बताया कि शासन से मंजूरी मिलने के बाद एफआईआर दर्ज हुई है और आगे की विवेचना सीबीसीआईडी करेगी.

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