पिता और बेटे का रिश्ता अक्सर अनुशासन, डांट और जिम्मेदारियों से जुड़ा नजर आता है, लेकिन कभी-कभी इसी रिश्ते का एक छोटा सा पल जिंदगी भर की याद बन जाता है. आगरा में ऐसा ही एक आत्मीय और भावुक पल देखने को मिला, जब केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो एसपी सिंह बघेल अपने बेटे डॉ पार्थ बघेल के लिए दोपहर का खाना लेकर अस्पताल पहुंच गए. खास बात यह रही कि बेटे की करीब 26 साल की शैक्षिक यात्रा में यह पहली बार था, जब पिता इस तरह लंच टाइम में टिफिन लेकर पहुंचे. यह जानकारी मंत्री के सोशल मीडिया पर दी गई.
प्रो. एसपी सिंह बघेल के बेटे डॉ. पार्थ बघेल इन दिनों आगरा के इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड हॉस्पिटल में एमडी की पढ़ाई कर रहे हैं. पढ़ाई के साथ वह अस्पताल में चिकित्सकीय सेवाओं से भी जुड़े हुए हैं. बुधवार को दोपहर के समय प्रो. बघेल अपने बेटे के लिए घर से भोजन का टिफिन लेकर अस्पताल पहुंचे. सामान्य तौर पर सार्वजनिक जीवन में व्यस्त रहने वाले पिता का यह सहज और पारिवारिक अंदाज वहां मौजूद लोगों के लिए भी खास रहा. इस खास पल को डॉ. पार्थ बघेल ने भी यादगार बताया. उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि स्कूल से लेकर कॉलेज तक करीब 26 वर्षों की शैक्षिक यात्रा पूरी करने के बाद अब वह एमडी की पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि जीवन में पहली बार उनके पिता लंच टाइम में उनके लिए टिफिन लेकर अस्पताल पहुंचे. उनके मुताबिक, यह उनके लिए बेहद खास और यादगार पल है.
दरअसल, पढ़ाई के शुरुआती वर्षों में बच्चों के लिए माता-पिता का टिफिन लेकर स्कूल या कॉलेज पहुंचना सामान्य बात मानी जाती है. लेकिन जब बेटा अपनी उच्च शिक्षा के दौर में पहुंचकर अस्पताल में चिकित्सकीय जिम्मेदारियां निभा रहा हो और इतने वर्षों बाद पिता उसके लिए खाना लेकर पहुंचे, तो यह भावनात्मक हो जाता है.
पिता ने मरीजों का भी जाना हाल
अस्पताल पहुंचने के बाद प्रो. एसपी सिंह बघेल ने केवल बेटे से मुलाकात ही नहीं की, बल्कि वहां मौजूद मरीजों से भी बातचीत की. उन्होंने मरीजों का हालचाल जाना और उनके उपचार के संबंध में जानकारी ली. उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की. इस दौरान पिता-पुत्र के बीच आत्मीय मुलाकात के साथ मरीजों के प्रति संवेदनशीलता का भाव भी देखने को मिला. पिता द्वारा बेटे के लिए टिफिन लेकर अस्पताल पहुंचने का यह प्रसंग इसलिए भी खास है क्योंकि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं की व्यस्तता के बीच ऐसे निजी और सहज पारिवारिक क्षण कम ही देखने को मिलते हैं. यही वजह है कि यह तस्वीर और इससे जुड़ा अनुभव लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया.
कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि यह घटना एक सरल संदेश भी देती है बेटा चाहे जीवन में कितना भी बड़ा मुकाम हासिल कर ले, माता-पिता के लिए वह हमेशा उनका बच्चा ही रहता है. 26 वर्षों की पढ़ाई के सफर के बाद एमडी कर रहे डॉ. पार्थ के लिए पिता का टिफिन लेकर अस्पताल पहुंचना शायद भोजन से कहीं बढ़कर स्नेह, अपनापन और आशीर्वाद लेकर आया था.
aajtak.in