एक दिन के लिए ही सही, लेकिन कक्षा छह में पढ़ने वाली पायल दीक्षित को ऐसा मौका मिला, जो उसके लिए जिंदगी का यादगार अनुभव बन गया. कक्षा 6 में पढ़ाई करने वाली पायल जब जिलाधिकारी की कुर्सी पर बैठीं, तो उनके सामने किताबों के बजाय लोगों की समस्याएं थीं. जनसुनवाई में पहुंचे फरियादियों ने अपनी शिकायतें रखीं और पायल ने उन्हें सुना. इसके बाद संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार शिकायतों का निस्तारण करने के निर्देश दिए.
मिशन शक्ति अभियान के तहत आयोजित इस पहल में उच्च प्राथमिक विद्यालय पिपरगांव की छात्रा पायल दीक्षित को एक दिन के लिए प्रतीकात्मक जिलाधिकारी बनाया गया. इस दौरान उन्होंने छह फरियादियों की समस्याएं सुनीं. शिकायतों में जमीन पर कब्जा, अतिक्रमण, जाम, सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण और आवास से जुड़े मामले शामिल थे. जिलाधिकारी की कुर्सी पर बैठने के बाद पायल के सामने अलग-अलग समस्याएं लेकर फरियादी पहुंचे. किसी ने जमीन पर कब्जे की शिकायत रखी, तो किसी ने अतिक्रमण और जाम की समस्या बताई. सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण और आवास से संबंधित शिकायतें भी जनसुनवाई में आईं. पायल ने सभी छह फरियादियों की बात सुनी. इसके बाद संबंधित अधिकारियों को शिकायतों का नियमानुसार निस्तारण करने के निर्देश दिए गए. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पायल को यह समझने का अवसर मिला कि प्रशासनिक स्तर पर लोगों की शिकायतें किस तरह सुनी जाती हैं और उनके समाधान के लिए अधिकारियों की क्या भूमिका होती है. हालांकि, यह एक प्रतीकात्मक जिम्मेदारी थी. शिकायतों के वास्तविक निस्तारण और उन पर आगे हुई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है.
क्या है मिशन शक्ति अभियान
मिशन शक्ति अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को बढ़ावा देना है. इसी के तहत बालिकाओं को प्रशासनिक कामकाज से परिचित कराने और उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए यह पहल की गई. अक्सर प्रशासनिक अधिकारियों को देखकर बच्चों के मन में भी ऐसे पदों पर पहुंचने की इच्छा पैदा होती है. लेकिन किसी सरकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली को करीब से देखना और लोगों की समस्याओं को सुनना उनके लिए अलग अनुभव होता है. पायल को एक दिन के लिए प्रतीकात्मक जिलाधिकारी बनाकर इसी तरह का अवसर दिया गया. इस पहल के माध्यम से बालिकाओं को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि वे भी भविष्य में प्रशासन, शिक्षा, पुलिस या दूसरे क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकती हैं.
डीएम ने पौधा देकर किया सम्मानित
जनसुनवाई पूरी होने के बाद जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने पायल दीक्षित को पौधा भेंट कर सम्मानित किया. उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करना है. इसके साथ ही उन्हें प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझने का अवसर देना भी इसका मकसद है. पायल के लिए यह अनुभव केवल जिलाधिकारी की कुर्सी पर बैठने तक सीमित नहीं रहा. जनसुनवाई में अलग-अलग लोगों की समस्याएं सुनकर उन्हें यह जानने का अवसर मिला कि प्रशासन का काम केवल आदेश देना नहीं, बल्कि आम लोगों की परेशानियों को समझना और नियमों के मुताबिक समाधान की दिशा में काम करना भी है.
एक दिन का अनुभव, भविष्य के लिए बड़ी सीख
पायल अभी कक्षा छह की छात्रा हैं. उनके सामने पढ़ाई और आगे बढ़ने के लिए लंबा रास्ता है. ऐसे में प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से देखने का यह अवसर उनके भीतर नई आकांक्षाएं पैदा कर सकता है. एक दिन की प्रतीकात्मक जिम्मेदारी से किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलता, लेकिन बच्चों को सरकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली समझने का मौका जरूर मिलता है. खासकर बालिकाओं के लिए ऐसी पहल आत्मविश्वास बढ़ाने और भविष्य में अलग-अलग क्षेत्रों में करियर बनाने की संभावनाओं से परिचित कराने का माध्यम बन सकती है. पायल दीक्षित का यह अनुभव दूसरे बच्चों के लिए भी प्रेरणा का कारण बन सकता है. पढ़ाई के साथ अपने लक्ष्य तय करना और उन्हें हासिल करने के लिए मेहनत करना ही आगे बढ़ने का रास्ता है. मिशन शक्ति के तहत हुई इस पहल ने पायल को एक दिन के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी का अनुभव दिया और बालिकाओं की नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करने का संदेश सामने रखा.
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