बिजनौर की फास्ट ट्रैक कोर्ट सात के न्यायाधीश शहजाद अली ने 2012 के चर्चित प्रबल हत्याकांड में उत्तर प्रदेश महिला आयोग सदस्य के पति विनय अग्रवाल, बेटे अपूर्व और वकील संजय गुप्ता समेत सात लोगों को दोषी ठहराकर जेल भेज दिया है. शहनाई बैंकट हॉल में विवाद के दौरान हुई मारपीट और शव गंगा में फेंकने के साढ़े 13 साल पुराने मामले में अदालत ने गवाहों और सबूतों के आधार पर आरोपियों को कस्टडी में लिया है. इस मामले में सजा का फैसला 31 जुलाई को किया जाएगा.
विवाद के बाद पिटाई और शव गंगा में फेंका
दिसंबर 2012 में अग्रसेन जयंती कार्यक्रम के दौरान प्रबल का कुछ रसूखदार लोगों से विवाद हुआ था. आरोप है कि लोगों ने पीट-पीटकर उसे अधमरा कर दिया और इलाज के दौरान मौत होने पर शव गंगा में फेंक दिया. 20 दिन बाद हस्तिनापुर के पास शव मिलने पर शहर में भारी हंगामा हुआ था.
माता-पिता का साया उठा, बहन ने लड़ी जंग
घटना के छह महीने बाद सदमे में प्रबल के पिता आलोक अग्रवाल की मौत हो गई और कुछ समय बाद मां भी चल बसीं. घर में अकेली बची बहन प्राची अग्रवाल ने हार नहीं मानी. शहर के रसूखदारों के खिलाफ कोई वकील केस लड़ने को तैयार नहीं था, लेकिन एडवोकेट मोहम्मद जकावत के सहयोग से उसने अदालत में लड़ाई जारी रखी.
पुलिस की लापरवाही और कोर्ट का सख्त न्याय
पीड़ित पक्ष के वकील ने आरोप लगाया कि पूंजीपति आरोपियों को बचाने के लिए पुलिस ने केस कमजोर कर दिया था और कुर्की वारंट के बावजूद नाम हटा दिए थे. इसके बावजूद कोर्ट ने सबूतों और गवाही को सही माना. प्राची ने कहा कि भाई के जाने का गम कभी कम नहीं होगा, लेकिन न्याय मिलने की तसल्ली है.
31 जुलाई को होगा सजा का ऐलान
दोषी करार दिए गए लोगों में महिला आयोग सदस्य के परिजनों के अलावा भाजपा नेता का भाई और रामलीला समिति का संरक्षक भी शामिल है. अदालत के इस सख्त फैसले के बाद शहर के प्रशासनिक व व्यापारिक हलकों में हड़कंप मच गया है. अब सभी की निगाहें 31 जुलाई को होने वाले सजा के ऐलान पर टिकी हैं.
संजीव शर्मा