313 तारीखें, खोए माता-पिता, मगर बहन ने नहीं खोया हौसला... प्राची ने 13 साल बाद भाई को दिलाया इंसाफ, 7 रसूखदारों को उम्रकैद

Bijnor Prabal Agarwal Case Verdict: बिजनौर में 13 साल बाद बहन प्राची ने अपने मृत भाई को इंसाफ दिला दिया. फास्ट ट्रैक कोर्ट ने संगीता जैन के पति-बेटे समेत 7 को उम्रकैद की सजा सुनाई. पढ़ें पूरी खबर...

Advertisement
बिजनौर के चर्चित प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में 13 साल बाद फैसला.(Photo:ITG) बिजनौर के चर्चित प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में 13 साल बाद फैसला.(Photo:ITG)

संजीव शर्मा

  • बिजनौर,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:32 PM IST

कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और इरादे सच्चे, तो बड़ी से बड़ी ताकत को भी न्याय के आगे झुकना पड़ता है. उत्तर प्रदेश के बिजनौर से आई यह खबर इस बात का जीता-जागता सबूत है. जहां एक बहन प्राची ने अपने इकलौते भाई की हत्या के खिलाफ अकेले साढ़े 13 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी. इस दौरान उन्होंने अपने माता-पिता को खोया, धमकियां सहीं, लेकिन हार नहीं मानी. आज कोर्ट ने 7 रसूखदार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. आइए देखते हैं इस साहसी बहन के संघर्ष की पूरी कहानी...

Advertisement

बिजनौर में साढ़े तेरह साल तक चली इंसाफ की एक ऐसी ही लड़ाई में आखिरकार सच की जीत हुई है. फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या 6 के जज शहजाद अली की अदालत ने इकलौते भाई प्रबल अग्रवाल की हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य संगीता जैन अग्रवाल के पति और बेटे सहित शहर के 7 रसूखदार आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही हर दोषी पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसमें से 90 प्रतिशत राशि पीड़िता को देने के आदेश दिए गए हैं.

19 दिसंबर 2012: क्या थी पूरी घटना?

दरअसल, शहर के एक बैंक्वेट हॉल में अग्रवाल समाज द्वारा अग्रसेन जयंती का कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इसमें मोहल्ला जाटान निवासी प्रबल अग्रवाल अपने दोस्त आशीष के साथ पहुंचे थे.

Advertisement

कार्यक्रम में प्रबल का कुछ रसूखदार लोगों से विवाद हो गया. आरोप है कि शहर के इन रसूखदारों ने प्रबल को लात-घूंसों से इतना पीटा कि वह अधमरा हो गया और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई. आरोपियों ने सबूत मिटाने के उद्देश्य से प्रबल के शव को गंगा नदी में ले जाकर फेंक दिया.

पुलिस की लापरवाही

प्रबल के पिता आलोक अग्रवाल ने थाना कोतवाली शहर में हत्या और शव गायब करने का केस दर्ज कराया था. लेकिन आरोपी बड़े बिजनेसमैन और रसूखदार थे, जिसके चलते पुलिस ने शुरू में इसे हत्या न मानकर गुमशुदगी में जांच की.

एक महीने बाद मेरठ के हस्तिनापुर में गंगा किनारे से प्रबल का शव बरामद हुआ. शव बिजनौर पहुंचने पर शहरवासियों ने उग्र प्रदर्शन किया और मुख्य चौराहे शक्ति चौक पर जाम लगा दिया.

बाएं से प्रबल अग्रवाल और बहन प्राची.(फाइल फोटो)

वकीलों का इनकार और मोहम्मद जकावत का सहारा

मामले में शहर के टॉप बिजनेसमैन और सीनियर वकील शामिल थे, जिसके कारण बिजनौर का कोई भी स्थानीय वकील प्राची का केस लड़ने को तैयार नहीं था. पुलिस ने भी 19 में से केवल 7 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और बाकी 12 लोगों के नाम निकाल दिए.

ऐसे कठिन समय में अधिवक्ता मोहम्मद जकावत ने प्राची को सहारा दिया. उन्होंने केस लड़ने की हामी भरी और गवाहों को अदालत के समक्ष पेश करने के लिए तैयार किया.

Advertisement

माता-पिता को खोया, पर नहीं तोड़ा हौसला

केस की सुनवाई शुरू होने से पहले ही इकलौते बेटे की मौत के सदमे में पिता आलोक अग्रवाल का निधन हो गया. इसके बाद केस की पैरवी के दौरान प्राची और उसकी मां को लगातार धमकियां दी गईं और पैसों का लालच भी दिया गया.

संघर्ष के इसी दौर में मां भी प्राची को अकेला छोड़कर इस दुनिया से चली गईं. अब प्राची इस लड़ाई में बिल्कुल अकेली रह गई थीं. न भाई, न पिता और न मां. शादी के बाद नोएडा शिफ्ट होने के बावजूद प्राची ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने साढ़े 13 वर्षों में 313 तारीखों पर नोएडा से बिजनौर आकर कोर्ट में पैरवी की.

कोर्ट का फैसला और दोषियों के नाम

अदालत ने 17 गवाहों के बयान सुनने के बाद 7 आरोपियों  विनय अग्रवाल (उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य संगीता जैन अग्रवाल के पति), अपूर्व अग्रवाल (संगीता जैन अग्रवाल का बेटा),  संजय गुप्ता (वरिष्ठ अधिवक्ता एवं रामलीला समिति बिजनौर के संरक्षक),  राहुल गुप्ता (व्यवसायी),  आशीष उर्फ आशु (व्यवसायी),  निखिल अग्रवाल (व्यवसायी) और अनुज अग्रवाल (व्यवसायी व भाजपा नेता का भाई) को दोषी माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

लापरवाह पुलिस अधिकारियों की जांच का आदेश
अदालत ने अपने आदेश में तत्कालीन जांच अधिकारियों की घोर लापरवाही पर भी कड़ा रुख अपनाया. कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारियों ने आरोपियों को बचाने के लिए केस में कई कमियां छोड़ी थीं. इसके लिए अदालत ने तत्कालीन एसपी और संबंधित जांच अधिकारियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करने के लिए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखने का आदेश दिया है.

Advertisement

सजा का ऐलान होते ही कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पुलिस सभी दोषियों को सीधे कस्टडी में लेकर जेल भेज गई.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »