वाराणसी जोन के एडीजी नवीन अरोड़ा ने बताया कि आजमगढ़ में करीब आठ घंटे तक चले ऑपरेशन में पुलिस ने आखिरी समय तक बच्चों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की. उनके मुताबिक, पुलिस अधिकारी लगातार अरविंद सिंह से बातचीत कर रहे थे, लेकिन वह न तो खुद बाहर आने को तैयार था और न ही बच्चों को बाहर छोड़ने के लिए राजी था. एडीजी ने बताया कि अरविंद बार-बार कह रहा था कि बच्चे उसके साथ हैं और वही उसकी ढाल हैं. पुलिस अधिकारियों ने उससे बातचीत के जरिए मामला खत्म करने की कोशिश की. लेकिन करीब सात घंटे बीतने के बाद भी वह अपनी जगह से हटने को तैयार नहीं हुआ.
इसके बाद पुलिस ने घर को चारों तरफ से घेरकर रखा. पुलिस की तैयारी चल ही रही थी कि अचानक कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आई. एडीजी के मुताबिक, कमरे के अंदर तीन बच्चे थे और गोली चलने के बाद किसी भी बड़ी घटना की आशंका थी. इसके बाद पुलिस के पास तत्काल कमरे में प्रवेश करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. पुलिस ने पहले स्टन ग्रेनेड और टियर गैस ग्रेनेड का इस्तेमाल किया. इसके बाद दरवाजा तोड़कर पुलिस टीम अंदर दाखिल हुई. एडीजी के मुताबिक, एसएसपी अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी और एसओजी के एक कांस्टेबल प्रदीप समेत पुलिसकर्मी कमरे के अंदर गए.
पुलिस के अंदर पहुंचते ही अरविंद ने फायरिंग शुरू कर दी. एडीजी के मुताबिक, उसने लगातार चार से पांच फायर किए. उसके पास लाइसेंसी रिवॉल्वर थी और उसमें छह राउंड थे. अरविंद ने रिवॉल्वर के सभी छह राउंड फायर कर दिए. इसके बाद पुलिस ने जवाबी फायरिंग की. पुलिस की ओर से तीन से चार राउंड फायर किए गए. इसी फायरिंग के दौरान अरविंद घायल हो गया. बाद में उसकी मौत हो गई. एडीजी के मुताबिक, पुलिस पार्टी में किसी को गोली नहीं लगी.
गोली चलने के बाद पुलिस ने की कार्रवाई
कमरे के अंदर पुलिस को अरविंद का बेटा पहले से घायल मिला. एडीजी ने बताया कि बच्चे को गोली लगी हुई थी. वहीं कमरे में मौजूद छोटी बच्ची अरविंद के हाथ से नीचे गिर गई. इसके बाद उसने अपनी दूसरी बेटी को गनपॉइंट पर अपने सामने कर लिया और उसे ढाल के तौर पर इस्तेमाल करने लगा. पुलिस ने कार्रवाई कर तीनों बच्चों को बाहर निकाला. गोली लगने से घायल बच्चे को तत्काल अस्पताल भेजा गया. उसकी हालत गंभीर बताई गई है. बाकी दोनों बच्चों को भी अस्पताल ले जाया गया. एडीजी के मुताबिक, लंबे समय तक कमरे में रहने के कारण दोनों बच्चे डिहाइड्रेशन और ट्रॉमा की स्थिति में थे.
एडीजी ने कहा कि पुलिस के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता तीनों बच्चों को सुरक्षित निकालना था. उन्होंने बताया कि पूरी कोशिश के बावजूद अरविंद बच्चों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं था. अंदर से गोली चलने के बाद पुलिस को अंतिम विकल्प के तौर पर जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी. यह पूरा मामला आजमगढ़ के अहरौला क्षेत्र के शंभूपुर गांव का है. पुलिस के मुताबिक, मंगलवार शाम अरविंद सिंह ने अपनी पत्नी और घर में धार्मिक अनुष्ठान कराने आए दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इसके बाद वह तीनों बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया. बताया गया कि घर में चार दिन से शांति पाठ और महामृत्युंजय पाठ कराया जा रहा था. इसी दौरान पुजारियों के साथ अरविंद का विवाद हुआ. विवाद के बाद उसने गोली चला दी. गोली लगने से उसकी पत्नी बबीता और दोनों पुजारियों की मौत हो गई.
इसके बाद अरविंद ने खुद को बच्चों के साथ कमरे में बंद कर लिया. पुलिस के पहुंचने के बाद उससे लगातार बातचीत की गई. अधिकारियों ने उसे समझाने की कोशिश की कि वह बाहर आ जाए और बच्चों को सुरक्षित बाहर भेज दे. लेकिन उसने ऐसा करने से इनकार कर दिया. पुलिस के मुताबिक, काफी देर तक बातचीत के बाद भी जब अरविंद बाहर नहीं आया तो घर की घेराबंदी और मजबूत की गई. पुलिस किसी भी स्थिति से निपटने की तैयारी कर रही थी. इसी दौरान कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी. इसके बाद पुलिस ने स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया और दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया. अंदर पहुंचते ही पुलिस पर फायरिंग हुई. जवाबी फायरिंग में अरविंद घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई.
पहले एक बेटे को खो चुकी थीं मां
वहीं, अरविंद की 70 वर्षीय मां श्यामला देवी ने घटना के बाद कहा कि वह पहले एक बेटे को खोने का दर्द झेल रही थीं और अब उनका दूसरा बेटा भी चला गया. उन्होंने बताया कि अरविंद पिछले कुछ महीनों से परेशान था. श्यामला देवी के मुताबिक, अरविंद के बड़े भाई की 2018 में एक रिश्तेदार ने विवाद के चलते गोली मारकर हत्या कर दी थी. इसके बाद से अरविंद परेशान रहने लगा था. श्यामला देवी ने बताया कि अरविंद, उसकी पत्नी बबीता, तीन बच्चे और वह खुद एक ही घर में रहते थे. उन्होंने कहा कि अब पूरा परिवार खत्म हो गया. उन्होंने यह भी बताया कि अरविंद बेरोजगार था और उसके खिलाफ तीन-चार मामले चल रहे थे. वह समय मिलने पर खेती का काम करता था. घटना की जानकारी मिलने के बाद अरविंद की शादीशुदा बहनें भी मौके पर पहुंची थीं.
फिलहाल तीनों बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. एक बच्चे को गोली लगी है और उसकी हालत गंभीर बताई गई है. दोनों बेटियों को भी अस्पताल में इलाज और देखभाल के लिए रखा गया है. पुलिस के मुताबिक, बच्चों के भविष्य और देखभाल को लेकर उनके रिश्तेदार और समुदाय आगे फैसला करेंगे. प्रशासन और पुलिस की ओर से हरसंभव मदद देने की बात कही गई है. इस तरह करीब आठ घंटे तक चला पूरा ऑपरेशन अरविंद की मौत के साथ खत्म हुआ. पुलिस के मुताबिक, शुरुआत में बातचीत के जरिए उसे बाहर निकालने की कोशिश की गई, लेकिन अंदर से गोली चलने के बाद कार्रवाई करनी पड़ी. पुलिस ने तीनों बच्चों को कमरे से बाहर निकाला, जबकि इस पूरे घटनाक्रम में अरविंद और उसके बेटे की मौत हो गई.
संतोष शर्मा