राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद अब जांच सिर्फ आरोपियों तक सीमित नहीं है. पुलिस एक और सवाल का जवाब तलाश रही है- आखिर मंदिर में चढ़ावा कम क्यों हुआ? क्या श्रद्धालुओं की संख्या घटी, इसलिए दान कम आया? या फिर दान में आई कमी का संबंध उस कथित चोरी से है, जिसकी जांच चल रही है? फिलहाल एजेंसियां दोनों की डिटेल खंगाल रही हैं.
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस पिछले कई महीनों के रिकॉर्ड खंगाल रही है. जांचकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद जब देशभर से लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे थे, तब चढ़ावा असाधारण रूप से बढ़ा था. अब अगर दान की राशि घटी है, तो क्या यह भीड़ कम होने का स्वाभाविक असर है या फिर इसके पीछे कोई और वजह है?
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यहीं से जांच का दूसरा हिस्सा शुरू होता है. पुलिस बैंक रिकॉर्ड, कैश कलेक्शन सिस्टम और मंदिर परिसर के CCTV फुटेज की बारीकी से जांच कर रही है. इसके साथ ही डोनेशन रजिस्टर में दर्ज रकम का बैंक में जमा हुई राशि से मिलान किया जा रहा है. मकसद यह पता लगाना है कि कागजों में दर्ज रकम और बैंक तक पहुंची रकम में कहीं कोई अंतर तो नहीं है.
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जांच अधिकारी काउंटिंग से लेकर बैंक में रकम जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया की भी पड़ताल कर रहे हैं. किसने रकम गिनी, किसने रिकॉर्ड तैयार किया और किसके जरिए बैंक तक पहुंची- हर कड़ी को जोड़ा जा रहा है.
हालांकि, अभी तक पुलिस ने चढ़ावे में आई कमी की वजह को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं निकाला है. जांच अभी जारी है और अधिकारी सभी दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल कर रहे हैं. यानी, राम मंदिर चढ़ावा मामले में चोरी की जांच के साथ एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि दान में आई गिरावट एक सामान्य ट्रेंड है या फिर किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत है.
मोबाइल, बैंक खाते और डिजिटल पेमेंट का रिकॉर्ड खंगाल रहीं एजेंसियां
इस पूरे मामले में जांच एजेंसियां अब आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों और डिजिटल पेमेंट से जुड़े रिकॉर्ड को खंगाल रही हैं. कोशिश यह है कि चढ़ावे की रकम मंदिर परिसर से निकलने के बाद किन-किन खातों या लोगों तक पहुंची और इस पूरे नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी. इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है.
पुलिस का मानना है कि आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ किए बिना पूरे घटनाक्रम की परतें खोलना मुश्किल होगा. इसी वजह से पुलिस कस्टडी रिमांड को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि हिरासत मिलने पर आरोपियों के बयानों का मिलान पहले से जुटाए गए दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों से किया जाएगा.
वहीं, एसआईटी की एंट्री के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है. सूत्रों के अनुसार, टीम अब तक जुटाए गए सभी भौतिक, डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों की जांच करेगी. इसके बाद यह तय किया जाएगा कि जांच को किन नए पहलुओं तक ले जाना है और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जरूरत है. फिलहाल पुलिस और एसआईटी दोनों का फोकस कथित गबन और उससे जुड़े किरदारों की पहचान करने पर है.
सिमर चावला