अयोध्या एक बार फिर भव्य दीपोत्सव के लिए तैयार है. 7 नवंबर को होने वाले दसवें दीपोत्सव को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए शहर में तैयारियां तेज कर दी गई हैं. 'राम की पैड़ी' समेत सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर मिट्टी के दीयों की कतारें सजने लगी हैं. इस बार करीब 30 लाख दीयों से सरयू का तट रोशन करने की तैयारी है.
स्वयंसेवक 56 घाटों पर दीये सजाने के काम में जुटे हैं. आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और मेहमानों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन का व्यापक इंतजाम किया है.
दीपोत्सव को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए पूरे आयोजन क्षेत्र को तीन स्तरीय सुरक्षा घेरे में बांटा गया है. मंगलवार को रामकथा पार्क परिसर में एडीजी जोन प्रवीण कुमार की अध्यक्षता में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की विस्तृत सुरक्षा बैठक हुई. इसमें अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियां सौंपी गईं. साथ ही भीड़ नियंत्रण, वीवीआईपी आवागमन, यातायात व्यवस्था और आयोजन स्थल की सुरक्षा को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए.
रामपथ पर वाहनों की आवाजाही बैन
प्रशासन ने 7 नवंबर को मुख्य आयोजन के दौरान धर्मपथ और रामपथ पर सभी तरह के वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रखने का फैसला किया है. शहर के प्रमुख रास्तों, प्रवेश द्वारों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी. अधिकारियों को आपसी तालमेल बनाए रखने, सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं.
एडीजी जोन प्रवीण कुमार ने बताया कि दसवें दीपोत्सव को सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. पूरे आयोजन को तीन सुरक्षा घेरे में रखा गया है और सभी अधिकारियों तथा पुलिसकर्मियों को उनकी जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है. सुरक्षा के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
वहीं, जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने कहा कि दीपोत्सव की सभी तैयारियां आपसी समन्वय के साथ की जा रही हैं. श्रद्धालुओं और मेहमानों की सुविधा, सुरक्षा तथा आयोजन का सुचारु संचालन प्रशासन की प्राथमिकता है. सभी संबंधित विभागों को आपस में तालमेल बनाकर अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं.
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प्रशासन का लक्ष्य है कि आस्था, संस्कृति और भव्यता का प्रतीक यह आयोजन बिना किसी बाधा के सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो. अब सबकी निगाहें 7 नवंबर पर हैं, जब 30 लाख दीयों की रोशनी में सरयू का तट एक बार फिर जगमगाएगा.
समर्थ श्रीवास्तव