उत्तर प्रदेश के अमेठी में पंचायत मतदाता सूची की बड़ी धांधली सामने आई है. ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायत किए जाने के बावजूद बीएलओ सर्वे के बाद भी ना तो जिंदा लोगों के नाम जोड़े गए और ना ही मृतकों के नाम काटे गए. दशकों से मतदान कर रहे परेशान ग्रामीणों ने आपस में चंदा जुटाकर न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया. पवन कुमार समेत 137 लोगों ने रिट याचिका संख्या 10808/2026 दायर की है. इसके बाद अब प्रशासनिक अधिकारी जांच-पड़ताल के लिए गांव के चक्कर लगा रहे हैं. पूरा मामला महमूदपुर न्याय पंचायत का है.
चंदा लगाकर हाईकोर्ट पहुंचे ग्रामीण
स्थानीय ग्रामीणों मो. अयाज खान, मो. रेयाज और हालिकुल निशा ने बताया कि वे पिछले 40 सालों से लगातार मतदान करते आ रहे हैं. इस बार अचानक उनके और उनके परिजनों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए, जबकि मृत लोगों के नाम दर्ज हैं. अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों को आपस में चंदा इकट्ठा करके कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा.
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हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद अधिकारियों में हड़कंप
हाईकोर्ट में मामला पहुंचने और वहां सुनवाई के दौरान लगी फटकार के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. अब अधिकारी गांव का दौरा कर घर-घर जाकर पड़ताल कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक उनके नाम मतदाता सूची में दोबारा नहीं जोड़े गए हैं. वर्षों से वोट दे रहे ग्रामीणों को अपने लोकतांत्रिक मताधिकार से वंचित होने का खतरा सता रहा है, जिससे इलाके में काफी नाराजगी है.
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अपर जिलाधिकारी ने दी सफाई
इस पूरे मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं. मामले में अपर जिलाधिकारी ज्योति सिंह ने कहा कि यह प्रकरण अभी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है. कोर्ट की तरफ से अभी तक कोई भी अंतिम आदेश प्राप्त नहीं हुआ है. जैसे ही न्यायालय का कोई आदेश आएगा, उसके अनुसार आगे की आवश्यक कार्यवाही की जाएगी.
अभिषेक कुमार त्रिपाठी