उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट को लेकर निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. मतदाता सूची तैयार करने में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए गए हैं. आयोग ने साफ कर दिया है कि अब लापरवाही के मामलों में जिम्मेदारी तय की जाएगी. जानिए, इसके लिए किन अधिकारियों और कर्मचारियों के काम की जांच होगी.
निर्वाचन आयोग ने 10 अप्रैल 2026 से अब तक कंप्यूटर सहायकों की ओर से दर्ज किए गए फॉर्म-6, 7 और 8 की जांच करने के निर्देश दिए हैं. जांच में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित ERO, AERO और कंप्यूटर सहायक की जिम्मेदारी तय होगी. जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी अपने स्तर पर निगरानी रखनी होगी. मंडलायुक्त इस पूरे काम पर नजर रखेंगे.
इसके अलावा, आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि कागज पर मिले फॉर्म की एंट्री कंप्यूटर सहायकों से नहीं कराई जाए. ऐसे फॉर्म को BLO ऐप के जरिए डिजिटल किया जाएगा. ERONET की लॉगिन आईडी और पासवर्ड किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा न करने की हिदायत भी दी गई है.
वोटर लिस्ट से हटेंगे डुप्लीकेट नाम
निर्वाचन आयोग ने आगामी ड्राफ्ट मतदाता सूची से दोहरी प्रविष्टियां हटाने को कहा है. यानी किसी व्यक्ति का नाम एक से ज्यादा बार दर्ज है, तो उसे जांच के बाद ठीक किया जाएगा. इसके अलावा, बुलंदशहर, सीतापुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ में डुप्लीकेट मतदाताओं की शिकायतों पर रिपोर्ट देने में देरी को लेकर भी नाराजगी जताई गई है. अधिकारियों को 10 अप्रैल से अब तक मिली शिकायतों का तय समय में सही तरीके से निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं.
वहीं, ERO को फॉर्म-6, 7 और 8 के लंबित मामलों की रोजाना समीक्षा करनी होगी. आयोग का जोर है कि शिकायतें लंबे समय तक न लटकी रहें और मतदाता सूची में गलतियां दूर की जाएं.
BLO की लापरवाही पर भी होगी कार्रवाई
निर्वाचन आयोग ने BLO के कामकाज को लेकर भी निर्देश दिए हैं. 'Book A Call With BLO' के जरिए संपर्क करने की रिक्वेस्ट 48 घंटे से ज्यादा लंबित नहीं रहनी चाहिए. अगर कोई BLO मतदाता से संपर्क किए बिना ही ऐप पर 'Unavailable' दर्ज करता है या विशेष अभियान दिवस पर गैरहाजिर रहता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. आयोग ने आगामी विशेष अभियान दिवसों पर सभी BLO को मौजूद रहने और अपना काम ठीक से करने के निर्देश दिए हैं.
समर्थ श्रीवास्तव