'हलाला, तीन तलाक की आड़ में यौन शोषण की अनुमति नहीं', इलाहाबाद HC की तीखी टिप्पणी

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने पीड़िता के पूर्व पति, चाचा, मौलाना समेत अन्य आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दीं. हाईकोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत कानूनों की आड़ में अपराधों को संरक्षण नहीं दिया जा सकता.

Advertisement
HC ने कहा है कि व्यक्तिगत कानूनों की आड़ में अपराध को संरक्षण नहीं दिया जा सकता. (Representational Photo: ITG) HC ने कहा है कि व्यक्तिगत कानूनों की आड़ में अपराध को संरक्षण नहीं दिया जा सकता. (Representational Photo: ITG)

आशीष श्रीवास्तव

  • प्रयागराज,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:27 PM IST

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निकाह, हलाला और तीन तलाक जैसी प्रथाओं पर तीखी टिप्पणी की है. अदालत ने कहा है कि इन प्रथाओं की आड़ में महिलाओं के यौन शोषण की अनुमति नहीं दी जा सकती है. कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसी प्रथाएं समाज का "काला पन्ना" हैं, जो संवैधानिक मूल्यों, समानता और मानवीय गरिमा के विरुद्ध हैं. न्यायालय ने कहा कि ऐसे कृत्य न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि समाज की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोरने वाले हैं.

Advertisement

न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने पीड़िता के पूर्व पति, चाचा, मौलाना समेत अन्य आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दीं. हाईकोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत कानूनों की आड़ में अपराधों को संरक्षण नहीं दिया जा सकता. अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को नाबालिग के साथ सुनियोजित सामूहिक दुष्कर्म का मामला मानते हुए गहन जांच की आवश्यकता बताई. 

कहां का है मामला

ये मामला अमरोहा के सैदनागली थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़िता ने कम उम्र में निकाह, तीन तलाक, हलाला और फिर से निकाह के नाम पर लगातार यौन शोषण के आरोप लगाए हैं. आरोपियों ने मुकदमा रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की थीं, जिन्हें कोर्ट ने खारिज कर दिया. 

अदालत ने कहा कि अब तक सामने आए तथ्य बेहद गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया सभी आरोपियों की भूमिका कानून के खिलाफ दिखाई देती है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच के इस प्रारंभिक चरण में एफआईआर रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता और विवेचना जारी रहेगी. 

Advertisement

कोर्ट ने कहा कि आरोपों से पहली नजर में पता चलता है कि जब पीड़िता नाबालिग थी, तब उसके साथ रेप हुआ था और बाद में एक घटना के दौरान गैंग रेप हुआ था, जिसे कथित तौर पर दूसरे हलाला के नाम पर छिपाया गया था.

कोर्ट ने कहा, "जब क्रिमिनल लॉ की बात आती है, तो जब तक कानून खुद कोई छूट न दे, जो वह बहुत कम करता है, शादी वगैरह को कंट्रोल करने वाले पर्सनल लॉ की दलील देने की कोई जगह नहीं है."

कोर्ट ने कहा कि आरोपों की पूरी जांच की ज़रूरत है और रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करके उन्हें शुरू में ही खत्म नहीं किया जा सकता. 

पीड़िता के साथ दो बार हलाला

FIR के अनुसार अप्रैल 2015 में पीड़िता को मुख्य आरोपी अजहर नवाज के साथ निकाह करने को मजबूर किया गया था. तब उसकी उम्र मात्र 15 साल थी. आरोपी ने जनवरी 2016 में उसे तीन तलाक दे दिया. 

कुछ महीने बाद नवाज ने फिर से शादी करने की इच्छा जताई. नवंबर 2016 में उसने सह आरोपी मौलाना कयूम के साथ निकाह हलाला रचाई. 

हलाला के समय उसकी उम्र 16 साल थी. पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने कहा कि तब उसे हलाला का मतलब भी नहीं पता था. उसने कहा कि उसके साथ रेप किया गया था. 2017 में नवाज के साथ उसका फिर से निकाह हुआ. लेकिन 4 साल बाद नवाज ने उसे फिर से तलाक दे दिया और दूसरी महिला से शादी कर ली. 

Advertisement

बाद में चूंकि नवाज की नई पत्नी बच्चे पैदा करने में असमर्थ थी. नवाज और उसके भाइयों ने पीड़िता को कहा कि वो वापस आ जाए और फिर से परिवार में रहे. उन्होंने पीड़िता से कहा कि चूंकि उसका निकाह दो बार टूटा है इसलिए उसे दो बार हलाला करना पड़ेगा. 

इसके बाद डबल हलाला के नाम पर मुख्य आरोपी के भाई और भतीजों ने कथित तौर पर 19 फरवरी 2025 को उसके साथ रेप किया. फिर उसी शाम को उसके साथ एक झूठा निकाह किया गया. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »