उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में चर्चित ऑडी कार हत्याकांड को लेकर नया मोड़ सामने आया है. इस मामले में पुलिस ने भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष चौधरी देवराज सिंह के भतीजे विक्रांत को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर विक्रांत की पहचान ऑडी कार के चालक के रूप में हुई है. दूसरी ओर, चौधरी देवराज सिंह अपने भतीजे को बेगुनाह बता रहे हैं. उनका दावा है कि घटना के समय विक्रांत अलीगढ़ में था ही नहीं, बल्कि कार उनका ड्राइवर चला रहा था. एक तरफ पुलिस गिरफ्तारी के पीछे तकनीकी साक्ष्यों का हवाला दे रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं. दोनों पक्षों के दावों के बीच इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है.
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष चौधरी देवराज सिंह ने दावा किया कि ऑडी कार घटना के समय उनका ड्राइवर चला रहा था. उनके मुताबिक, सारसौल के पास मोटरसाइकिल से टक्कर होने के बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई थी. पथराव के डर से ड्राइवर ने गाड़ी पीछे की और वहां से निकलकर सीधे थाने पहुंच गया. देवराज सिंह का कहना है कि ड्राइवर ने थाने में अपनी गलती भी स्वीकार की थी.
हालांकि, देवराज सिंह के अनुसार पुलिस ने ड्राइवर की बात पर भरोसा नहीं किया. उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका भतीजा विक्रांत घटना वाले दिन अलीगढ़ में मौजूद नहीं था. शुरुआत में मामले में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में विक्रांत का नाम सामने आया. देवराज सिंह ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद वह खुद अपने भतीजे को लेकर थाने पहुंचे थे. उन्होंने पुलिस से उसे न्यायालय में पेश करने को भी कहा था. उनके इन दावों के बाद मामले में पुलिस की जांच और गिरफ्तारी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर गिरफ्तारी की जानकारी दी
दूसरी तरफ, बन्नादेवी पुलिस ने 23 अक्टूबर को जारी प्रेस नोट में गिरफ्तारी की जानकारी दी. पुलिस के मुताबिक, घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर विक्रांत को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने आरोपी की पहचान विक्रांत पुत्र पंकज के रूप में बताई है. पुलिस के अनुसार, वह ऑडी कार नंबर UK07FW7577 चला रहा था. पुलिस ने आरोपी के कार से उतरते हुए एक वीडियो भी जारी किया है. यह वीडियो पुलिस की ओर से सामने रखे गए साक्ष्यों में शामिल है. पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान जुटाए गए सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंचा गया. वहीं, देवराज सिंह का कहना है कि घटना के समय उनका भतीजा अलीगढ़ में था ही नहीं और कार उनका ड्राइवर चला रहा था.
बन्नादेवी पुलिस के प्रेस नोट के मुताबिक, इस मामले में मुकदमा संख्या 782/26 दर्ज है. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की धारा 103(1), 352, 351(3) और 109(1) के तहत कार्रवाई की है. पुलिस ने विक्रांत को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. इस मामले में पुलिस के दावे और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष की ओर से दी गई सफाई के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है. पुलिस जहां सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों को गिरफ्तारी का आधार बता रही है, वहीं देवराज सिंह अपने भतीजे की घटना में मौजूदगी से ही इनकार कर रहे हैं.
पुलिस की जांच और पूर्व जिलाध्यक्ष के दावे आमने-सामने
अलीगढ़ के इस चर्चित मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार कौन चला रहा था. चौधरी देवराज सिंह के मुताबिक, उनका ड्राइवर मोटरसाइकिल से टक्कर के बाद थाने पहुंचा था और उसने अपनी गलती स्वीकार की थी. इसके विपरीत, पुलिस विक्रांत को ऑडी कार का चालक बताते हुए गिरफ्तार कर चुकी है. फिलहाल, पुलिस ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों का हवाला दिया है. दूसरी ओर, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ने अपने भतीजे को बेगुनाह बताया है. अब मामले में सामने आए दोनों पक्षों के दावों और पुलिस की जांच से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी.
अकरम खान