महिला के पेट में मिला बच्चे का कंकाल, बच्चा बन गया था पत्थर, डॉक्टर भी हैरान

सोमालीलैंड में 42 साल की एक महिला के पेट में करीब तीन साल तक मृत भ्रूण मौजूद रहा. पेट के अंदर एक भ्रूण का कंकाल मौजूद था. इसमें खोपड़ी, रीढ़ की हड्डी, पसलियां और हाथ-पैरों की हड्डियां साफ दिखाई दे रही थीं.

Advertisement
जांच के बाद डॉक्टरों ने इसे लिथोपेडियन यानी स्टोन बेबी बताया. ( Photo: ITG) जांच के बाद डॉक्टरों ने इसे लिथोपेडियन यानी स्टोन बेबी बताया. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:42 AM IST

दुनिया में कई बार मेडिकल साइंस से जुड़े ऐसे मामले सामने आते हैं, जिन्हें जानकर लोग हैरान रह जाते हैं. ऐसा ही एक अनोखा मामला सोमालीलैंड से सामने आया है. यहां 42 साल की एक महिला के पेट में करीब तीन साल तक एक मृत भ्रूण मौजूद रहा. हैरानी की बात यह है कि समय के साथ यह भ्रूण पत्थर जैसी सख्त संरचना में बदल गया. डॉक्टरों ने जांच के बाद इसे बाहर निकाला. मेडिकल साइंस में इस दुर्लभ स्थिति को 'लिथोपेडियन' (Lithopedion) या 'स्टोन बेबी' यानी पत्थर का बच्चा कहा जाता है.

Advertisement

महिला को पिछले तीन साल से पेट के निचले हिस्से में दर्द और भारीपन महसूस हो रहा था. शुरुआत में उसे लगा कि यह सामान्य परेशानी है, लेकिन समय के साथ दर्द बढ़ने लगा. इसके बाद जब उसने डॉक्टरों से जांच कराई तो सामने आई सच्चाई ने सभी को हैरान कर दिया.

तीन साल पहले गर्भवती होने का हुआ था एहसास
मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, महिला को करीब तीन साल पहले गर्भावस्था जैसे लक्षण महसूस हुए थे. उस दौरान उसका पेट बढ़ने लगा था और उसे पेट में बच्चे की हलचल जैसी चीज भी महसूस होती थी. हालांकि, कुछ समय बाद उसे ये हलचल महसूस होना बंद हो गई. इसके बाद धीरे-धीरे उसका पेट पहले जैसा होने लगा. महिला ने इस दौरान न तो किसी अस्पताल में जांच कराई और न ही डॉक्टर से संपर्क किया. उसे यह भी पता नहीं था कि उसके शरीर के अंदर क्या हो रहा है. अगले करीब तीन साल तक उसे पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द और भारीपन बना रहा. पिछले कुछ महीनों में यह परेशानी और बढ़ गई. आखिरकार वह इलाज के लिए अस्पताल पहुंची.

Advertisement

जांच में पेट के अंदर मिली पत्थर जैसी संरचना
अस्पताल में डॉक्टरों ने महिला की जांच की तो उन्हें पेट में एक सख्त और असामान्य गांठ महसूस हुई. यह गांठ नाभि के आसपास तक फैली हुई थी. खून की जांच में महिला को हल्की खून की कमी यानी एनीमिया भी मिला. वहीं, प्रेग्नेंसी टेस्ट निगेटिव आया. इसके बाद डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड कराया. इसमें गर्भाशय खाली दिखाई दिया, लेकिन पेट के अंदर एक सख्त और कैल्शियम से बनी संरचना नजर आई.

मामले को बेहतर तरीके से समझने के लिए डॉक्टरों ने सीटी स्कैन कराया. इसकी 3D तस्वीरों में जो दिखाई दिया, उसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया. पेट के अंदर एक भ्रूण का कंकाल मौजूद था. इसमें खोपड़ी, रीढ़ की हड्डी, पसलियां और हाथ-पैरों की हड्डियां साफ दिखाई दे रही थीं. इस पूरी संरचना का आकार करीब 18×12×10 सेंटीमीटर था. जांच के बाद डॉक्टरों ने इसे लिथोपेडियन यानी स्टोन बेबी बताया.

आखिर क्या होता है स्टोन बेबी?
स्टोन बेबी सुनने में भले ही किसी फिल्म की कहानी जैसा लगे, लेकिन यह मेडिकल साइंस से जुड़ी एक बेहद दुर्लभ स्थिति है. इसे समझने के लिए पहले सामान्य गर्भावस्था को जानना जरूरी है. आमतौर पर गर्भ ठहरने के बाद बच्चा महिला के गर्भाशय में विकसित होता है. लेकिन कुछ मामलों में भ्रूण गर्भाशय में पहुंचने के बजाय पेट के अंदर ही विकसित होने लगता है. इस स्थिति को एब्डॉमिनल प्रेगनेंसी यानी पेट में होने वाली अस्थानिक गर्भावस्था कहते हैं.

Advertisement

इस तरह की गर्भावस्था में बच्चे का सामान्य रूप से विकास होना मुश्किल होता है. कई बार कुछ समय बाद भ्रूण की मौत हो जाती है. इसके बाद महिला का शरीर धीरे-धीरे उस मृत भ्रूण को खत्म करने या सोखने की कोशिश करता है. लेकिन अगर भ्रूण का आकार बड़ा हो, तो शरीर उसे पूरी तरह अवशोषित नहीं कर पाता. ऐसी स्थिति में शरीर उस भ्रूण के चारों ओर कैल्शियम की एक सख्त परत बनाने लगता है. समय के साथ इस परत में कैल्शियम जमा होता जाता है और भ्रूण पत्थर जैसी सख्त संरचना में बदल जाता है. यही वजह है कि इसे 'स्टोन बेबी' यानी पत्थर का बच्चा कहा जाता है.

दरअसल, शरीर ऐसा अपने बचाव के लिए करता है. कैल्शियम की परत बनने से मृत भ्रूण के ऊतक (Fetal Tissue)आसपास के अंगों के संपर्क में कम आते हैं और उनसे नुकसान होने का खतरा घट सकता है. हालांकि, पेट में इस तरह की संरचना रहने से महिला को दर्द, पेट में भारीपन और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं. कई बार इसका पता सालों बाद चलता है, जब किसी दूसरी परेशानी की जांच के दौरान एक्स-रे या स्कैन किया जाता है.

ऑपरेशन करके निकाला गया भ्रूण
जांच में स्थिति साफ होने के बाद डॉक्टरों ने महिला का ऑपरेशन करने का फैसला किया. सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने महिला के पेट से कैल्शियम की परत में ढके भ्रूण को बाहर निकाल दिया. ऑपरेशन के अगले दिन महिला को हल्का बुखार और उल्टी जैसा महसूस हुआ, लेकिन इलाज के बाद ये परेशानियां ठीक हो गईं. इसके बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. डॉक्टरों ने अगले छह महीने तक महिला की निगरानी की. इस दौरान उसकी हालत में सुधार हुआ और पेट का दर्द पूरी तरह खत्म हो गया.

Advertisement

400 साल में सामने आए सिर्फ 330 से 340 मामले
इस बीमारी की दुर्लभता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले करीब 400 साल में मेडिकल रिकॉर्ड में इसके केवल 330 से 340 मामले दर्ज किए गए हैं. आमतौर पर ऐसे कई मामले तब सामने आते हैं, जब महिलाएं कई सालों तक पेट दर्द या किसी दूसरी परेशानी के कारण जांच कराती हैं. कुछ महिलाओं के शरीर में यह स्थिति दशकों तक बनी रहती है और उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं होती.

इस मामले में महिला की उम्र सिर्फ 42 साल थी और भ्रूण करीब तीन साल तक उसके पेट में रहा. डॉक्टरों ने इस केस के जरिए गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच और मेडिकल देखभाल की जरूरत पर जोर दिया है. यह मामला बताता है कि गर्भावस्था से जुड़े किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर डॉक्टर से जांच कराने से गंभीर परेशानियों का पता लगाया जा सकता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »