'पब्लिक सेक्टर की कम सैलरी वाली जॉब MNC से बेहतर', शख्स ने क्यों किया ऐसा पोस्ट

पब्लिक सेक्टर की नौकरी अच्छी या एमएनसी में कॉरपोरेट जॉब. इस पर अक्सर चर्चा होती रहती है. अब पीएसयू में काम करने वाले एक शख्स के पोस्ट ने सोशल मीडिया पर फिर से इस बहस को हवा दे दी है.

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पब्लिक सेक्टर की नौकरी अच्छी या एमएनसी की (Photo - Pixabay) पब्लिक सेक्टर की नौकरी अच्छी या एमएनसी की (Photo - Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:54 PM IST

आमतौर पर जब करियर की बात आती है तो लोगों के बीच एक धारणा रहती है कि MNC की नौकरी में ज्यादा सैलरी और बेहतर ग्रोथ मिलती है. जबकि PSU की नौकरी में कम कमाई होती है. लेकिन सोशल मीडिया पर एक 27 साल के PSU कर्मचारी की पोस्ट ने इस सोच पर बहस छेड़ दी है. शख्स का दावा है कि करीब 23 लाख रुपये सालाना CTC वाली उसकी नौकरी में खर्च इतने कम हैं कि वह अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बचा लेता है.

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Reddit पर शेयर की गई पोस्ट में कर्मचारी ने अपनी नौकरी और कमाई का पूरा हिसाब बताते हुए कहा कि वह करीब 23 लाख सालाना CTC पर काम करता है. उसके मुताबिक, निजी क्षेत्र या MNC में कुछ लोगों की सैलरी ज्यादा हो सकती है, लेकिन PSU की नौकरी में मिलने वाली सुविधाओं और कम खर्च की वजह से बचत काफी ज्यादा हो सकती है.

1.3 लाख महीने की कमाई, खर्च सिर्फ 15 हजार
कर्मचारी ने बताया कि उसे हर महीने करीब 1.3 लाख मिलते हैं और उसका महीने का खर्च शायद ही कभी *15 हजार से ज्यादा जाता है. उसके मुताबिक, कंपनी की तरफ से उसे रहने के लिए मकान, ईंधन और बिजली जैसी सुविधाएं मिलती हैं. ऑफिस में खाने पर भी अच्छी-खासी सब्सिडी मिलती है. ऐसे में उसकी जेब से होने वाला खर्च काफी कम रह जाता है.

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उसने अपनी पोस्ट में बताया कि उसकी सैलरी में करीब 1 लाख का वेतन, 28 हजार के आसपास परफॉर्मेंस रिलेटेड पे और करीब 14 हजार NPS में कंट्रीब्यूशन शामिल है. उसका कहना है कि सिर्फ परफॉर्मेंस पे से ही उसका महीने भर का खर्च निकल जाता है. यानी बाकी कमाई का बड़ा हिस्सा वह बचा लेता है.

असली फायदा है 'दूर की पोस्टिंग'
इस कर्मचारी के मुताबिक, PSU की नौकरी में बचत का सबसे बड़ा कारण उसकी पोस्टिंग भी है. उसने बताया कि नौकरी में कई बार ऐसे टियर-3 या ग्रामीण इलाकों में पोस्टिंग मिलती है, जहां नजदीकी शहर या गांव करीब 50 किलोमीटर दूर तक हो सकती है.

यह इस नौकरी का एक बड़ा नुकसान भी है. लेकिन शख्स के मुताबिक, ऐसी जगहों पर खर्च करने के मौके कम होते हैं. न महंगे रेस्टोरेंट, न रोज की शॉपिंग और न ही शहर जैसी दूसरी सुविधाएं. यानी जहां एक तरफ ऐसी पोस्टिंग में जिंदगी थोड़ी मुश्किल हो सकती है. वहीं दूसरी तरफ बचत तेजी से बढ़ती है.

MNC वालों की ज्यादा सैलरी, लेकिन खर्च भी ज्यादा?
शख्स ने अपनी पोस्ट में अपने पुराने दोस्तों का उदाहरण भी दिया. उसके मुताबिक, उसके कई पूर्व सहपाठी नौकरी के कई साल बाद भी करीब 12-15 लाख सालाना कमा रहे हैं. हालांकि, उसने यह भी माना कि उसके कुछ IT में काम करने वाले दोस्त 25-30 लाख तक कमा रहे हैं. लेकिन उसके मुताबिक, उनकी ज्यादा सैलरी का बड़ा हिस्सा किराए, EMI और शहर में रहने के दूसरे खर्चों में चला जाता है.

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वहीं PSU कर्मचारी का तर्क है कि उसे रहने, बिजली और ईंधन जैसी सुविधाएं मिलने के कारण उसकी बचत का प्रतिशत काफी ज्यादा है. यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि किसकी सैलरी कितनी है, बल्कि यह भी है कि महीने के आखिर में किसके हाथ में कितना पैसा बचता है.

10 लाख तक लोन और 50 लाख तक होम लोन का दावा
कर्मचारी ने अपनी नौकरी की आर्थिक सुरक्षा का भी जिक्र किया. उसका कहना है कि नौकरी की वजह से कर्मचारियों को 10 लाख तक के लोन और 50 लाख तक के होम लोन जैसी सुविधाएं बेहद कम साधारण ब्याज दर पर मिल सकती हैं.

उसके मुताबिक, ऐसी वित्तीय सुरक्षा से व्यक्ति के आत्मविश्वास पर भी असर पड़ता है. उसे लगता है कि नौकरी के साथ आर्थिक भविष्य ज्यादा सुरक्षित है.

इसी आर्थिक स्थिरता की वजह से वह अपने शौक भी पूरे कर पा रहा है. उसने बताया कि उसके पास नए गैजेट्स, स्पोर्ट्स बाइक, कई स्नीकर्स और प्रीमियम कपड़े हैं. वह दिल्ली घूमने जाता है. महंगे रेस्टोरेंट में खाना खाता है और गेमिंग का भी शौक पूरा करता है. यानी कम खर्च का मतलब यह नहीं कि वह पैसा खर्च नहीं करता. उसका कहना है कि वह जरूरी खर्च कम होने के कारण अपनी पसंद की चीजों पर खुलकर पैसा लगा सकता है.

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हालांकि, अपनी पोस्ट में इस कर्मचारी ने PSU की नौकरी को पूरी तरह परफेक्ट नहीं बताया. उसने इसका सबसे बड़ा नुकसान प्रोफेशनल ग्रोथ की कमी को बताया. उसने कहा कि वह पहले MNC में काम कर चुका है और वहां से PSU में आने के फैसले पर कई बार पछताता है. उसके मुताबिक, PSU में काम का माहौल अच्छा नहीं लगा और व्यक्तिगत विकास लगभग न के बराबर है.

उसका कहना है कि उसके MNC में काम करने वाले दोस्त अपने काम से ज्यादा संतुष्ट हैं और लगातार नई स्किल सीख रहे हैं. वहीं उसे लगता है कि वह खुद एक ऐसे सरकारी अधिकारी की तरह हो गया है, जिसकी काम में दिलचस्पी कम होती जा रही है. यानी पैसे और बचत के मामले में PSU नौकरी उसे बेहतर लगती है, लेकिन करियर ग्रोथ के मामले में MNC आगे नजर आती है.

अब MBA करना चाहता है
शख्स ने बताया कि PSU की नौकरी ने उसे अपनी 20s की जिंदगी आराम से जीने का मौका दिया. वह घूम पाया, पार्टी कर पाया, अपने शौक पूरे कर पाया और काफी पैसा बचा पाया. अब उसका लक्ष्य बदल रहा है. वह किसी *टॉप-20 बिजनेस स्कूल से MBA करना चाहता है. उसका दावा है कि उसने इतनी बचत कर ली है कि MBA की फीस के लिए उसे लोन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके बाद वह ज्यादा सार्थक काम और किसी बड़े शहर में बेहतर लाइफस्टाइल की तरफ बढ़ना चाहता है.

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Reddit पर छिड़ी PSU vs MNC की बहस
इस पोस्ट के बाद Reddit पर भी बहस छिड़ गई. कुछ यूजर्स ने PSU की नौकरी को मौजूदा समय में बेहतर विकल्प बताया, खासकर तब जब टेक्नोलॉजी सेक्टर में नौकरियों को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है. एक यूजर ने कहा कि नौकरी का फैसला काफी हद तक अर्थव्यवस्था और समय पर निर्भर करता है. उसने बताया कि वह खुद एक PSU में 8 साल काम करने के बाद MBA करके IT में गया और बाद में कॉरपोरेट सेक्टर छोड़ दिया.

वहीं कुछ लोगों ने ग्रामीण या दूरदराज की पोस्टिंग को लेकर भी सकारात्मक राय दी. उनका कहना था कि आज शहरों में ट्रैफिक, भीड़ और महंगी जिंदगी से परेशान लोग शांति और साफ हवा के लिए शहर से दूर जाते हैं. हालांकि, कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि हर व्यक्ति के लिए PSU और MNC का हिसाब अलग होगा. किसी के लिए ज्यादा बचत महत्वपूर्ण है तो किसी के लिए तेज करियर ग्रोथ, बड़े शहर में रहना और ज्यादा कमाई की संभावना.

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