लोन नहीं चुकाया... अब बिकेगा खामेनेई का लंदन वाला घर, कीमत है 450 करोड़!

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई का लंदन वाला घर बिकने वाला है. बड़ी बात यह है कि यह घर इजरायली दूतावास से सिर्फ 50 मीटर दूर है

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मोजतबा खामनेई से जुड़े लंदन में दो लग्जरी पेंटहाउस बिकने वाले हैं (Photo - Reuters) मोजतबा खामनेई से जुड़े लंदन में दो लग्जरी पेंटहाउस बिकने वाले हैं (Photo - Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:57 PM IST

लंदन के सबसे पॉश इलाकों में से एक में मौजूद एक आलीशान पेंटहाउस अब बिकने जा रहा है. इसकी कीमत करीब 12 मिलियन पाउंड यानी लगभग 140 करोड़ रुपये है. इसी बिल्डिंग में एक दूसरा पेंटहाउस भी है, जिसे करीब 16.75 मिलियन पाउंड में खरीदा गया था. दोनों की खरीद कीमत जोड़ें तो आंकड़ा करीब 36 मिलियन पाउंड यानी लगभग 450 करोड़ रुपये तक पहुंचता है. इन प्रॉपर्टीज का कथित कनेक्शन ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से जोड़ा गया है. हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड में इनका मालिक ईरानी बैंकर अली अंसारी है.

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अब सवाल है कि इतनी महंगी प्रॉपर्टी आखिर बिक क्यों रही है? वजह है लोन की किस्तें नहीं चुकाना. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंसारी ने इन प्रॉपर्टीज पर लिए गए मॉर्गेज का भुगतान नहीं किया. इसके बाद कर्ज देने वालों ने अपना पैसा वापस पाने के लिए प्रॉपर्टीज को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी.

450 करोड़ की प्रॉपर्टी में क्या-क्या है?
ये कोई आम फ्लैट नहीं हैं. ये लंदन के एक पॉश इलाके में बना बेहद आलीशान पेंटहाउस हैं. पहला पेंटहाउस बिल्डिंग की छठी और सातवीं मंजिल पर है. यह करीब 3,944 वर्ग फुट में फैला हुआ डुप्लेक्स है. इसमें पांच बेडरूम हैं. इसके अलावा स्टाफ के रहने के लिए अलग जगह और एक प्राइवेट रूफ टेरेस भी है.

इस पेंटहाउस को अब करीब 12 मिलियन पाउंड में बेचने की तैयारी है. खास बात यह है कि अली अंसारी ने इसे 2016 में करीब 19 मिलियन पाउंड में खरीदा था. यानी अब इसकी कीमत करीब 7 मिलियन पाउंड कम रखी गई है.

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दूसरा पेंटहाउस भी इसी बिल्डिंग में है. यह सातवीं और आठवीं मंजिल पर है. इसमें भी स्टाफ के लिए अलग जगह और प्राइवेट रूफ टेरेस मौजूद है. इसे अंसारी ने 2014 में  16.75 मिलियन पाउंड में खरीदा था. हालांकि, अभी इसे सार्वजनिक तौर पर बिक्री के लिए लिस्ट नहीं किया गया है. इसलिए इसकी मौजूदा कीमत सामने नहीं आई है.

इजरायली दूतावास से 50 मीटर से भी कम दूरी
इन घरों की कीमत जितनी चौंकाने वाली है. उनकी लोकेशन उससे भी ज्यादा चर्चा में है. ये पेंटहाउस केन्सिंगटन पैलेस के पास हैं और यहां से केन्सिंगटन गार्डेन का नजारा दिखाई देता है. लेकिन इनकी एक और खासियत है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये इजरायल के लंदन स्थित दूतावास से 50 मीटर से भी कम दूरी पर हैं.

इतना ही नहीं, इन घरों से दूतावास के पिछले हिस्से की सीधी लाइन ऑफ साइट होने की बात कही गई है. इसी वजह से इन प्रॉपर्टीज की लोकेशन को लेकर सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाए गए हैं. काउंटर टेररिज्म विशेषज्ञ रोजर मैकमिलन ने कहा कि ऐसी जगह से दूतावास में आने-जाने वाले लोगों को देखा और उनकी तस्वीरें ली जा सकती हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि कम दूरी होने की वजह से बाहरी बातचीत पर नजर रखने या खिड़कियों और वायरलेस नेटवर्क को निशाना बनाने जैसी ज्यादा आधुनिक निगरानी तकनीकों की सैद्धांतिक संभावना हो सकती है.

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हालांकि, इन अपार्टमेंट का इस्तेमाल जासूसी या निगरानी के लिए किया गया हो, इसका कोई सबूत नहीं है. इजरायली दूतावास ने भी इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है.

खामेनेई का घर या अंसारी की प्रॉपर्टी?
यहां एक बात समझना जरूरी है. इन दोनों पेंटहाउस के सरकारी रिकॉर्ड में मालिक अली अंसारी हैं. यानी कागजों में ये सीधे तौर पर मोजतबा खामेनेई के नाम पर नहीं हैं. फिर इनका नाम खामेनेई से कैसे जुड़ा?

इसके पीछे ईरान के सत्ताधारी वर्ग से जुड़े एक कथित अंतरराष्ट्रीय प्रॉपर्टी नेटवर्क की जांच है. जनवरी में ब्लूमबर्ग की एक जांच में लंदन और दूसरे देशों में मौजूद कई लग्जरी संपत्तियों को कथित तौर पर खामेनेई से जोड़ा गया था.

रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इन संपत्तियों को कई शेल कंपनियों, भरोसेमंद सहयोगियों और बिचौलियों के जरिए कंट्रोल किया जाता था.  जांच में उत्तर लंदन की द बिशप एवेन्यू , जिसे बिलियनायर्स रॉ  कहा जाता है, पर मौजूद 11 आलीशान मकानों का भी जिक्र हुआ था.

हालांकि, ब्लूमबर्ग की शुरुआती जांच में पैलेस ग्रीन के इन दोनों पेंटहाउस का नाम नहीं था. बाद में ब्रिटिश अखबारों ने प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और कथित वित्तीय नेटवर्क से जुड़ी जानकारियों को मिलाकर इन अपार्टमेंट का कनेक्शन खामेनेई से जोड़ा. मामला यहीं खत्म नहीं होता.

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जुलाई में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अली अंसारी पर प्रतिबंध लगाए. अमेरिका ने उन्हें खामेनेई का प्रमुख फाइनेंसर बताया और आरोप लगाया कि वह ईरान के सुप्रीम लीडर और वहां के सत्ताधारी वर्ग के दूसरे लोगों को फायदा पहुंचाने वाले अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों के नेटवर्क को संभालते थे.

ब्रिटेन भी पहले अंसारी पर प्रतिबंध लगा चुका है. उन पर ईरान के IRGC को आर्थिक मदद देने का आरोप लगाया गया था. ब्रिटेन में उनकी संपत्तियां फ्रीज कर दी गईं और उनके देश में प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई. हालांकि, अंसारी के वकील ने इन आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि अंसारी खामेनेई या IRGC के साथ किसी वित्तीय संबंध से इनकार करते हैं और ब्रिटिश प्रतिबंधों को चुनौती देंगे.

अब वापस उस सवाल पर आते हैं कि आखिर 36 मिलियन पाउंड में खरीदी गई ये प्रॉपर्टीज बिक क्यों रही हैं? रिपोर्ट के मुताबिक, अली अंसारी ने इन प्रॉपर्टीज पर लिए गए मॉर्गेज का भुगतान नहीं किया. इसके बाद निजी कर्जदाताओं ने बकाया रकम वापस पाने के लिए रिसीवर नियुक्त किए.

माना जा रहा है कि ब्रिटिश सरकार ने इन प्रॉपर्टीज को बेचने की मंजूरी दी है. बिक्री से मिलने वाले पैसे से सबसे पहले कर्ज देने वालों और प्रॉपर्टी की बिक्री से जुड़े खर्चों का भुगतान किया जाएगा.

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इसके बाद अगर कोई रकम बचती है, तो अंसारी पर लगे प्रतिबंधों की वजह से उसके फ्रीज रहने की उम्मीद है. यानी प्रॉपर्टी बिकने के बाद भी पूरी रकम सीधे मालिक के हाथ में नहीं जाएगी.

बिक्री के विज्ञापन में खामेनेई का नाम तक नहीं
दिलचस्प बात यह है कि इन आलीशान पेंटहाउस की बिक्री के लिए जारी किए गए प्रॉपर्टी ब्रोशर में न तो मोजतबा खामेनेई का नाम है और न ही अली अंसारी या ईरान से जुड़े विवाद का जिक्र.

इसमें खरीदारों को यह भी चेतावनी दी गई है कि एजेंटों के पास प्रॉपर्टी से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है. इसलिए खरीदारी से पहले सभी जरूरी जानकारी खुद हासिल करने की सलाह दी गई है.

इन पेंटहाउस को लेकर एक और दिलचस्प बात सामने आई है. पैलेस ग्रीन डेवलपमेंट के स्टाफ ने कथित तौर पर इन अपार्टमेंट को खरीदने के बाद से अली अंसारी या मोजतबा खामेनेई को वहां नहीं देखा है.

यानी जिस प्रॉपर्टी को लेकर इतना बड़ा राजनीतिक और वित्तीय विवाद सामने आया है, वहां इसके कथित मालिकों की मौजूदगी भी नजर नहीं आई. फिलहाल एक पेंटहाउस करीब 12 मिलियन पाउंड में बिक्री के लिए है. जबकि दूसरे की बिक्री कीमत अभी सामने नहीं आई है.

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कागजों में मालिक अली अंसारी हैं, लेकिन इन दोनों प्रॉपर्टीज का कथित कनेक्शन मोजतबा खामेनेई से जोड़ा गया है. और लोन की रकम नहीं चुकाने के बाद अब करोड़ों की ये लंदन प्रॉपर्टीज बिकने की कगार पर हैं.

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