सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल लगातार चर्चा में हैं. एक वजह उनका हाल में दिया गया इंटरव्यू है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी के तौर पर अपने अनुभवों और इस जिम्मेदारी से जुड़े काम के बारे में बताया था. कुछ ऐसे राज भी खोले, जिसके बारे में आम लोगों को पता ही नहीं था.सेना से करीब 12 साल की सेवा के बाद समय से पहले रिटायरमेंट लेने की वजह को लेकर भी उन्होंने बात की थी.
अब वह एक और वजह से सुर्खियों में हैं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर पेड सब्सक्रिप्शन शुरू की है, जिसकी कीमत रिपोर्टों के मुताबिक 199 रुपये प्रति महीने है. इसी फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है.
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि सेना में सेवा और राष्ट्रपति के एडीसी जैसे हाई-प्रोफाइल पद से मिली पहचान को पेड कंटेंट के जरिए कमाई में बदलना उचित नहीं है. वहीं, दूसरे लोग इसे रिटायरमेंट के बाद करियर का नया रास्ता मान रहे हैं. उनका तर्क है कि सेना से रिटायर होने के बाद कोई व्यक्ति अपनी पसंद का काम और कमाई का जरिया चुन सकता है.
इसके जरिए फॉलोअर्स को एक्सक्लूसिव कंटेंट, सब्सक्राइबर बैज, पोस्ट और रील्स का अर्ली एक्सेस और उनसे बातचीत के अतिरिक्त मौके मिल सकते हैं.सोशल मीडिया पर ये भी सवाल उठ रहे हैं एक पूर्व सैन्य अधिकारी को अपनी आर्मी बैकग्राउंड से बनी पहचान को कमर्शियल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल करना चाहिए.
समर्थक बोले- रिटायरमेंट के बाद नई शुरुआत क्यों नहीं?
हालांकि, सांब्याल के समर्थन में भी कई लोग सामने आए हैं. उनका तर्क है कि सेना से रिटायर होने के बाद किसी व्यक्ति को अपना अगला करियर चुनने का अधिकार है. उदाहरण के तौर पर रिटायरमेंट के बाद कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने राजनीति, कारोबार, मीडिया और दूसरे क्षेत्रों में करियर बनाया है.
पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह रिटायरमेंट के बाद राजनीति में आए और गाजियाबाद से सांसद रहे. मेजर जनरल बीसी खंडूरी राजनीति में गए और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने. वहीं, कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने सेना में सेवा देने के बाद निशानेबाजी में ओलंपिक सिल्वर मेडल जीता, फिर सेना से समय से पहले रिटायरमेंट लेकर राजनीति में प्रवेश किया और केंद्रीय मंत्री भी रहे.
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इसी तरह कुछ पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कृषि, कारोबार और रक्षा से जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्म भी शुरू किए हैं. समर्थकों का कहना है कि सांब्याल का सोशल मीडिया को करियर के रूप में चुनना भी इसी तरह की रिटायरमेंट के बाद की शुरुआत है.
वर्दी वाली तस्वीर को लेकर भी सवाल
सोशल मीडिया पर आलोचना का एक दूसरा पहलू सांब्याल की वर्दी वाली तस्वीरों से जुड़ा है. कुछ यूजर्स का कहना है कि आर्मी यूनिफॉर्म की तस्वीर का इस्तेमाल पेड सब्सक्रिप्शन को प्रमोट करने में नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे उस संस्था की प्रतिष्ठा को कमर्शियल एक्टिविटी से जोड़ने का सवाल उठता है.
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वहीं, इसके विरोध में लोगों का कहना है कि सांब्याल अब सेना में सेवा नहीं दे रहे हैं और उनकी तस्वीरें उनके पुराने सैन्य करियर का हिस्सा हैं. इसलिए रिटायरमेंट के बाद उनके निजी करियर पर इस आधार पर सवाल उठाना उचित नहीं है.
आखिर पेड सब्सक्रिप्शन में क्या है?
सांब्याल की पेड सब्सक्रिप्शन को लेकर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसमें मुख्य रूप से उनकी तस्वीरों और एक्सक्लूसिव कंटेंट तक पहुंच शामिल है. इसके अलावा सब्सक्राइबर्स को उनके साथ बातचीत करने और आने वाले वीडियो के विषयों पर सुझाव देने का मौका मिलता है. लाइव सेशन में शामिल होने की सुविधा भी सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध बताई गई है.
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