सोशल मीडिया पर किसी देश की तस्वीर कुछ सेकेंड के वीडियो से बन जाती है. भारत के मामले में भी ऐसा अक्सर देखने को मिलता है. गंदगी, ट्रैफिक, अव्यवस्था या हैरान करने वाले वीडियो वायरल होते हैं और देखते ही देखते उन्हें पूरे देश की तस्वीर की तरह पेश किया जाने लगता है. लेकिन क्या इंटरनेट पर दिखाई देने वाली ये तस्वीर भारत की पूरी सच्चाई है?
दिल्ली में रह रही अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर क्रिस्टन फिशर ने इसी सवाल को उठाया है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वायरल वीडियो शेयर कर कहा कि सोशल मीडिया पर भारत से जुड़ी ऐसी सामग्री बड़ी संख्या में मौजूद है, जो उनकी नजर में देश की वास्तविक जिंदगी से बिल्कुल मेल नहीं खाती.
एक वायरल वीडियो ने खींचा ध्यान
क्रिस्टन ने जिस क्लिप पर प्रतिक्रिया दी, उसमें एक भारतीय व्यक्ति को कचरे के बीच बैठकर अपने पेट पर रोटियां बेलते हुए दिखाया गया था. वीडियो देखने में इतना अजीब था कि इसे देखकर लोगों का ध्यान तुरंत इसकी तरफ गया.
क्रिस्टन का दावा है कि यह वीडियो वास्तविक नहीं, बल्कि एआई से तैयार किया गया है. उन्होंने बताया कि मूल क्लिप को लाखों बार देखा जा चुका था. उनके मुताबिक, यही समस्या है- लोग ऐसे वीडियो को सच मानकर भारत के बारे में अपनी राय बना लेते हैं.
देखें पूरा वीडियो
उन्होंने अपने वीडियो में इस बात पर नाराजगी जताई कि इंटरनेट पर भारत को दिखाने के लिए बार-बार ऐसी ही विचित्र तस्वीरों का इस्तेमाल किया जाता है.
'लोग मुझसे पूछते हैं, भारत में क्यों रहती हो?'
क्रिस्टन के लिए यह सिर्फ किसी एक वीडियो का मामला नहीं है. उन्होंने बताया कि भारत में रहने के दौरान उनसे कई बार पूछा गया कि वह ऐसे देश में क्यों रहती हैं, जिसे इंटरनेट पर गंदा और अव्यवस्थित बताया जाता है.उनका जवाब है कि भारत को सिर्फ सोशल मीडिया पर देखकर समझना और यहां रहकर उसे महसूस करना दो अलग चीजें हैं.
उनके मुताबिक, अगर किसी विदेशी को लगातार भारत के बारे में सिर्फ नकारात्मक वीडियो दिखाई दें, तो उसके मन में देश की वैसी ही छवि बनना स्वाभाविक है. लेकिन जमीन पर आकर लोगों के बीच रहने पर तस्वीर काफी अलग नजर आ सकती है.
'भारत वैसा नहीं है जैसा इंटरनेट दिखाता है'
क्रिस्टन ने अपने अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि भारत को जिस तरह की एकतरफा तस्वीर के साथ पेश किया जाता है, वह वास्तविकता का पूरा हिस्सा नहीं है.उन्होंने भारत के लोगों के व्यवहार और यहां की रोजमर्रा की जिंदगी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें यहां बहुत अच्छे और मिलनसार लोग मिले हैं. उनके लिए भारत सिर्फ वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली गंदगी या अव्यवस्था का नाम नहीं है.
यही वजह है कि उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर तस्वीर को सच मान लेने से पहले उसके बारे में सोचने की अपील की.
एआई ने बढ़ा दी तस्वीर बिगाड़ने की चिंता
इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प पहलू एआई से बनाए जा रहे वीडियो हैं. पहले किसी घटना को गलत संदर्भ में शेयर करना आसान था, लेकिन अब जनरेटिव एआई की मदद से ऐसी तस्वीरें और वीडियो बनाए जा सकते हैं, जिनमें वास्तविक और नकली के बीच फर्क करना मुश्किल हो सकता है.
क्रिस्टन ने इसी खतरे की ओर ध्यान खींचते हुए कहा कि अगर किसी देश को लेकर पहले से बनी धारणा के साथ ऐसे फर्जी वीडियो लगातार वायरल हों, तो वे उस देश की छवि को और प्रभावित कर सकते हैं.
लोगों ने भी किया रिएक्ट
क्रिस्टन की पोस्ट पर कई भारतीय यूजर्स ने उनका समर्थन किया. कुछ लोगों ने भारत के बारे में गलत या भ्रामक कंटेंट के खिलाफ बोलने के लिए उनका धन्यवाद किया. कई कमेंट्स में लोगों ने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी देश के बारे में बनी धारणा और वहां जाकर मिलने वाला अनुभव अलग हो सकता है.
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